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श्रीनगर खेल संकल्प: भारत के खेल भविष्य के लिए एकीकृत, खिलाड़ी-केंद्रित दृष्टि का खाका

केंद्र सरकार ने देश में खेलों के समग्र विकास को नई दिशा देने की पहल करते हुए ‘श्रीनगर खेल संकल्प’ दस्तावेज़ जारी किया है। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री Mansukh Mandaviya ने तीन दिवसीय चिंतन शिविर के अंतिम दिन इस संकल्प को राज्यों के खेल मंत्रियों और प्रमुख खेल हस्तियों की उपस्थिति में सार्वजनिक किया।

यह दस्तावेज़ सहकारी संघवाद की भावना के तहत केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच समन्वय को मजबूत करते हुए खेल संस्कृति को व्यापक आधार देने का रोडमैप प्रस्तुत करता है। इसमें खिलाड़ी-केंद्रित विकास मॉडल को प्राथमिकता देते हुए खेल अवसंरचना के विस्तार, प्रतिभा की प्रारंभिक पहचान, क्षेत्रीय खेल समूहों के निर्माण और समावेशी खेल पारिस्थितिकी तंत्र पर बल दिया गया है।

संकल्प में खेलों को केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित न रखकर उन्हें राष्ट्र निर्माण, सामाजिक एकता और जनस्वास्थ्य से जोड़ने की स्पष्ट नीति परिलक्षित होती है। इसमें युवाओं के सशक्तिकरण, रोजगार सृजन, पर्यटन संवर्धन और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने में खेलों की भूमिका को प्रमुखता दी गई है। साथ ही, भारत की वैश्विक खेल आयोजनों—जैसे ओलंपिक और विश्व कप—की मेज़बानी करने की महत्वाकांक्षा को भी रेखांकित किया गया है।

दस्तावेज़ राज्यों की विविध भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को एक शक्ति के रूप में उपयोग करने पर जोर देता है। राज्यों को अपनी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप खेल अवसंरचना विकसित करने, प्रतिभाओं को पहचानने और क्षेत्र-विशिष्ट खेल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

चिंतन शिविर के समापन दिवस की शुरुआत ‘फिट इंडिया’ अभियान के अंतर्गत आयोजित “संडे ऑन साइकिल” साइक्लोथॉन से हुई, जिसका नेतृत्व केंद्रीय मंत्री Mansukh Mandaviya और राज्य मंत्री Raksha Khadse ने किया। इस पहल के माध्यम से फिटनेस, अनुशासन और जनभागीदारी के संदेश को व्यापक स्तर पर प्रसारित किया गया।

इसके बाद आयोजित तकनीकी सत्रों में खेल प्रशासन के आधुनिकीकरण, खेल सामग्री निर्माण क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण और ‘माय भारत’ के माध्यम से युवाओं की सहभागिता बढ़ाने पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने पारदर्शिता, जवाबदेही और संस्थागत समन्वय को मजबूत करने के साथ-साथ खेल प्रशासन को पेशेवर स्वरूप देने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, भारत को खेल सामग्री निर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए क्लस्टर-आधारित विकास, नवाचार और घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन देने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

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