भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान प्रतिस्पर्धा कानून और बाजार व्यवस्था से जुड़े वैश्विक विमर्श को नई दिशा देने की कोशिशों के बीच भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने 8 अगस्त को राजस्थान के उदयपुर में ब्रिक्स प्रतिस्पर्धा प्राधिकरणों के प्रमुखों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिस्पर्धा प्राधिकरणों के प्रमुखों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया तथा तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा कानून और नीति के सामने उभर रही चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।

बैठक का केंद्रीय विषय केवल पारंपरिक बाजारों में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना नहीं रहा, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था, नई प्रौद्योगिकियों, नवीकरणीय ऊर्जा, वैश्विक ऊर्जा संक्रमण और सीमा-पार कारोबारी गतिविधियों के कारण बदलते प्रतिस्पर्धात्मक परिदृश्य को समझना भी रहा। ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक संबंधों के विस्तार को देखते हुए प्रतिस्पर्धा प्राधिकरणों के बीच सूचनाओं, अनुभवों और प्रवर्तन संबंधी ज्ञान का आदान-प्रदान आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
प्रतिस्पर्धी बाजारों के लिए साझा जिम्मेदारी
सीसीआई की अध्यक्ष रवनीत कौर ने बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों के प्रतिस्पर्धा प्राधिकरणों की साझा जिम्मेदारी ऐसे बाजारों को बढ़ावा देना है जहां प्रतिस्पर्धा केवल बाजार हिस्सेदारी हासिल करने का माध्यम न होकर आर्थिक दक्षता, उपभोक्ता कल्याण और नवाचार को आगे बढ़ाने का आधार बने।
प्रतिस्पर्धा का स्वस्थ वातावरण किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे कंपनियों को बेहतर उत्पाद और सेवाएं उपलब्ध कराने, कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने तथा तकनीकी और कारोबारी नवाचार के लिए प्रेरणा मिलती है। वहीं, जब बाजार में कुछ चुनिंदा कंपनियों का अत्यधिक प्रभाव स्थापित हो जाता है, तो नए कारोबारियों के लिए प्रवेश की बाधाएं बढ़ सकती हैं और उपभोक्ताओं के विकल्प सीमित हो सकते हैं। ऐसे में प्रतिस्पर्धा प्राधिकरणों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
रवनीत कौर ने इस बात पर जोर दिया कि प्रतिस्पर्धा कानून के तहत किए जाने वाले हस्तक्षेप स्पष्ट सिद्धांतों, ठोस साक्ष्यों और प्रतिस्पर्धा कानून के मूल उद्देश्यों पर आधारित होने चाहिए। बाजार की परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं और इन परिस्थितियों में नियामकीय निर्णय लेते समय संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
डिजिटल बाजारों ने बढ़ाई सीमा-पार चुनौती
बैठक में डिजिटल बाजारों और उभरती प्रौद्योगिकियों के तेजी से विस्तार को विशेष महत्व दिया गया। डिजिटल अर्थव्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता यह है कि किसी कंपनी की बाजार शक्ति का प्रभाव कई देशों में एक साथ दिखाई दे सकता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन सेवाएं, डेटा आधारित कारोबारी मॉडल और नई प्रौद्योगिकियां राष्ट्रीय सीमाओं से परे काम करती हैं।
ऐसे बाजारों में प्रतिस्पर्धा से जुड़े मामलों की जांच पारंपरिक बाजारों की तुलना में अधिक जटिल हो सकती है। बाजार की शक्ति का आकलन केवल बिक्री या बाजार हिस्सेदारी के आधार पर करना पर्याप्त नहीं हो सकता। डेटा, नेटवर्क प्रभाव, तकनीकी अवसंरचना, उपयोगकर्ता आधार और प्लेटफॉर्म की पहुंच जैसे कारक भी प्रतिस्पर्धा की स्थिति को प्रभावित करते हैं।
इसी वजह से ब्रिक्स देशों के प्रतिस्पर्धा प्राधिकरणों के बीच निरंतर संवाद और अनुभव साझा करने की जरूरत पर बैठक में बल दिया गया। अलग-अलग देशों में सामने आ रही चुनौतियों और उनके समाधान से मिले अनुभव अन्य सदस्य देशों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। विशेष रूप से सीमा-पार डिजिटल कारोबार से जुड़े मामलों में नियामकीय सहयोग भविष्य में अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र पर बढ़ता प्रतिस्पर्धात्मक विमर्श
बैठक में नवीकरणीय ऊर्जा और वैश्विक स्तर पर जारी ऊर्जा संक्रमण को भी प्रमुखता मिली। दुनिया भर में ऊर्जा व्यवस्था तेजी से बदल रही है। जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने, स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों के बीच नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और कारोबारी गतिविधियां बढ़ रही हैं।
इस परिवर्तन के साथ प्रतिस्पर्धा से जुड़े नए प्रश्न भी सामने आ रहे हैं। नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवश्यक तकनीक, उपकरण, कच्चा माल, आपूर्ति श्रृंखला, निवेश और बाजार पहुंच जैसे क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मक परिस्थितियां महत्वपूर्ण हैं। यदि इन बाजारों में प्रतिस्पर्धा कमजोर होती है तो इसका असर लागत, निवेश और अंततः उपभोक्ताओं तथा व्यापक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
