केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर भारत दृष्टिकोण और सस्ती, सुलभ तथा प्रौद्योगिकी आधारित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत कार्यरत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने ओडिशा स्थित बायोटेक स्टार्टअप Prantae Solutions Private Limited के साथ एक महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता स्वदेशी प्वाइंट ऑफ केयर रीनल डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म ‘प्रोफ्लो यू’ के व्यावसायीकरण से संबंधित है, जिसका उद्देश्य प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर किडनी रोगों और गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं का शीघ्र और सटीक निदान सुनिश्चित करना है।

परियोजना का शीर्षक ‘प्रोफ्लो यू फॉर प्वाइंट ऑफ केयर किडनी हेल्थ असेसमेंट’ है। इसके तहत ओडिशा में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और इस तकनीक को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, डायग्नोस्टिक नेटवर्क तथा प्रसवपूर्व देखभाल प्रणालियों तक पहुंचाने की योजना है।
किडनी रोग: एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती
भारत में क्रॉनिक किडनी डिजीज एक तेजी से उभरती स्वास्थ्य समस्या है। अनुमान है कि प्रतिवर्ष दो लाख से अधिक मरीज अंतिम चरण के किडनी रोग की श्रेणी में पहुंच जाते हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप और वृद्धावस्था इसके प्रमुख जोखिम कारक हैं। ऐसे मामलों में मूत्र में एल्ब्यूमिन, क्रिएटिनिन और मूत्र एल्ब्यूमिन क्रिएटिनिन अनुपात जैसे बायोमार्करों की नियमित जांच से रोग की प्रारंभिक अवस्था में पहचान संभव है।
इसी प्रकार, गर्भावस्था के दौरान प्रीक्लेम्पसिया जैसी गंभीर स्थिति में भी मूत्र में प्रोटीन की मात्रा और अन्य संकेतकों की निगरानी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह स्थिति 20 सप्ताह के बाद उच्च रक्तचाप और किडनी या लिवर को क्षति पहुंचा सकती है। प्रसवपूर्व देखभाल के लिए आवश्यक कई परीक्षणों को Indian Council of Medical Research की आवश्यक निदान सूची में भी शामिल किया गया है।
हालांकि वर्तमान में उपलब्ध सर्वोत्तम इम्यूनोटर्बिडोमेट्रिक तकनीकें प्रयोगशाला आधारित हैं और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक उनकी पहुंच सीमित है। वहीं पारंपरिक डिपस्टिक विधियों में प्रारंभिक स्तर की संवेदनशीलता अपेक्षाकृत कम रहती है, जिससे शुरुआती चरण में रोग की पहचान चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
प्रोफ्लो यू: स्वदेशी नवाचार की विशेषताएं
प्रांटे सॉल्यूशंस द्वारा विकसित ‘प्रोफ्लो यू’ एक पेटेंटकृत, स्वदेशी प्वाइंट ऑफ केयर डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म है, जिसे प्रयोगशाला स्तर की सटीकता और फील्ड स्तर की सरलता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
इस प्लेटफॉर्म की प्रमुख विशेषताएं निम्न हैं:
मूत्र एल्ब्यूमिन मापन किट
यह नैनो सेंसर आधारित इन विट्रो डायग्नोस्टिक उपकरण है, जिसे तीन भारतीय पेटेंट और एक अंतरराष्ट्रीय पीसीटी आवेदन के आधार पर विकसित किया गया है। यह 20 से 1200 मिलीग्राम प्रति लीटर की व्यापक जांच सीमा प्रदान करता है तथा परिवेशी तापमान पर स्थिर रहता है।
मूत्र क्रिएटिनिन मापन किट
कमरे के तापमान पर स्थिर यह उपकरण 150 से 4000 मिलीग्राम प्रति लीटर की जांच सीमा प्रदान करता है, जिससे विभिन्न जोखिम श्रेणियों में सटीक मापन संभव होता है।
पोर्टेबल मूत्र विश्लेषक
यह स्वदेशी तौर पर विकसित हल्का और रिचार्जेबल विश्लेषक है, जिसमें अवशोषण और प्रतिदीप्ति आधारित तकनीक का उपयोग किया गया है। यह ब्लूटूथ और इंटरनेट ऑफ थिंग्स सक्षम है तथा प्रोफ्लो यू मोबाइल एप्लिकेशन के साथ एकीकृत है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग आधारित विश्लेषण तथा अंशांकन मुक्त कार्यक्षमता उपलब्ध है, जिससे उपयोगकर्ता को त्वरित और विश्वसनीय परिणाम प्राप्त होते हैं।
उत्पाद का सत्यापन उच्च स्तरीय नैदानिक विधियों के आधार पर किया गया है। इसे इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह प्रयोगशाला स्तर की सटीकता को बनाए रखते हुए रोगी के पास ही त्वरित परीक्षण की सुविधा प्रदान कर सके। इससे नमूना बाहर भेजने की आवश्यकता कम होती है और उपचार संबंधी निर्णय शीघ्र लिए जा सकते हैं।
विनिर्माण और व्यावसायीकरण की दिशा में कदम
परियोजना के तहत ओडिशा में विनिर्माण और व्यावसायीकरण सुविधा स्थापित की जाएगी। इसका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना और इस तकनीक को देशभर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सरकारी अस्पतालों, निजी डायग्नोस्टिक नेटवर्क तथा प्रसवपूर्व देखभाल इकाइयों तक पहुंचाना है। इससे ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।
इस अवसर पर प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि प्रांटे सॉल्यूशंस को प्रदान की गई सहायता स्वदेशी निदान क्षमताओं को सुदृढ़ करने और अंतिम छोर तक किफायती स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उनके अनुसार, प्रोफ्लो यू जैसे प्वाइंट ऑफ केयर नवाचार शीघ्र निदान और समय पर हस्तक्षेप के माध्यम से रोग भार को कम कर सकते हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार और स्वास्थ्य व्यय में कमी संभव है।
प्रांटे सॉल्यूशंस के संस्थापकों ने बोर्ड के समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग उनके ट्रांसलेशनल बायोटेक्नोलॉजी अनुसंधान को मान्यता देता है। उनके अनुसार, इस सहायता से उत्पादन, तैनाती और देशव्यापी विस्तार में तेजी आएगी तथा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप विश्वसनीय, सुलभ और प्रौद्योगिकी आधारित स्वास्थ्य समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
व्यापक प्रभाव की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार की प्वाइंट ऑफ केयर तकनीकें व्यापक स्तर पर लागू होती हैं, तो किडनी रोगों और गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं का प्रारंभिक चरण में पता लगाना संभव होगा। इससे न केवल रोगियों की जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि डायलिसिस और उन्नत उपचार पर होने वाले व्यय में भी कमी आ सकती है।