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इरेक्टाइल डिसफंक्शन की बढती व्यापकता व वचाव के उपाय

नपुंसकता (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) का अभिप्राय लिंग के उत्तेजित होने व उत्तेजना को बनाए रखने में असमर्थता से है। इसे स्तंभन दोष भी कहते है। 40 से 70 वर्ष की आयु के पुरुषों में आंशिक या पूर्ण नपुंसकता की व्यापकता लगभग 50% है व उम्र बढ़ने के साथ इसकी व्यापकता और बढ़ती जाती है। नपुंसकता केवल शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि मानसिक स्थिति इसका बड़ा कारण है।  नपुंसकता से जुड़े अनेक भ्रांतियां  समाज में हैं। ये भ्रांतियां पुरुषों में घबराहट व शर्मिंदगी का कारण बनती हैं, जिससे वे इलाज नहीं लेने से कतराते हैं।

नपुंसकता के लक्षण:-

नपुंसकता के लक्षण धीरे -धीरे प्रकट होते हैं। प्रारंभिक अवस्था में पहचान महत्वपूर्ण है ताकि समय पर इलाज किया जा सके। समय बीतने के साथ लक्षण की गंभीरता बढ़ जाती है तथा इलाज कठिन एवं खर्चीला होने लगता है। सामान्य लक्षण निम्न है:-

उत्तेजना प्राप्त करने में असफलता :- यौन उत्तेजना होने के बावजूद लिंग में उत्तेजना का न होना।

उत्तेजना बनाए रखने में समस्या :- यौन क्रिया के दौरान लिंग का बहुत जल्द हो सुस्त हो जाना और पुनः उत्तेजित न होना।

यौन इच्छा में कमी :- नपुंसकता में यौन इच्छा में भी गिरावट आने लगता है।

यौन निष्पादन पर संदेह:– व्यक्ति को अपने यौन प्रदर्शन को लेकर आत्म – संदेह व चिंता का अधिक होने लगता है।

नपुंसकता के कारण:-

यौन निष्पादन की चिंता:- यह सबसे सामान्य कारण है। यौन संबंध बनाने में विफल रहने का लगातार डर मस्तिष्क से लिंग तक जाने वाले संकेतों को रोक देता है। जिससे लिंग में उत्तेजना होने में कठिनाई होती है।

तनाव :– कार्यस्थल का दबाव, आर्थिक तंगी या व्यक्तिगत जीवन का तनाव शरीर में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को बढ़ाता है, जो यौन क्षमता को नकारात्मक रुप से प्रभावित करता है।

अवसाद :- यह मानसिक स्थिति यौन इच्छा को कम करती है तथा यौन क्रिया के निष्पादन के गुणवत्ता में कमी लाता है।

रिश्तों में खटास:- यौन साथी के साथ खराब संबाद, अनबन व भावनात्मक जुड़ाव की कमी यौन समस्या को बढ़ाता है।

अतीत का अप्रिय यौन अनुभव:- यौन क्रिया से जुड़े पुराने खराब अनुभव या असफलताएं भी डर का कारण बनती है जो नपुंसकता उत्पन्न करने तथा उसे बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।

दवाइयां :- कुछ दवाइयां रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे नपुंसकता हो सकती है। अल्फा- एड्रीनर्जिक ब्लॉकर्स, बीटा-ब्लॉकर्स, कीमोथेरेपी की दवाएं, अवसादरोधी दवाएं, मूत्रवर्धक जैसी दवाइयाँ नपुंसकता का कारण बन सकती हैं।

तंत्रिका संबंधी विकार :- तंत्रिका संबंधी स्थितियाँ मस्तिष्क की प्रजनन प्रणाली के साथ संबाद करने की क्षमता को प्रभावित करती हैं। नपुंसकता से जुड़े तंत्रिका संबंधी विकारों में मल्टीपल स्केलेरोसिस, स्ट्रोक, रीढ़ की हड्डी या मस्तिष्क का ट्यूमर, अल्जाइमर व पार्किंसंस रोग शामिल हैं।

कैवर्नोसल विकार :- इसे पेरोनी रोग के नाम से भी जाना जाता है, यह एक ऐसा विकार है जिसमें पुरुष का लिंग असामान्य रूप से मुड़ा हुआ अथवा घुमावदार होता है, जिससे उत्तेजना के दौरान काफी दर्द होता है और यौन क्रिया में बाधा उत्पन्न करता है।

