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भीषण गर्मी में भी हरा-भरा स्वर्ग बना छत का किचन गार्डन

बिना मौसम फले रखिया ने बढ़ाया उत्साह

जहां एक ओर भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप ने जनजीवन को प्रभावित कर रखा है, वहीं दूसरी ओर एक छत पर विकसित किया गया किचन गार्डन प्रकृति प्रेम, धैर्य और सतत देखभाल का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। सीमित स्थान में तैयार इस हरित संसार में फूल, फल, औषधीय पौधे, सब्जियां और मछलियों से युक्त जलकुंड मिलकर एक छोटे से जैविक उद्यान का स्वरूप ग्रहण कर चुके हैं। प्रकृति के प्रति विशेष लगाव और निरंतर मेहनत का परिणाम है कि इस टेरेस गार्डन में लगाए गए रखिया के पौधे भीषण गर्मी के बावजूद हरे-भरे बने हुए हैं। आश्चर्यजनक रूप से बिना मौसम के ही इन बेलों पर दो फल दिखाई देने लगे हैं। इन फलों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो पौधों ने अपने संरक्षक की मेहनत और स्नेह का प्रतिफल स्वयं प्रदान किया हो। गार्डन की सबसे आकर्षक विशेषताओं में दो विशेष जल टंकियां हैं, जिन्हें छोटे तालाब का रूप दिया गया है। इनमें लगाए गए नीलकमल के फूल प्रतिदिन खिलकर अपनी अनुपम सुंदरता बिखेरते हैं। इन जलाशयों में तालाबों में पाई जाने वाली विभिन्न जलीय वनस्पतियों को भी सुरक्षित रखा गया है।

भीषण गर्मी में इनके संरक्षण के लिए विशेष सावधानी बरती जाती है, जिससे जलीय जीव और वनस्पतियां स्वस्थ बनी रहें। इन्हीं जलकुंडों में रंग-बिरंगी मछलियां भी आनंदपूर्वक विचरण करती रहती हैं। पानी में उनकी अठखेलियां और ऊपर खिले नीलकमलों का दृश्य किसी प्राकृतिक सरोवर का आभास कराता है। यह दृश्य न केवल मन को सुकून देता है बल्कि शहरी जीवन में प्रकृति से जुड़ने का संदेश भी देता है। किचन गार्डन में औषधीय महत्व की मीठा नीम, तुलसी, हल्दी व गिलोय की बेलें भी तेजी से विकसित हो रही हैं। उनके हरे-भरे पत्ते स्वास्थ्य और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति जागरूकता का संदेश देते हैं। वहीं पुदीना के पौधे गमलों में भरपूर मात्रा में फैलकर घर की रसोई और स्वास्थ्य दोनों की आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं। फूलों की विविधता इस उद्यान की सुंदरता को और बढ़ा देती है। मोगरा, रातरानी, मदार, सदाबहार और पारिजात के फूल अपनी मनमोहक सुगंध और रंग-बिरंगी छटाओं से वातावरण को आनंदमय बनाए रखते हैं।

सुबह और शाम इन फूलों की महक पूरे परिसर को प्राकृतिक सौंदर्य से भर देती है।सब्जियों की क्यारियों में कोचई पत्ते ,पालक, मेथी और चौलाई भाजी भी लहलहा रही हैं। वही करेला और जिमीकंद व अन्नपूर्णा की सब्जी जैविक तरीके से उगाई जा रही ये सब्जियां परिवार को ताजी और पौष्टिक हरियाली सहित ताजी सब्जी उपलब्ध करा रही हैं। प्रकृति के संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में यह टेरेस किचन गार्डन एक प्रेरणादायी उदाहरण बन गया है। भीषण गर्मी के बीच हरे-भरे पौधे, खिले फूल, फलती बेलें, नीलकमल से सजे जलकुंड और उनमें तैरती मछलियां यह संदेश देती हैं कि यदि प्रकृति को प्रेम, समय और संरक्षण मिले तो वह हर परिस्थिति में जीवन और आनंद का सृजन करती है।

सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"
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