सुबह सबेरे तन और मन को
जो दे नवजीवन का वरदान।
श्वासों की गति को समझाए
योग है वह अद्भुत विज्ञान।
यम और नियम के पालन से
होता है यह जीवन पावन।
प्राणायाम और आसन से
होता है विकारों का शमन।
आसन हैं जब सधने लगते
काया कंचन बन जाती है।
प्राणायाम की हर इक लय से
भीतर ऊर्जा भर जाती है।
इंद्रियां जब वश में हो जाएं
बहें शांति के झरने मन में।
तनाव,चिंता नष्ट हो जाए
ध्यान के मधुरिम मधुवन में।
व्यायाम नहीं है केवल यह
जीवन की जीवंत साधना है।
आओ मिलकर योग अपनाएं ये
स्वस्थ विश्व की परिकल्पना है !!