अंतःस्रावी विकार:- अंतःस्रावी तंत्र रक्त में विशिष्ट हार्मोन स्रावित करते हैं। दीर्घकालिक मधुमेह एक अंतःस्रावी विकार का उदाहरण है जिसके दुष्प्रभाव नपुंसकता का कारण बनते हैं। इनमें तंत्रिका क्षति, लिंग की संवेदनाओं पर प्रभाव, रक्त प्रवाह में रुकावट व हार्मोनल असंतुलन शामिल हैं।

सर्जरी:- श्रोणि क्षेत्र से संबंधित सर्जरी से लिंग में मौजूद नसों या रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने की संभावना होती है, जिससे उत्तेजना प्राप्त करने व बनाए रखने की क्षमता प्रभावित होती है।

आयु :- नपुंसकता किसी भी उम्र के पुरुषों को प्रभावित कर सकती है किन्तु उम्र बढ़ने के साथ स्तंभन दोष होने का खतरा बढ़ता है।

जीवनशैली संबंधी विकल्प :- अवैध नशीली दवाओं का सेवन तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाता है। सिगरेट पीना स्तंभन दोष के प्रमुख कारणों में से एक है। एम्फ़ैटेमिन और कोकीन जैसी नशीली दवाएं जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करती हैं, वे भी इसका कारण बनती हैं।

चिकित्सक से कब मिलें:-

  • उत्तेजना की समस्या तीन महीने या उससे अधिक समय तक बना रहे। 
  • यौन इच्छा में निरंतर कमी।
  • नपुंसकता के कारण जीवन साथी से झगड़े हों ।​ 
  • अवसाद व चिंता में वृद्धि
  • आत्म – सम्मान में गिरावट।

वचाव के उपाय:-

मनोचिकित्सा:-

संज्ञानात्मक व्यवहार थैरेपी (सीबीटी):- यह थैरेपी उन नकारात्मक विचारों व यौन निष्पादन की चिंता को पहचानने और बदलने में मदद करती है जो यौन प्रदर्शन में बाधा बनते हैं। नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचारों में बदल करके इस विकार से छुटकारा पाया जा सकता है।

सेक्स थेरेपी:- इसमें विशेषज्ञ यौन गतिविधियों से जुड़े दबाव को कम करने के लिए निर्देशित व्यायाम  बताते हैं, जिससे यौन सम्बन्ध संबंधि डर दूर होता है। इसके लिए अनुभवी एवं प्रशिक्षित थैरेपिस्ट का होना आवश्यक है।

युगल परामर्श:- यौन समस्याओं में अधिकांशतः साथी के साथ संबाद व सामंजस्य की कमी मुख्य कारण होता है। युगल परामर्श के माध्यम से साथी अपनी यौन व भावनात्मक जरूरतों पर खुलकर चर्चा करते हैं, जिससे एक-दूसरे पर भरोसा बढ़ता है और मानसिक दबाव कम होने से यौन निष्पादन में सुधार होता है।

माइंडफुलनेस व योग:- ध्यान, प्राणायाम व योग आपके तंत्रिका तंत्र को शांत व मजबूत करते हैं, जिससे यौन क्रिया के दौरान होने वाली घबराहट नियंत्रित होती है जिससे यौन निष्पादन में सुधार होता है।

गहरी लम्बी सांस लेना:- शारीरिक तनाव को दूर करने के लिए डीप ब्रीदिंग तकनीकों का अभ्यास बहुत ही सफल साबित होता है।

जीवनशैली में बदलाव:-

नियमित व्यायाम रक्त संचार को बेहतर बनाता है, जो मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है। जिससे यौन निष्पादन में सुधार होता है। यदि किसी भी प्रकार का नशा करते हों तो उसे छोड़ देना इस विकार में कमी लाने सहायक होता है।

यौन समस्याओं में मनोवैज्ञानिक कारणों  की महत्वपूर्ण भूमिका होती है इसका प्रबंधन मनोवैज्ञानिक परामर्श, जीवन शैली में बदलाव, नशा से दूरी तथा चिकित्सक व्दारा बताए दवाओं के उचित उपयोग द्वारा किया जा सकता है।  नपुंसकता के निवारण में जीवनसाथी का सहयोग एवं सामंजस्य महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। नंपुसकता के लक्षण होने पर शर्मिंदगी महसूस करने के बजाय उचित परामर्श व चिकित्सा के माध्यम से दूर किया जा सकता है।

डॉ. मनोज कुमार तिवारी
वरिष्ठ परामर्शदाता
एआरटी सेंटर, एस एस हॉस्पिटल आईएमएस, बीएचयू, वाराणसी

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