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सावधान: प्लेसमेंट सर्विस या ठगी का नया व्यापार? प्लेसमेंट सेवाओं का मायाजाल

आज के दौर में बेरोजगारी एक ऐसी समस्या है जो इंसान को मानसिक रूप से तोड़ देती है। जब व्यक्ति को कहीं नौकरी की राह नहीं सूझती, तो वह तिनके का सहारा ढूंढने की कोशिश करता है। इसी मजबूरी और जरूरत का फायदा उठाने के लिए आज “प्लेसमेंट सर्विसेज” ने एक बड़े और संगठित व्यापार का रूप ले लिया है।

आजकल हर गली-नुक्कड़ पर प्लेसमेंट सर्विस की दुकानें खुल गई हैं। ये केंद्र अक्सर मध्यम वर्गीय परिवारों के युवाओं को अपना निशाना बनाते हैं। विडंबना देखिए कि इन धंधों को चलाने वाले रईस लोग अपने बच्चों को कभी इन रास्तों पर नहीं भेजते, लेकिन दूसरों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने में उन्हें जरा भी झिझक नहीं होती।

लालच का वह ‘फलों से लदा पेड़’

कहते हैं कि “अंधे को क्या चाहिए? दो आंखें।” ठीक उसी तरह एक बेरोजगार को सिर्फ एक अदद नौकरी की तलाश होती है। प्लेसमेंट कंपनियां बेरोजगारों की इसी भूख को पहचानती हैं। वे उनके सामने नौकरी के अवसरों से लदा हुआ एक ऐसा ‘फलों का पेड़’ खड़ा कर देती हैं, जिसे देखकर कोई भी व्यक्ति लोभ में पड़ जाए। उनकी चिकनी-चुपड़ी बातें ऐसी होती हैं कि अच्छे-भले समझदार इंसान भी उनके झांसे में आ जाते हैं।

यह फोटो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा निर्मित है

फंसाने का अनोखा और मनोवैज्ञानिक तरीका

इन कंपनियों के जाल बिछाने का तरीका बेहद शातिर और चरणबद्ध होता है:

  • फ्रिज्यूमे अपलोड का चारा: शुरुआत होती है “फ्री रिज्यूमे अपलोड करें और नौकरी पाएं” के विज्ञापन से। जैसे ही कोई व्यक्ति अपना बायोडाटा अपलोड करता है, वह उनकी रडार पर आ जाता है।
  • झूठी प्रशंसा का जाल: रिज्यूमे अपलोड होते ही आपके पास कॉल आता है। वे आपके अनुभव और काबिलियत की इतनी तारीफ करेंगे कि आपको लगेगा कि आप ही उस पद के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ हैं। असल में यह प्रशंसा सिर्फ एक झांसा होती है ताकि आप उन पर भरोसा कर सकें।
  • जरूरत का विश्लेषण: ये कंपनियां आपके रिज्यूमे का गहराई से विश्लेषण करती हैं ताकि आपकी कमजोरी पकड़ी जा सके। वे देखते हैं कि आप कहाँ रहते हैं, आपकी पिछली सैलरी क्या थी और आप कितने ‘जरूरतमंद’ हैं।
  • भावनाओं से खिलवाड़: अगर आप दूर नौकरी कर रहे हैं, तो वे कहेंगे— “अरे! आप इतनी दूर जाते हैं? सारा पैसा तो आने-जाने में ही खत्म हो जाता होगा। हम आपको आपके घर के पास जॉब दिलाएंगे।” अगर आपकी सैलरी कम है, तो वे कहेंगे— “आपकी काबिलियत के हिसाब से आपका अप्रेजल सही नहीं हुआ है। हम आपको आपकी मनचाही सैलरी दिलवाएंगे।”

