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एनएचआरसी का 4-सप्ताहीय ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप कार्यक्रम 2026 शुरू, देशभर से चयनित 100 विद्यार्थी लेंगे भाग

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), भारत के मुख्यालय में सोमवार को चार-सप्ताहीय प्रतिष्ठित ‘ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप कार्यक्रम (एसआईपी) 2026’ का शुभारंभ हुआ। स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं के बीच मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करना है। इस वर्ष कार्यक्रम के लिए विभिन्न शैक्षणिक विषयों से कुल 1,668 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 40 शैक्षणिक संस्थानों से 100 विद्यार्थियों का चयन किया गया है। चयनित प्रतिभागियों में कानून, समाज विज्ञान, सामाजिक कार्य, मनोविज्ञान, पत्रकारिता, जेंडर स्टडीज़, डिजिटल ह्यूमैनिटीज़ और अंतरराष्ट्रीय संबंध जैसे विविध विषयों के छात्र-छात्राएं शामिल हैं।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने कहा कि कृषि, औद्योगिक और डिजिटल क्रांतियों ने मानव जीवन में व्यापक परिवर्तन किए हैं, लेकिन स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूलभूत मानवीय मूल्य आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि यही मूल्य मानवाधिकारों की आधारशिला हैं और इनकी स्थायी प्रकृति मानवता की साझा विरासत को दर्शाती है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि इंटर्नशिप केवल शैक्षणिक उपलब्धि या प्रोफ़ाइल निर्माण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ज्ञान के विस्तार, सामाजिक यथार्थ की समझ और व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर भी है। उन्होंने चयनित विद्यार्थियों को “मिनी इंडिया” की संज्ञा देते हुए कहा कि विभिन्न पृष्ठभूमियों से आए युवाओं का यह समूह देश की विविधता और एकता का प्रतीक है।

न्यायमूर्ति रामासुब्रमणियन ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों के भीतर मानवाधिकार चेतना के ऐसे बीज बोना है, जो भविष्य में उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली के माध्यम से समाज को अधिक संवेदनशील और न्यायपूर्ण बनाने में योगदान दें। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यदि इस प्रशिक्षण के बाद कुछ विद्यार्थी भी मानवाधिकारों के प्रति अधिक जागरूक, सहानुभूतिपूर्ण और प्रतिबद्ध बनकर निकलते हैं, तो कार्यक्रम अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा।

एनएचआरसी के सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी ने कहा कि यह इंटर्नशिप विभिन्न क्षेत्रों और संस्कृतियों से आए विद्यार्थियों को संवाद और विचार-विमर्श का साझा मंच प्रदान करती है। उनके अनुसार इस प्रकार के अनुभव युवाओं को स्वयं को नए दृष्टिकोण से समझने और देश की विविध सामाजिक वास्तविकताओं से परिचित होने का अवसर देते हैं।

उन्होंने कहा कि ज्ञान और युवा शक्ति का समन्वय राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है। उन्होंने प्रतिभागियों से अपेक्षा की कि वे कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों के साथ होने वाले संवादों से अधिकतम लाभ उठाएं और समाज के उन वर्गों की आवाज़ बनने का प्रयास करें, जिनकी समस्याएं अक्सर अनसुनी रह जाती हैं।

एनएचआरसी की सदस्य श्रीमती विजया भारती सयानी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में मानवाधिकार और मानवीय मूल्य एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ जैसे भारतीय दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि मानवाधिकारों की अवधारणा भारतीय संस्कृति में सदियों से समाहित रही है।

उन्होंने विद्यार्थियों से इस इंटर्नशिप को केवल एक अकादमिक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि मूल्य-आधारित शिक्षा और आत्मविकास के अवसर के रूप में देखने का आग्रह किया। उनके अनुसार मानवाधिकार केवल कानून की पुस्तकों तक सीमित विषय नहीं हैं, बल्कि वे हमारे दैनिक व्यवहार, संवेदनशीलता और दूसरों के प्रति सहानुभूति में भी परिलक्षित होते हैं।

एनएचआरसी के महासचिव भरत लाल ने कहा कि आयोग युवाओं के बौद्धिक और नैतिक विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में देखता है। इसी दृष्टिकोण के तहत व्यक्तिगत और ऑनलाइन दोनों प्रकार के इंटर्नशिप कार्यक्रमों का विस्तार किया जा रहा है, ताकि देश के दूरदराज़ क्षेत्रों तक भी इसकी पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य ऐसी युवा नेतृत्व क्षमता विकसित करना है, जो मानवाधिकारों, लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदनाओं के प्रति प्रतिबद्ध हो। उन्होंने प्रतिभागियों को समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने तथा मानवाधिकारों और मानवीय मूल्यों के प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का परिचय प्रस्तुत करते हुए एनएचआरसी के संयुक्त सचिव समीर कुमार ने बताया कि प्रतिभागियों की शैक्षणिक एवं भौगोलिक विविधता इस इंटर्नशिप की विशेषता है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में संवादात्मक सत्र, समूह अनुसंधान परियोजनाएं, पुस्तक समीक्षा, भाषण प्रतियोगिताएं तथा विभिन्न संस्थानों के शैक्षणिक भ्रमण शामिल किए गए हैं।

इंटर्नशिप के दौरान प्रतिभागी पुलिस थानों, तिहाड़ जेल, एसएचईओडब्ल्यूएस के बुजुर्ग आश्रय गृहों और अन्य राष्ट्रीय आयोगों का भी अध्ययन भ्रमण करेंगे। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानवाधिकारों के व्यावहारिक पक्षों से परिचित कराना तथा सामाजिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को निकट से समझने का अवसर प्रदान करना है।

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