NEW English Version

“भारत में महिला और पुरुष 2025: चयनित संकेतक और आंकड़े” का विमोचन

केंद्र सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित “विकास के लिए डेटा” विषयक राष्ट्रीय विचार-विमर्श शिखर सम्मेलन के दौरान अपने महत्वपूर्ण प्रकाशन “भारत में महिला और पुरुष 2025: चयनित संकेतक और डेटा” के 27वें संस्करण का विमोचन किया। यह प्रकाशन देश में लैंगिक समानता, सामाजिक-आर्थिक भागीदारी और विकास की प्रवृत्तियों का एक व्यापक और प्रमाण-आधारित विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

यह रिपोर्ट न केवल आंकड़ों का संकलन है, बल्कि नीति निर्माण, शोध और विकास रणनीतियों के लिए एक सुदृढ़ आधार भी प्रदान करती है। इसमें जनसंख्या, शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक भागीदारी, निर्णय लेने की क्षमता, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा सहित अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में महिला और पुरुषों की स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संगठनों से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर तैयार यह दस्तावेज भारत में लैंगिक परिदृश्य को समझने का एक महत्वपूर्ण साधन बनकर उभरा है।

व्यापक डेटा संरचना और विश्लेषण

प्रकाशन में 50 प्रमुख संकेतकों का मेटाडेटा शामिल किया गया है, जिससे पाठकों को आंकड़ों के पीछे की अवधारणाओं, परिभाषाओं, स्रोतों और कार्यप्रणाली को समझने में सहायता मिलती है। यह पहल डेटा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूत करती है। रिपोर्ट में ग्रामीण-शहरी विभाजन, राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के आधार पर वर्गीकृत आंकड़े और समय के साथ उनके रुझानों का भी समावेश किया गया है, जिससे क्षेत्रीय और संरचनात्मक असमानताओं का गहन विश्लेषण संभव हो पाता है।

प्रमुख निष्कर्ष और रुझान

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में जन्म के समय लिंग अनुपात में सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2017-19 के दौरान जहां यह आंकड़ा 904 था, वहीं 2021-23 में यह बढ़कर 917 हो गया है। यह परिवर्तन महिलाओं के जीवित रहने की बेहतर संभावनाओं और सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव का संकेत देता है।

शिशु मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। 2008 से 2023 के बीच लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए मृत्यु दर में निरंतर कमी आई है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर उपलब्धता और जागरूकता में वृद्धि का परिणाम है।

शिक्षा के क्षेत्र में, प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक लैंगिक समानता हासिल कर ली गई है। यह उपलब्धि शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों से चल रहे सरकारी प्रयासों और योजनाओं की सफलता को दर्शाती है। उच्च शिक्षा में भी महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। 2021-22 में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात 28.5 था, जो 2022-23 में बढ़कर 30.2 हो गया। इसी अवधि में पुरुषों का अनुपात 28.3 से बढ़कर 28.9 हुआ।

आर्थिक भागीदारी के संदर्भ में, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) में वृद्धि देखी गई है। विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के लिए यह वृद्धि उल्लेखनीय रही है, जो 2022 में 37.5 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 45.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह परिवर्तन ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।

प्रबंधकीय पदों पर महिलाओं की उपस्थिति में भी महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। 2017 से 2025 के बीच जहां पुरुषों की संख्या में 73.80 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं महिलाओं की संख्या में 102.54 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि नेतृत्व और निर्णय लेने की भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी लगातार सशक्त हो रही है।

नीति निर्माण के लिए उपयोगिता

यह प्रकाशन नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में कार्य करता है। इसमें प्रस्तुत विश्लेषण और रुझान सरकार को लैंगिक संवेदनशील नीतियों और कार्यक्रमों के निर्माण में सहायता प्रदान करते हैं। साथ ही, यह दस्तावेज समावेशी और सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में रणनीतिक निर्णय लेने के लिए आवश्यक साक्ष्य भी उपलब्ध कराता है।

Source: PIB

Book Showcase

Best Selling Books

Shri Durgasaptashati Sachitra

By Gorakhpur Gita Press

₹100

Book 2 Cover

Stop Letting Everything Affect You

By Daniel Chidiac

₹190

Truth without apology

By Acharya Prashant

₹240

30 Days to Better English

By Norman Lewis

₹199

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »