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53वें विश्व पुस्तक मेले में ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया का साहित्य महोत्सव, ‘भारत और पुस्तक संस्कृति’ पर हुई सार्थक परिचर्चा

प्रगति मैदान के भारत मंडपम् में चल रहे 53 वें विश्व पुस्तक मेला 2026 में ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने साहित्य महोत्सव मनाया। इस कार्यक्रम में दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, आगरा और जबलपुर के मूर्धन्य साहित्यकारों ने शिरकत की। 

‘भारत और पुस्तक संस्कृति’ पर परिचर्चा और गिल्ड के सदस्यों की नवीनतम पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। परिचर्चा के मुख्य वक्ता डायमंड बुक्स के अध्यक्ष श्री नरेंद्र वर्मा थे। अन्य वक्ताओं में हिंदी के साहित्यकार एवं कवि प्रोफेसर हरीश अरोड़ा और राकेश पाण्डे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष डॉ. मुकेश अग्रवाल की और मंच संचालन गिल्ड के महासचिव डॉ. शिवशंकर अवस्थी ने किया। 

‘भारत और पुस्तक संस्कृति’ पर परिचर्चा का शुभारंभ करते हुए महासचिव डॉ.. शिवशंकर अवस्थी ने कहा कि ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के लेखकगण ने देश में जिस तरह से पुस्तक संस्कृति का विस्तार किया है उस तरह का उदाहरण शायद ही किसी और साहित्य संस्था में देखने को मिले। भले ही आज इस विषय पर यहां हम यहां चर्चा कर रहे हो लेकिन ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने यह कार्य अपनी स्थापना से ही शुरू कर दिया था। 

मुख्य वक्ता नरेंद्र वर्मा ने कहा – “भारत से दुनिया में ज्ञान का विस्तार हुआ। आज इंटरनेट का जमाना है लेकिन इसके बावजूद आज किताबों की मांग कम नहीं हुई है।” डायमंड कॉमिक्स का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों में किताबें पढ़ने की ललक पैदा करने में डायमंड कॉमिक्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज के डिजिटल युग में भी किताबों का महत्व कम नहीं होगा क्योंकि शब्द हमेशा रहेंगे।”

राकेश पाण्डे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा – “भारत में पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार को पहल करनी होगी। पुस्तकालयों की संख्या बढ़ाने के प्रयास करने होंगे। जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए हर शहर में कम-से-कम दो-दो पुस्तकालय खोलने चाहिए। पुस्तकों की खरीद बढ़ानी चाहिए।”

पीजीडीएवी महाविद्यालय सांध्य में हिंदी के प्रवक्ता प्रोफेसर हरीश अरोड़ा ने कहा – “हमारे देश में सभी भाषाओं का साहित्य समृद्ध है। इस समृद्धि ने भारत में एक विकसित पुस्तक संस्कृति को आधार दिया। जिसके बल पर हमने सारी दुनिया की सोच बदली। दुनिया भर के आदिवासियों को ज्ञानवान बनाकर एक नई जीवन शैली प्रदान की।” 

कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. मुकेश अग्रवाल ने सभी वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा – “दौर एक बार फिर से करवट बदल रहा है। ई-पुस्तकें कभी भी प्रकाशित पुस्तकों का स्थान नहीं ले सकतीं क्योंकि पुस्तकों का अपना एक अलग संसार है। इस पुस्तक मेला में युवाओं की भागीदारी देखते हुए ऐसा महसूस हुआ कि आधुनिक युवा पीढ़ी फिर से किताबों की दुनिया में लौट रही है।” 

इस अवसर पर डॉ. शिवशंकर अवस्थी की पुस्तक ” विचार प्रवाह”, डॉ. संदीप कुमार शर्मा कृत उपन्यास “छत : अरमान हमारे अपनों के” एवं “वंदे मातरम (संक्षिप्त परिचय), काव्यांशी श्रीवास्तव की अनंत प्रेम, डॉ. अजय झा की तीन अंग्रेजी और पत्रिका सूर्य प्रभा का आदि पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। 

कार्यक्रम में डॉ. हरीसिंह पाल, डॉ. अजय कुमार झा, डॉ. संदीप कुमार शर्मा, जबलपुर से पधारी डॉ. सलमा जमाल, होम्योपैथी चिकित्सक एवं लेखक डॉ. दीपक शर्मा, आकाशवाणी से सुश्री नीलम मलकानिया, वित्त मंत्रालय भारत सरकार के मुंबई क्षेत्र के पूर्व निदेशक सुधीर कुमार भटनागर, अरुण कुमार पासवान, अंजलि अवस्थी, डॉ. पुष्पा सिन्हा, डॉ. महेंद्र शर्मा जय बहादुर सिंह राणा, श्रीमती सुदेश भाटीया, सुजित बाजपेयी, चेतन बाछोतिया आदि सहित अनेक साहित्यकार एवं पुस्तक प्रेमियों ने शिरकत की। 

डॉ. शिवशंकर अवस्थी, महासचिव ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया

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