‘मेंबरशिप’ के नाम पर वसूली

जब वे आपको पूरी तरह अपनी बातों के जाल में फंसा लेते हैं, तब असली खेल शुरू होता है। वे कहते हैं कि आपकी प्रोफाइल तो अच्छी है, बस इसमें कुछ ‘प्रोफेशनल कमियां’ हैं जिन्हें हमारे एक्सपर्ट्स ठीक करेंगे। इसके नाम पर वे आपसे ‘रजिस्ट्रेशन फीस’, ‘रिज्यूमे राइटिंग चार्जेस’ या ‘प्रीमियम मेंबरशिप’ के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं।

“हम दूसरों जैसे नहीं हैं”

सबसे मजेदार बात तब होती है जब कोई ग्राहक उन पर शक करता है। उनके पास इसका भी रटा-रटाया जवाब होता है— “सर, बाजार में बहुत से लोग फ्रॉड कर रहे हैं, लेकिन हम उनसे अलग हैं। हमारा काम जेन्युइन है।” यह वाक्य उनके आत्मविश्वास को दिखाने का एक और तरीका होता है ताकि ग्राहक बिना डरे पैसे दे दे।

एक सबक

साल 2016 में पवन (बदला हुया नाम ) और उसके दोस्त सुनहरे भविष्य के सपने लेकर दिल्ली आए थे। उन्हें उत्तम नगर, द्वारका और गुरुग्राम जैसे इलाकों में इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। जालसाजों ने इस तरह का माहौल बनाया कि युवाओं को सब कुछ सच लगा। यहाँ तक कि फर्जी ‘सरकारी कंपनी’ का ऑफर लेटर भी मेल कर दिया गया। भरोसे की आड़ में पवन से 30,000 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक ऐंठ लिए गए। आज भी वह न्याय के लिए अदालतों के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसका कीमती समय और पैसा बर्बाद हो चुका है।

सिस्टम और जवाबदेही पर बड़े सवाल

जैसा कि आपने सही पूछा है, आखिर इन लोगों को रजिस्ट्रेशन की अनुमति कौन देता है? क्या प्रशासन को इनसे निम्नलिखित सवाल नहीं पूछने चाहिए:

  • अनुभव का प्रमाण: इन्होंने अब तक कितने लोगों को वास्तव में नौकरी दिलवाई है?
  • विशेषज्ञता: क्या ये उस क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं जिसकी नौकरियां ये बांट रहे हैं?
  • पारदर्शिता: क्या इनके पास कोई ट्रैक रिकॉर्ड या ऑडिट रिपोर्ट है?

ये सेल्समैन की तरह अपने ‘प्रोडक्ट’ (नौकरी) को ऐसे पेश करते हैं जैसे 10 दिन में ही आपकी जिंदगी बदल देंगे। लेकिन हकीकत में यह केवल एक ‘प्लेसमेंट बिजनेस’ है, ‘सर्विस’ नहीं।

सुधार के लिए आवश्यक कदम

  • सख्त नियम: प्लेसमेंट एजेंसियों के लिए पंजीकरण के नियम बेहद कड़े होने चाहिए।
  • रिफंड पॉलिसी: यदि कोई एजेंसी नौकरी दिलवाने में असमर्थ रहती है, तो एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा पैसा (ब्याज सहित) वापस करने का कानूनी नियम होना चाहिए।
  • कठोर दंड: पवन जैसे मामलों में त्वरित न्याय होना चाहिए ताकि दोषियों पर भारी जुर्माना और सजा का प्रावधान हो।

अतत: किसी भी प्लेसमेंट एजेंसी को पैसा देने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल करें। नौकरी पाने की चाहत में अपनी मेहनत की कमाई इन ठगों को न दें। याद रखें, जो आपको घर बैठे रातों-रात आपकी उम्मीद से दोगुनी सैलरी का सपना दिखाए, समझ लीजिए कि दाल में कुछ काला है। इसलिए सतर्क रहें, जागरूक बनें। आपके संघर्ष और मेहनत की कमाई इन ठगों के लिए नहीं है।

विनीता झा
विनीता झा
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