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“कवच” सुरक्षा बिलासपुर रेलवे जोन ने पहन लिया

बिलासपुर: दपूम रेलवे जोन में अब से ट्रेनों का सुरक्षित परिचालन होगा। दो ट्रेनों के बीच आमने सामने की टक्कर व सिग्नल और स्पीड से संबंधित दुर्घटनाओं पर विराम लगेगा।बिलासपुर जोन में आटामैटिक ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच पर कार्य शुरू हो गया है। पिछले दिनों बिलासपुर- जयरामनगर रेलखंड में एक लोकोमोटिव पर कवच लगाकर ट्रायल भी किया गया।

"कवच" सुरक्षा बिलासपुर रेलवे जोन ने पहन लिया

अब ट्रेनों की टक्कर से बचा जा सकेगा और बचेगी जानें

इंजन के साथ-साथ ट्रैक व स्टेशन में कवच लगाया जाएगा। इसके बाद ही कवच से सुरक्षा का उद्देश्य पूरा होगा।दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे क्षेत्राधिकार में व्यापक स्तर पर कवच लगाने का कार्य शुरू किया गया है। स्टेशन कवच, लोको कवच, दूरसंचार टावर, आप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क एवं अन्य संबंधित अधोसंरचना के लिए टेंडर, पहले ही जारी किए जा चुके हैं। दक्षिण पूर्व मध्य में इस परियोजना की 1,654 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वर्तमान में नागपुर-झारसुगुड़ा खंड पर कवच का कार्य प्रगति पर है, जो उच्च घनत्व वाले मुंबई-हावड़ा कारिडोर के 614 रूट किलोमीटर को कवर करता है। वित्तीयवर्ष 2025-26 के दौरान नागपुर-गोंदिया खंड 135 रूट किलोमीटर में कवच रोलआउट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, दक्षिण नेटवर्क के अन्य विभिन्न खंडों पर भी कवच कार्य प्रगति पर हैं।

क्या है कवच तकनीक

कवच भारतीय रेलवे की स्वदेशी और उन्नत आटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन प्रणाली है। यह दो ट्रेनों के बीच आमने-सामने की टक्कर को रोक सकेगी। इसमें रेडियो फ्रिक्वेसी टैग व वायरलेस कम्युनिकेशन का उपयोग कर ट्रेन के इंजन, ट्रैक, सिग्नल और स्टेशन को आपस में इंटरलाक किया जाता है। डिवाइस ट्रेन को सही गति और सुरक्षित संचालन के निर्देश देती है।

इस प्रणाली की विशेषता और लाभ

यह भारतीय रेलवे की एक उन्नत स्वदेशी संरक्षा तकनीक तकनीक में एक है, जो ट्रेन संचालन को संरक्षित और कुशल इस आटोमेटिक तकनीक बनाने के लिए डिजाइन की गई है। कवच अब दो ट्रेनों के बीच आमने-सामने की टक्कर से बचाव करेगी।यह प्रणाली सिग्नल एवं स्पीड से संबंधित दुर्घटनाओं को रोकने में पूर्णतः सक्षम है।पूरे सेक्शन में विश्वसनीय वायरलेस कम्युनिकेशन स्थापित किया जाता है, जिससे स्टेशन इंटरलाकिंग सिस्टम, सिग्नल व समपार फाटकों की जानकारी सीधे लोको पायलट को मिलती है।ट्रेन की गति सिग्नल की स्थिति-पोज़िशन के साथ स्वतःइंटरलाक हो जाती है, जिससे संचालन में संरक्षा का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित होता है।लोको पायलट को निरंतर सहयोग प्रदान कर यह प्रणाली उच्च गति वाले परिचालन को और अधिक संरक्षित बनाती है।

कवच कैसे करता है काम

इसमें लगा उपकरण ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह हर इंजन को नियंत्रित करता है। यह प्रणाली ड्राइवर के केबिन में लाइन स्टेशन पर लगा उपकरण डायवर्जन, कर्ष और जरूरी जानकारी रेडियो फ्रीक्वेंसी के माध्यम से लोको में लगे उपकरण को भेजता है. लोको उपकरण से गति, डायरेक्शन स्टेशन पर हर दो मिनट पर भेजी जाती है. जैसे ही ओवरस्पीड होती है, स्टेशन कवच लोको के उपकरण को मैसेज भेज ट्रेन को तत्काल रोक देता है। सिग्नल पालन न होने पर भी मशीन तत्काल ट्रेन को रोक देती है। खराब मौसम मैं जब विजुअल प्रॉब्लम रहता है तब यह ड्राइवर को संदेश भेजती है जिससे घने कोहरे, बरसात में भी सुरक्षा और दक्षता सुनिश्चित होती है। लोको पायलट ब्रेक लगाने में विफल रहता है तो भी यह प्रणाली स्वचालित रूप से ब्रेक लगाकर ट्रेन की गति को नियंत्रित करने का काम करेगी।

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