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 ‘‘श्रमिक राष्ट्र के विश्वकर्मा हैं’’: डॉ. मनसुख मांडविया ने राष्ट्र-निर्माण में श्रमिकों की अहम भूमिका पर जोर दिया


डॉ. मनसुख मांडविया ने डोड्डाबल्लापुर में 100 बिस्तर वाले ईएसआईसी अस्पताल का उद्घाटन किया; कर्नाटक के बेल्लारी में 100 बिस्तर वाले ईएसआईसी अस्पताल की वर्चुअल आधारशिला रखी

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार एवं युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज डोड्डाबल्लापुर, कर्नाटक में नवनिर्मित 100 बिस्तर वाले कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) अस्पताल का उद्घाटन किया और डोड्डाबल्लापुर से ही दूरस्थ माध्यम से बेल्लारी, कर्नाटक में 100 बिस्तर वाले ईएसआईसी अस्पताल की आधारशिला रखी। इस अवसर पर श्रम एवं रोजगार मंत्रालय एवं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे और लोकसभा सांसद श्री के. सुधाकर भी उपस्थित थे।

केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा, “श्रमिक ही राष्ट्र के सच्चे निर्माता और हमारे विश्वकर्मा हैं। उनके कल्याण के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना हमारा दायित्व है।” उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में श्रमिकों की गरिमा और सशक्तिकरण शासन और राष्ट्रीय विकास का केंद्रबिंदु है।

डॉ. मांडविया ने पिछले दशक में सामाजिक सुरक्षा बीमा (ईएसआईसी) के दायरे में हुई महत्वपूर्ण वृद्धि पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत बीमित व्यक्तियों की संख्या लगभग 2 करोड़ से बढ़कर 4 करोड़ हो गई है। उन्होंने आगे कहा, “देश में 4 करोड़ से अधिक श्रमिक अब विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के अंतर्गत आते हैं, जो 2015 में 19 प्रतिशत कवरेज से बढ़कर आज 64 प्रतिशत से अधिक हो जाने को दर्शाता है, जैसा कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने भी बताया है।”

श्रम सुधारों पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चारों श्रम संहिताओं के लागू होने से पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशिता सुनिश्चित होती है। उन्होंने बताया कि नियुक्ति पत्र अनिवार्य कर दिए गए हैं, पुरुषों और महिलाओं के लिए समान वेतन सुनिश्चित किया गया है और जोखिम भरे व्यवसायों में काम करने वाले श्रमिकों को अब ईएसआईसी कवरेज की गारंटी दी गई है। डॉ. मांडविया ने यह भी कहा कि श्रमिकों के परिवारों को चिकित्सा शिक्षा सुलभ बनाने के लिए ईएसआईसी के तहत 20 मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं। बीमित व्यक्तियों के बच्चों के लिए 40-50 प्रतिशत सीटें आरक्षित होने से ये संस्थान श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए नए मार्ग और अवसर खोल रहे हैं।

निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर जोर देते हुए, मंत्री ने घोषणा की कि नए श्रम ढांचे के अंतर्गत, 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए बीमारियों का प्रारंभिक चरण में पता लगाने के लिए अनिवार्य स्वास्थ्य जांच कराना अनिवार्य होगा। डॉ. मांडविया ने घोषणा की कि इस पहल के तहत, श्रमिकों के लिए एक राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य जांच अभियान 7 मई से देश भर के ईएसआईसी अस्पतालों में शुरू किया जाएगा जिससे व्यापक स्तर पर कवरेज सुनिश्चित किया जा सके।

नवउद्घाटित अस्पताल के क्षेत्रीय प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए मंत्री जी ने बताया कि इस क्षेत्र में कई कपड़ा उद्योग हैं जिनमें 15 लाख से अधिक पंजीकृत श्रमिक कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि उनके परिवारों सहित लगभग 55 लाख लोग ईएसआईसी की स्वास्थ्य सुविधाओं से लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि ये अस्पताल श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए वरदान साबित होंगे, क्योंकि ये बीमाकृत व्यक्तियों और उनके आश्रितों को पूरी तरह से मुफ्त चिकित्सा सेवाएं प्रदान करेंगे।

सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मंत्री ने कहा कि श्रमिकों का कल्याण एक प्रमुख प्राथमिकता बनी हुई है, और भारत के कार्यबल के लिए सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि इस अस्पताल की स्थापना कर्नाटक के लिए गौरव का क्षण है और श्रमिक कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। डोड्डाबल्लापुरा स्थित यह सुविधा ओपीडी, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, आपातकालीन देखभाल, स्त्री रोग, बाल रोग, अस्थि रोग, नेत्र रोग, दंत चिकित्सा, फार्मेसी और निदान सहित व्यापक चिकित्सा सेवाएं प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि इस अस्पताल से बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्र के 15 लाख बीमित व्यक्तियों और 55 लाख लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।

उन्होंने कहा कि यह उद्घाटन भारत सरकार और ईएसआईसी के इस अटूट संकल्प को दर्शाता है कि प्रत्येक श्रमिक और उसके परिवार को वह सामाजिक सुरक्षा और चिकित्सा देखभाल मिले जिसके वे हकदार हैं, और यह एक स्वस्थ, संरक्षित और उत्पादक कार्यबल के लिए सरकार के दृष्टिकोण को मजबूत करता है, जिसका उद्देश्य विकसित भारत है।

एक विशेष भाव के रूप में, डॉ. मांडविया ने अस्पताल के विकास में योगदान देने वाले निर्माण श्रमिकों को भी सम्मानित किया और कार्यक्रम के दौरान ईएसआई लाभार्थियों को लाभ वितरित किए।

कर्नाटक के बेंगलुरु ग्रामीण क्षेत्र के डोड्डाबल्लापुर में स्थित ईएसआईसी अस्पताल 100 बिस्तर वाला एक बहु-विशेषज्ञता माध्यमिक चिकित्सा अस्पताल है, जो 5 एकड़ भूमि पर 101.14 करोड़ रुपये की लागत से बना है। इसमें 32 स्टाफ क्वार्टर शामिल हैं और यह सामान्य चिकित्सा, सर्जरी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, बाल रोग, अस्थि रोग, आपातकालीन देखभाल और रेडियोलॉजी, प्रयोगशाला और रक्त बैंक सहित व्यापक निदान सुविधाएं जैसी प्रमुख सेवाएं प्रदान करता है। बेल्लारी में प्रस्तावित ईएसआईसी अस्पताल 5.21 एकड़ भूमि पर 150 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया जाएगा और ईएसआई योजना के तहत बीमित व्यक्तियों और उनके परिवारों को आधुनिक, अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेगा।

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