रेलवे ने किया बिलासपुर से जयरामनगर के बीच कवच का सफलतापूर्वक ट्रायल

बिलासपुर: सुरक्षा के तहत दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल के अंतर्गत बिलासपुर-जयराम नगर रेलखंड में ‘कवच’ लोकोमोटिव ट्रायल का शुभारंभ किया गया है। ज्ञात होगा गत वर्ष नवंबर माह में इसी रेलखंड के बीच लालखदान के पास एक बड़ी रेल दुर्घटना घटी थी। यह ट्रायल ब्लॉक सेक्शन में स्थापित प्रोग्राम्ड टैग्स की रीडिंग को ‘कवच’ से सुसज्जित लोकोमोटिव के माध्यम से सत्यापित करने के उद्देश्य से किया गया। ट्रायल के दौरान ‘कवच’ की ऑटोमैटिक ब्रेकिंग प्रणाली को भी असामान्य एवं अप्रत्याशित परिचालन परिस्थितियों में सफलतापूर्वक परखा गया।

संरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

इन ट्रायल्स का सफलतापूर्वक संपन्न होना दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में ‘कवच’ तकनीक के औपचारिक रोलआउट की शुरुआत को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य ट्रेन परिचालन में संरक्षा को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाना है। ‘कवव’ ट्रायल के आरंभ के साथ ही रेलवे अधिकारी एवं कर्मचारी इस अत्याधुनिक प्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर रहे हैं, जिससे दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अन्य रेल खंडों में ‘कवच’ के त्वरित कार्यान्वयन में सहायता मिलेगी। ट्रायल्स में ट्रेन रनिंग स्टाफ की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है, ताकि वे विभिन्न परिचालन परिस्थितियों में ‘कवच’ के कार्यप्रणाली को भली-भांति समझ सकें और प्रणाली से पूर्णतः परिचित हो सकें। यह ट्रायल ऐसे समय में किया जा रहा है, जब दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे क्षेत्राधिकार में व्यापक स्तर पर ‘कवच’ कार्यों को शुरू किया गया है।

स्टेशन ‘कवच’, लोको ‘कवच’, दूरसंचार टावर, ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क एवं अन्य संबंधित अधोसंरचना के लिए टेंडर पहले ही जारी किए जा चुके हैं। दक्षिण पूर्व मध्य में ‘कवच’ परियोजना की कुल स्वीकृत लागत लगभग 1,654 करोड़ है। वर्तमान में नागपुर-झारसुगुड़ा खंड पर ‘कवच’ का कार्य प्रगति पर है, जो उच्च घनत्व वाले मुंबई-हावड़ा कॉरिडोर के 614 रूट किलोमीटर को कवर करता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान नागपुर-गोंदिया खंड 135 रूट किलोमीटर) में ‘कवच’ रोलआउट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, दक्षिण नेटवर्क के अन्य विभिन्न खंडों पर भी ‘कवच’ कार्य प्रगति पर हैं। ‘कवच’ भारत की राष्ट्रीय ऑटोमैटिक ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसे सिग्नल पासिंग एट डेंजर, आमने-सामने एवं पीछे से होने वाली टक्करों को रोकने, गति पर्यवेक्षण सुनिश्चित करने तथा मानवीय त्रुटियों से होने वाली दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने के लिए विकसित किया गया है।

सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"
सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »