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पीडीयूएनएएसएस ने ईपीएफओ अधिकारियों के लिए आईबीसी, 2016 पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया उद्घाटन

नई दिल्ली स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के अधिकारियों के लिए “कानूनी प्रबंधन और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016” विषय पर एक पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम 19 से 23 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता के अंतर्गत उत्पन्न होने वाले जटिल कानूनी मुद्दों और दिवाला संबंधी मामलों के प्रभावी प्रबंधन हेतु कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) अधिकारियों की कानूनी और संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करना है।

पीडीयूएनएएसएस ने ईपीएफओ अधिकारियों के लिए आईबीसी, 2016 पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया उद्घाटन

उद्घाटन सत्र में पीडीयूएनएएसएस के निदेशक श्री कुमार रोहित, भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) के महाप्रबंधक श्री राजेश तिवारी, पीडीयूएनएएसएस के मुख्य शिक्षण अधिकारी श्री रिजवान उद्दीन तथा आरपीएफसी-I एवं पाठ्यक्रम निदेशक श्री संजय कुमार राय ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीडीयूएनएएसएस के निदेशक श्री कुमार रोहित ने कहा कि दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 ने भारत के कानूनी और आर्थिक परिदृश्य में व्यापक और संरचनात्मक परिवर्तन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईपीएफओ जैसे वैधानिक प्राधिकरणों को अधिस्थगन प्रावधानों, भविष्य निधि बकाया की प्राथमिकता, बकाया राशि के निपटान, मूल्यांकन बनाम वसूली जैसे विषयों तथा आईबीसी के अंतर्गत न्याय निर्णयन प्राधिकरणों के समक्ष प्रभावी प्रतिनिधित्व से जुड़ी कई जटिल कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि दिवाला संबंधी न्यायशास्त्र निरंतर विकसित हो रहा है, ऐसे में ईपीएफओ अधिकारियों के लिए कानूनी रूप से अद्यतन रहना, प्रक्रियात्मक अनुशासन बनाए रखना और संस्थागत समन्वय को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। निदेशक ने कहा कि श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा हितों की रक्षा सुनिश्चित करते हुए आईबीसी के वैधानिक प्रावधानों का अनुपालन करना तभी संभव है जब दिवाला मामलों का पेशेवर और प्रभावी ढंग से प्रबंधन किया जाए। इसी दृष्टि से इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को व्यावहारिक और समग्र समझ प्रदान करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है।

श्री कुमार रोहित ने यह भी जानकारी दी कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में आरपीएफसी-I, आरपीएफसी-II और एपीएफसी रैंक के अधिकारी भाग ले रहे हैं, जिनमें अनुभवी क्षेत्रीय अधिकारी और नव नियुक्त प्रत्यक्ष भर्ती अधिकारी दोनों शामिल हैं। उन्होंने कार्यक्रम के लिए विशेषज्ञ संसाधन उपलब्ध कराने में आईबीबीआई के सहयोग की सराहना की।

आईबीबीआई के महाप्रबंधक श्री राजेश तिवारी ने अपने संबोधन में दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता के उद्देश्यों, इसके संस्थागत ढांचे और प्रमुख हितधारकों की भूमिकाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने दिवाला कानून में हाल के विकास और न्यायिक रुझानों की जानकारी साझा करते हुए कहा कि प्रभावी समाधान परिणामों के लिए वैधानिक प्राधिकरणों द्वारा समयबद्ध, समन्वित और तथ्य आधारित कार्रवाई अत्यंत महत्वपूर्ण है।

पीडीयूएनएएसएस के मुख्य शिक्षण अधिकारी श्री रिजवान उद्दीन ने प्रतिभागियों को कार्यक्रम की शैक्षणिक संरचना, प्रशिक्षण मॉड्यूल और अपेक्षित सीखने के उद्देश्यों से अवगत कराया। वहीं आरपीएफसी-I एवं पाठ्यक्रम निदेशक श्री संजय कुमार राय ने पाठ्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को आईबीसी से जुड़े मामलों में निर्णय क्षमता और व्यावहारिक दक्षता विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

श्री संजय कुमार राय ने जानकारी दी कि कार्यक्रम के दौरान आईबीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी, समाधान पेशेवर, ईपीएफओ के स्थायी अधिवक्ता, एनसीएलटी और एनसीएलएटी के पूर्व सदस्य तथा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के शिक्षाविद अपने विशेषज्ञ सत्र लेंगे। इन सत्रों में ईपीएफओ में कानूनी प्रबंधन, आईबीसी से संबंधित मामलों का संचालन, भविष्य निधि बकाया की वसूली की रणनीतियां तथा दिवाला कार्यवाहियों को प्रभावित करने वाले हालिया न्यायिक निर्णयों का विश्लेषण किया जाएगा।

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