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अल्लाह के फ़ज़्ल से मेरा पहला रोज़ा मुकम्मल

अल्लाह के फ़ज़्ल व करम से मेरा पहला रोज़ा मुकम्मल हुआ। मेरा नाम मायेशा हसन है मेरी उम्र 9 साल है और मैं कक्षा 6 में अल बरकात स्कूल में पढ़ती हूँ। इस साल रमज़ान में मैंने पहली बार पूरा रोज़ा रखा। दिन की शुरुआत सहरी से हुई और मैंने पूरे उत्साह के साथ रोज़ा रखने का इरादा किया। दिन में थोड़ी प्यास जरूर लगी और कभी-कभी कमजोरी भी महसूस हुई, लेकिन अल्लाह की मोहब्बत और रमज़ान की बरकत ने मुझे हिम्मत दी।

मैंने नमाज़ पढ़ी, कुरआन शरीफ़ की तिलावत की और दुआ की कि अल्लाह मेरा पहला रोज़ा कबूल फरमाए। जब इफ्तार का वक्त आया तो दिल में एक अलग ही सुकून और खुशी थी। मुझे लगा कि मैंने अपने जीवन का एक खास मुकाम हासिल कर लिया है।

मैं अल्लाह पाक का तहे दिल से शुक्रिया अदा करती हूँ कि उन्होंने मुझे यह तौफ़ीक़ दी। साथ ही मैं अपने मम्मी-पापा, पिता जी हसन तैमूरी, माता जी रूबी और बड़े पापा अहसान रब का भी धन्यवाद करती हूँ, जिनकी हौसला-अफ़ज़ाई से मुझे प्रेरणा मिली। अल्लाह से दुआ है कि अगले साल रमज़ान में मैं सभी रोज़े पूरे कर सकूँ।

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