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भारतीय नौसेना ने पहली बार संभाली संयुक्त कार्य बल 154 की कमान, समुद्री सुरक्षा में बढ़ी भारत की वैश्विक भूमिका

हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे सहयोगात्मक समुद्री सुरक्षा तथा क्षमता निर्माण के प्रति भारत की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए Indian Navy ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए Combined Maritime Forces के अंतर्गत बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्य बल Combined Task Force 154 की कमान पहली बार संभाल ली है। यह घटनाक्रम वैश्विक समुद्री सहयोग में भारत की सशक्त उपस्थिति और एक विश्वसनीय सुरक्षा भागीदार के रूप में उसकी प्रतिष्ठा को रेखांकित करता है।

कमान परिवर्तन समारोह 11 फरवरी 2026 को बहरीन की राजधानी Manama में स्थित सीएमएफ मुख्यालय में आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता Kurt A. Renshaw, कमांडर, यूएस नेवसेंट और United States Fifth Fleet ने की। इस अवसर पर भारतीय नौसेना के उप नौसेना प्रमुख वाइस एडमिरल तरुण सोबती सहित सदस्य देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।

भारतीय नौसेना के शौर्य चक्र से सम्मानित कमोडोर Milind M. Mokashi ने इतालवी नौसेना के निवर्तमान कमांडर से औपचारिक रूप से सीटीएफ 154 के कमांडर का पदभार ग्रहण किया। यह जिम्मेदारी भारत के पेशेवर कौशल, परिचालन अनुभव और बहुपक्षीय सैन्य सहयोग में सक्रिय भूमिका का संकेत मानी जा रही है।

बहुराष्ट्रीय प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर केंद्रित कार्यबल

सीटीएफ 154 विशेष रूप से सदस्य देशों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए समर्पित है। यह कार्यबल 47 देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत बनाने का मंच प्रदान करता है। भारत द्वारा इसकी कमान संभालना इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भारतीय नौसेना की विशेषज्ञता पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

मई 2023 में स्थापित यह कार्यबल मध्य पूर्व और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बनाया गया था। समय के साथ इसने बहुराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा दी है और सदस्य देशों की परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रशिक्षण के पांच प्रमुख स्तंभ

सीटीएफ 154 की प्रशिक्षण संरचना पांच प्रमुख क्षेत्रों पर आधारित है। इनमें समुद्री क्षेत्र जागरूकता, समुद्र से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानून, समुद्री अवरोधन अभियान, खोज और बचाव संचालन तथा नेतृत्व विकास शामिल हैं। इन स्तंभों का उद्देश्य न केवल सैन्य दक्षता बढ़ाना है, बल्कि सदस्य देशों के बीच समन्वय और रणनीतिक समझ को भी मजबूत करना है।

कार्यबल नियमित रूप से समुद्री सुरक्षा संवर्धन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। इसके अतिरिक्त कम्पास रोज और उत्तरी तथा दक्षिणी तत्परता जैसे अभ्यासों के माध्यम से वास्तविक परिस्थितियों में प्रतिक्रिया क्षमता को परखा जाता है। संपर्क कार्यक्रमों के जरिए सहयोगी देशों को अवैध तस्करी, समुद्री डकैती और अनियमित प्रवासन जैसे साझा खतरों से निपटने के लिए तैयार किया जाता है।

अन्य टास्क फोर्स के साथ समन्वित संचालन

सीटीएफ 154, सीएमएफ के अन्य टास्क फोर्स के साथ समन्वय बनाकर व्यापक समुद्री सुरक्षा ढांचे को मजबूत करता है। इनमें Combined Task Force 150 समुद्री सुरक्षा, Combined Task Force 151 समुद्री डकैती विरोधी अभियान, Combined Task Force 152 अरब की खाड़ी में सुरक्षा और Combined Task Force 153 लाल सागर क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़े संचालन को अंजाम देते हैं। इस प्रकार बहुपक्षीय सहयोग के माध्यम से एक व्यापक और प्रभावी सुरक्षा नेटवर्क तैयार किया गया है।

भारत की बढ़ती सामरिक भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि सीटीएफ 154 की कमान भारत को मिलना केवल एक सैन्य जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक उपलब्धि भी है। यह दर्शाता है कि भारत अब क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की स्थिति में पहुंच चुका है।

हिंद महासागर क्षेत्र वैश्विक व्यापार मार्गों का महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां ऊर्जा आपूर्ति और वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही निरंतर बनी रहती है। ऐसे में समुद्री मार्गों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। भारतीय नौसेना की सक्रिय भागीदारी इस दिशा में स्थिरता और विश्वास को बढ़ाने में सहायक मानी जा रही है।

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