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विश्व जनसंख्या दिवस पर जनसंख्या एवं सतत विकास विषयक व्याख्यान आयोजित

 डॉ. घनश्याम सिंह महाविद्यालय, सोयेपुर, वाराणसी के भूगोल विभाग द्वारा विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर “जनसंख्या वृद्धि एवं सतत विकास” विषय पर एक विशेष अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम डॉ. घनश्याम सिंह महाविद्यालय, वाराणसी एवं उदय प्रताप स्वायत्तशासी महाविद्यालय, वाराणसी के भूगोल विभागों के मध्य संपादित समझौता ज्ञापन (MoU) के अंतर्गत आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती एवं संस्थापक श्रद्धेय डॉ. घनश्याम सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। अतिथि का स्वागत शॉल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर किया गया।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रो. अ्ंजू सिंह , विभागाध्यक्ष, भूगोल विभाग, उदय प्रताप स्वायत्तशासी महाविद्यालय, वाराणसी रहीं। अपने व्याख्यान में उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व का सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश है तथा विश्व की लगभग 18 प्रतिशत जनसंख्या भारत में निवास करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसंख्या स्वयं में समस्या नहीं, बल्कि उसका स्वरूप, गुणवत्ता एवं संसाधनों के साथ उसका संतुलन अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने मृदा, जल, वायु, वन एवं खनिज जैसे प्राकृतिक संसाधनों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन सभी में मानव संसाधन सर्वाधिक मूल्यवान है, क्योंकि मानव का मस्तिष्क, उसकी शिक्षा, कौशल, नवाचार क्षमता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही किसी राष्ट्र के वास्तविक विकास का आधार हैं। उन्होंने दक्षिण एशिया एवं यूरोप के जनसंख्या वितरण का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए बताया कि जहाँ दक्षिण एशिया में जनसंख्या का दबाव अधिक है, वहीं यूरोप के अनेक देशों में जनसंख्या वृद्धि अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने कहा कि तीव्र जनसंख्या वृद्धि के कारण खाद्य सुरक्षा, स्वच्छ जल, ऊर्जा, ईंधन, परिवहन, स्वास्थ्य, रोजगार तथा आधारभूत सुविधाओं पर निरंतर दबाव बढ़ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप पर्यावरणीय असंतुलन, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक ऊष्मीकरण, प्रदूषण तथा जैव विविधता का क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियाँ सामने आ रही हैं। उन्होंने गौरैया, गिद्ध एवं चील जैसे पक्षियों की घटती संख्या को पारिस्थितिक असंतुलन का संकेत बताते हुए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने शहरी ऊष्मा द्वीप (Urban Heat Island) qजैसी उभरती शहरी समस्याओं की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि जनसंख्या वृद्धि के साथ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं मानव पूंजी का विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बेरोजगारी की समस्या का प्रमुख कारण कौशल (Skill) की कमी को बताते हुए युवाओं के लिए रोजगारपरक शिक्षा एवं कौशल विकास पर विशेष बल दिया। महिलाओं की शिक्षा एवं जागरूकता को सामाजिक समानता और जनसंख्या स्थिरीकरण का आधार बताते हुए उन्होंने अभिभावकों से बालिकाओं की शिक्षा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। अपने व्याख्यान के अंत में उन्होंने सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तम स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, स्वच्छ जल, आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक न्याय जैसे लक्ष्यों की प्राप्ति जनसंख्या एवं संसाधनों के मध्य संतुलित एवं उत्तरदायी विकास के माध्यम से ही संभव है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों एवं शिक्षकगण ने मुख्य वक्ता से विभिन्न समसामयिक विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। अपने संबोधन में महाविद्यालय के प्रबंधक महोदय ने कहा कि “जनसंख्या और संसाधनों के मध्य संतुलन ही किसी सभ्यता की दीर्घकालिक स्थिरता का आधार है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती जनसंख्या वृद्धि नहीं, बल्कि उसे उत्पादक, नवाचारी एवं उत्तरदायी मानव पूंजी में परिवर्तित करना है।” उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास एवं नैतिक मूल्यों से युक्त मानव संसाधन ही राष्ट्र को आत्मनिर्भर, समृद्ध एवं सतत विकास की दिशा में अग्रसर कर सकता है।

कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आनंद सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया, जबकि मंच का प्रभावी संचालन श्रीमती खुशबू सिंह ने किया। इस अवसर पर श्री धीरज सिंह, डॉ. डी.वी. सिंह, डॉ. रचना पाण्डेय, डॉ. ज्योति सिंह, डॉ. अरविंद चौबै, डॉ. संदीप राय, डॉ. विनीत सिंह, डॉ. विवेकानन्द चौबे, डॉ. मुकेश विश्वकर्मा, श्रीमती रीतू सिंह, डॉ. साजिया शेख सहित महाविद्यालय के अन्य सम्मानित शिक्षकगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। एवीके न्यूज सर्विस

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