NEW English Version

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की जैव विविधता पर्यावरणीय और आर्थिक सुरक्षा की आधारशिला: डॉ. जितेंद्र सिंह

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की समृद्ध और विशिष्ट जैव विविधता न केवल पर्यावरणीय संतुलन के लिए, बल्कि भारत की दीर्घकालिक आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह बात केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कही।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की जैव विविधता पर्यावरणीय और आर्थिक सुरक्षा की आधारशिला: डॉ. जितेंद्र सिंह

डॉ. सिंह ने श्री विजयपुरम में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के अंडमान और निकोबार क्षेत्रीय केंद्र का दौरा करते हुए द्वीपसमूह के जैव विविधता संसाधनों के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया।

जैव विविधता की जीवंत प्रयोगशाला

वैज्ञानिकों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह एक जीवंत जैव विविधता प्रयोगशाला के समान है, जहां आधुनिक विज्ञान को संरक्षण और सतत आजीविका के साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय प्राणी सर्वेक्षण जैसे संस्थान प्रामाणिक और साक्ष्य आधारित वैज्ञानिक आंकड़े उपलब्ध कराते हैं, जो जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता और महासागर आधारित आर्थिक विकास से जुड़ी राष्ट्रीय नीतियों को दिशा देने में सहायक होते हैं।

अनुसंधान और वैज्ञानिक योगदान

इस अवसर पर डॉ. सिंह का स्वागत वैज्ञानिक एफ और प्रभारी अधिकारी डॉ. सी. शिवपेरुमन ने किया। उन्होंने क्षेत्रीय केंद्र के उद्देश्यों, चल रहे अनुसंधान कार्यक्रमों तथा द्वीपसमूह की विशिष्ट जीव विविधता के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और निगरानी में केंद्र की भूमिका के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

केंद्रीय मंत्री को वर्गीकरण, आणविक प्रणाली विज्ञान, डीएनए बारकोडिंग, जैव विविधता आकलन और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के कार्यों से अवगत कराया गया। यह अनुसंधान न केवल शैक्षणिक महत्व का है, बल्कि नीति निर्माण और संरक्षण रणनीतियों के लिए भी आधार प्रदान करता है।

पांच दशक की वैज्ञानिक सेवा

वर्ष 1977 में स्थापित अंडमान और निकोबार क्षेत्रीय केंद्र ने निरंतर वैज्ञानिक सेवा के पांच दशक पूरे कर लिए हैं। यह केंद्र उष्णकटिबंधीय द्वीप जैव विविधता अनुसंधान का एक प्रमुख संस्थान बनकर उभरा है। अब तक विभिन्न जीव समूहों में लगभग 90 अनुसंधान कार्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं।

केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा 85 पुस्तकें और 850 से अधिक शोध पत्र प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित किए गए हैं, जिससे भारत के जैव विविधता ज्ञान भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

संग्रहालय और जन जागरूकता

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पोर्ट ब्लेयर स्थित जेडएसआई संग्रहालय का भी दौरा किया, जो द्वीपसमूह के प्रमुख पर्यटन और शैक्षिक स्थलों में से एक है। इस संग्रहालय में 22 जीव जंतु समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 3,500 नमूने संरक्षित हैं।

उन्हें बताया गया कि संग्रहालय प्रतिवर्ष 75,000 से 1,00,000 आगंतुकों को आकर्षित करता है, जिनमें छात्र, शोधकर्ता और पर्यटक शामिल हैं। डॉ. सिंह ने स्थानिक, लुप्तप्राय और संकटग्रस्त जीव जंतुओं को प्रदर्शित करने वाले संदर्भ संग्रह और प्रदर्शनियों में विशेष रुचि दिखाई और जन जागरूकता के क्षेत्र में संग्रहालय की भूमिका की सराहना की।

नई प्रजातियों की खोज और वैश्विक महत्व

केंद्रीय मंत्री को जानकारी दी गई कि केंद्र के वैज्ञानिकों ने विज्ञान के लिए 20 से अधिक नई प्रजातियों की पहचान की है। इसके अतिरिक्त, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र से लगभग 900 नए जीव जंतुओं के रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं। ये उपलब्धियां इस क्षेत्र की जैव विविधता के वैश्विक महत्व को स्पष्ट रूप से उजागर करती हैं।

प्रवाल भित्ति अनुसंधान में भूमिका

डॉ. जितेंद्र सिंह को यह भी बताया गया कि पोर्ट ब्लेयर स्थित भारतीय प्राणी सर्वेक्षण भारत के पहले राष्ट्रीय प्रवाल भित्ति अनुसंधान संस्थान का नोडल केंद्र है। इसका उद्देश्य भारतीय जलक्षेत्र में प्रवाल भित्तियों के अनुसंधान और निगरानी को सुदृढ़ करना है। मंत्री ने कहा कि ऐसे विशिष्ट संस्थान नाजुक समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा और साक्ष्य आधारित समुद्री शासन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

नीति, संरक्षण और समुदाय का समन्वय

वैज्ञानिकों और कर्मचारियों से संवाद करते हुए डॉ. सिंह ने सार्वजनिक नीति, संरक्षण योजना और सामुदायिक जागरूकता के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान के अधिक एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत के पर्यावरणीय लक्ष्यों को प्राप्त करने और समुद्री अर्थव्यवस्था की पूरी क्षमता को सतत तरीके से साकार करने के लिए मजबूत और सक्षम वैज्ञानिक संस्थान अनिवार्य हैं।

Book Showcase

Best Selling Books

Ikigai: The Japanese secret to a long and happy life

By Héctor García, Francesc Miralles

₹318

Book 2 Cover

Why I am an Atheist and Other Works

By Bhagat Singh

₹104

Truth without apology

By Acharya Prashant

₹240

Until Love Sets Us Apart

By Aditya Nighhot

₹176

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »