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कर्मचारी संगठनों से संवाद के जरिए प्रशासनिक दक्षता और करियर प्रगति पर जोर: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली: केंद्र सरकार में कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व संभाल रहे केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकारी कर्मचारियों के प्रतिनिधि संगठनों के साथ संवाद को प्रशासनिक सुधारों की आधारशिला बताते हुए कहा है कि नियमित और व्यवस्थित बातचीत से न केवल सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान संभव है, बल्कि इससे प्रशासनिक दक्षता और कर्मचारियों के करियर विकास को भी नई दिशा मिलती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज ‘सरकारी कर्मचारी राष्ट्रीय परिसंघ’ और ‘केंद्रीय सचिवालय समूह-सी कर्मचारी संघ’ सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सर्वे ऑफ इंडिया, इसरो, इंडिया पोस्ट और अन्य संबद्ध संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान कैडर पुनर्गठन, पदोन्नति, वेतन समानता, भत्तों और सेवा शर्तों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार की प्राथमिकता एक ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित हो। इसके लिए कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ सतत संवाद आवश्यक है, ताकि जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं को समय रहते समझा और हल किया जा सके। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि सभी विभागों में एक समान और सुव्यवस्थित नीति लागू करने से कर्मचारियों के बीच विश्वास और संतुलन बना रहेगा।

बैठक में शामिल कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किए जा रहे प्रशासनिक सुधारों की सराहना की। उन्होंने बताया कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के सक्रिय दृष्टिकोण के चलते हाल के वर्षों में 10,000 से अधिक कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिला है। इससे लंबे समय से लंबित मामलों का समाधान हुआ है और कई विभागों में करियर उन्नति के रास्ते खुले हैं।

प्रतिनिधिमंडलों ने यह भी उल्लेख किया कि पदोन्नति प्रक्रियाओं में आई तेजी और पारदर्शिता ने कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाया है। साथ ही, उन्होंने कुछ व्यावहारिक चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया, जिनमें विभिन्न विभागों में कार्यान्वयन की समयसीमा और नीतियों में एकरूपता का अभाव प्रमुख रहा। विशेष रूप से सर्वे ऑफ इंडिया और इसरो जैसे संगठनों में कैडर पुनर्गठन और वेतन असमानता से जुड़े मुद्दों को उठाया गया।

इन मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने आश्वासन दिया कि सभी चिंताओं की गंभीरता से समीक्षा की जाएगी और संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की बाधा को दूर करने के लिए आवश्यक सुधार जारी रहेंगे।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक सुधार एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें फीडबैक और संवाद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि समयबद्ध अनुवर्ती कार्रवाई से ही वास्तविक परिवर्तन संभव है।

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