वैश्विक पुनर्बीमा के केंद्र की ओर भारत, बीमा क्षेत्र में ऐतिहासिक विस्तार की दहलीज पर देश

भारत का बीमा और पुनर्बीमा क्षेत्र तेज गति से संरचनात्मक और संस्थागत मजबूती की ओर बढ़ रहा है। इसी क्रम में वित्‍तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने मुंबई में आयोजित आईएफएस–आईआरडीएआई–जीआईएफटी सिटी वैश्विक पुनर्बीमा शिखर सम्मेलन के तीसरे संस्करण को संबोधित करते हुए भारत के बीमा क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर विस्तार से प्रकाश डाला।

वैश्विक पुनर्बीमा के केंद्र की ओर भारत, बीमा क्षेत्र में ऐतिहासिक विस्तार की दहलीज पर देश

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए सचिव ने आईएफएससीए के अंतर्गत विकसित जीआईएफटी सिटी के प्रदर्शन की सराहना की और इसे भारत के वित्तीय सुधारों का एक सशक्त उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारत अपने पुनर्बीमा क्षेत्र में परिवर्तनकारी विकास के मुहाने पर खड़ा है और शिखर सम्मेलन का विषय “आज के भारत को जोड़ना, कल के भारत का बीमा करना, भारत विकास रोडमैप” पूरी तरह से “2047 तक सभी के लिए बीमा” के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है।

नीति, विकास और बीमा का मजबूत संबंध

श्री नागराजू ने इस शिखर सम्मेलन को वित्तीय सेवा क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीमा और पुनर्बीमा न केवल जोखिम प्रबंधन के साधन हैं, बल्कि ये भारत की आर्थिक प्रगति के प्रमुख स्तंभ भी हैं। ऐसे समय में, जब भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को और मजबूत कर रहा है, बीमा क्षेत्र की स्थिरता और विस्तार देश के दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्यों को गति देने में निर्णायक भूमिका निभा रहा है।

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए सचिव ने कहा कि 1.46 अरब से अधिक जनसंख्या वाला भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में सामने आया है। वर्ष 2026 के लिए 6.6 प्रतिशत अनुमानित वृद्धि दर के साथ भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

वैश्विक बीमा परिदृश्य और भारत की स्थिति

श्री नागराजू ने Swiss Re की सिग्मा रिपोर्ट (संख्या 02/2025) का हवाला देते हुए बताया कि 2024 में मजबूत प्रदर्शन के बाद वैश्विक आर्थिक मंदी और नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण वैश्विक बीमा उद्योग में जीवन और गैर जीवन दोनों क्षेत्रों में प्रीमियम वृद्धि की गति धीमी हो रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2024 में नाममात्र प्रीमियम मात्रा के आधार पर वैश्विक स्तर पर दसवां सबसे बड़ा बीमा बाजार रहा, जिसकी बाजार हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत थी। बीमा पैठ 3.7 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसमें जीवन बीमा की हिस्सेदारी 2.7 प्रतिशत और गैर जीवन बीमा की 1 प्रतिशत रही। बीमा घनत्व बढ़कर 97 अमेरिकी डॉलर हो गया, जो यह दर्शाता है कि भारत में बीमा विस्तार की व्यापक अप्रयुक्त संभावनाएं अभी भी मौजूद हैं।

भारतीय बीमा क्षेत्र की आर्थिक भूमिका

सचिव ने कहा कि भारतीय बीमा क्षेत्र वित्तीय प्रणाली का अभिन्न हिस्सा है, जो मृत्यु, संपत्ति और दुर्घटना से जुड़े जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करता है। इसके साथ ही यह बचत को प्रोत्साहित करता है और अवसंरचना तथा अन्य दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिए दीर्घावधि पूंजी उपलब्ध कराता है।

वित्त वर्ष 2024–25 के दौरान बीमा क्षेत्र ने 41.84 करोड़ पॉलिसियां जारी कीं, 11.93 लाख करोड़ रुपये का प्रीमियम एकत्र किया और 8.36 लाख करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया। 31 मार्च 2025 तक बीमा कंपनियों की प्रबंधित संपत्ति 74.44 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसी अवधि में भारत का कुल पुनर्बीमा बाजार 1.12 लाख करोड़ रुपये का रहा, जो इस क्षेत्र के निरंतर विस्तार को दर्शाता है।

सुधार, निवेश और नियामकीय सुदृढ़ता

श्री नागराजू ने बताया कि सरकार और बीमा नियामक ने बीमा क्षेत्र में विकास और सुलभता बढ़ाने के लिए कई नीतिगत और संरचनात्मक सुधार किए हैं। बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है। पिछले वर्ष एक नए पुनर्बीमाकर्ता का पंजीकरण किया गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि “सबका बीमा सबकी रक्षा” यानी बीमा कानूनों में संशोधन अधिनियम, 2025 के अंतर्गत पॉलिसीधारक शिक्षा एवं संरक्षण कोष के गठन का प्रावधान किया गया है। डेटा संरक्षण को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अनुरूप बनाया गया है और आईआरडीएआई की विनियामक शक्तियों को और अधिक सुदृढ़ किया गया है।

वैश्विक पुनर्बीमा केंद्र बनने की दिशा

अपने संबोधन के समापन में डीएफएस सचिव ने भारत को वैश्विक पुनर्बीमा केंद्र के रूप में विकसित करने में आईएफएससीए की भूमिका पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आईएफएससीए अधिनियम, 2019 के अंतर्गत जीआईएफटी सिटी को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है। यह अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र बीमा कार्यालयों को विनियमित करता है, विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं को शाखाएं स्थापित करने की सुविधा देता है और घरेलू तथा विदेशी बाजारों के बीच पुनर्बीमा को सुगम बनाता है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय बीमाकर्ता और पुनर्बीमाकर्ता जीआईएफटी सिटी के माध्यम से वैश्विक अवसरों का लाभ उठाएंगे और सभी हितधारकों के साथ मिलकर “2047 तक सभी के लिए बीमा” के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में प्रभावी योगदान देंगे।

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