सीसीआई की अध्यक्ष ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों को विकसित करने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही ऐसा सहयोग सतत विकास और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े साझा उद्देश्यों को भी मजबूत कर सकता है।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत सीसीआई ने इसी विषय को केंद्र में रखते हुए एक संयुक्त अध्ययन का नेतृत्व किया। अध्ययन का शीर्षक था, “ब्रिक्स में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उभरता प्रतिस्पर्धा परिदृश्य”। अध्ययन का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों में प्रतिस्पर्धा की बदलती प्रकृति को समझना तथा भविष्य में सहयोग के संभावित क्षेत्रों की पहचान करना था।
बैठक के दौरान अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए। यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ऊर्जा संक्रमण केवल पर्यावरणीय नीति का विषय नहीं रह गया है। यह निवेश, औद्योगिक नीति, तकनीकी प्रतिस्पर्धा, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और उपभोक्ता हित से भी सीधे जुड़ चुका है।
प्रतिस्पर्धा कानून में बदलते परिदृश्य पर चर्चा
ब्रिक्स प्रतिस्पर्धा प्राधिकरणों के प्रमुखों ने अपने-अपने देशों में प्रतिस्पर्धा कानून और नीति से जुड़े हालिया बदलावों की जानकारी भी साझा की। चर्चा में महत्वपूर्ण प्रवर्तन पहलों, संस्थागत विकास तथा घरेलू बाजारों में सामने आ रही नई चुनौतियों को शामिल किया गया।
इस प्रकार की बैठकें केवल औपचारिक विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहतीं। अलग-अलग न्यायक्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा संबंधी मामलों से प्राप्त अनुभवों को साझा करने से नियामक संस्थाओं को अपने दृष्टिकोण को व्यापक बनाने में सहायता मिलती है। विशेष रूप से ऐसे मामलों में, जिनमें बहुराष्ट्रीय कंपनियां, डिजिटल प्लेटफॉर्म या सीमा-पार कारोबार शामिल हो, विभिन्न प्रतिस्पर्धा प्राधिकरणों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण हो जाता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में उत्पादन, निवेश और व्यापार की आपसी निर्भरता बढ़ने के साथ किसी एक देश में लिए गए कारोबारी निर्णय का प्रभाव दूसरे देशों के बाजारों पर भी पड़ सकता है। इसलिए प्रतिस्पर्धा प्रवर्तन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
उदयपुर बैठक में संयुक्त बयान को मिली मंजूरी
बैठक का एक महत्वपूर्ण परिणाम ब्रिक्स प्रतिस्पर्धा प्राधिकरणों के प्रमुखों द्वारा संयुक्त बयान को अपनाया जाना रहा। “नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों सहित निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए सहयोग को मजबूत करना” शीर्षक वाले इस संयुक्त बयान में सदस्य देशों ने प्रतिस्पर्धी, नवाचारी, सुदृढ़ और टिकाऊ नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की।
संयुक्त बयान में वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन से जुड़े नए प्रतिस्पर्धात्मक मुद्दों को समझने और उनसे निपटने के लिए ज्ञान तथा अनुभव साझा करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। यह पहल इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव के साथ बाजार संरचनाओं में भी व्यापक परिवर्तन हो रहा है।
नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश, नई तकनीक और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला की जरूरत होती है। ऐसे में प्रतिस्पर्धा का वातावरण यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है कि बाजार में दक्षता और नवाचार को बढ़ावा मिले तथा अवसर केवल सीमित कारोबारी समूहों तक केंद्रित न हों।
उपभोक्ता हित और नवाचार को केंद्र में रखने पर जोर
प्रतिस्पर्धा कानून की चर्चा अक्सर कंपनियों और बाजार हिस्सेदारी तक सीमित दिखाई देती है, लेकिन इसका अंतिम उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना भी है। जब बाजार में पर्याप्त प्रतिस्पर्धा रहती है तो कंपनियों पर कीमत, गुणवत्ता, सेवा और नवाचार के स्तर को बेहतर बनाए रखने का दबाव रहता है।
डिजिटल बाजारों और ऊर्जा क्षेत्र में यह पहलू और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। डिजिटल सेवाओं में उपभोक्ता डेटा और तकनीकी सुविधाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जबकि ऊर्जा क्षेत्र में कीमत, विश्वसनीयता और उपलब्धता सीधे आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करती है।
उदयपुर बैठक में इन व्यापक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रतिस्पर्धा प्रवर्तन को साक्ष्य आधारित और सिद्धांतों पर आधारित बनाए रखने की आवश्यकता सामने आई। तेजी से बदलती तकनीक और बाजार परिस्थितियों के बीच नियामकीय हस्तक्षेप ऐसा होना चाहिए जो प्रतिस्पर्धा को मजबूत करे, लेकिन नवाचार और वैध कारोबारी गतिविधियों के लिए अनावश्यक बाधाएं भी न खड़ी करे।
ब्रिक्स सहयोग का आर्थिक महत्व
ब्रिक्स देशों का आर्थिक और व्यापारिक महत्व लगातार बढ़ा है। सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं की संरचना, बाजार परिस्थितियां और नियामकीय व्यवस्थाएं एक-दूसरे से अलग हैं। इसके बावजूद व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के स्तर पर उनके बीच संपर्क बढ़ रहा है।
ऐसी स्थिति में प्रतिस्पर्धा प्राधिकरणों के बीच संस्थागत सहयोग आर्थिक संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार तैयार कर सकता है। यदि किसी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा संबंधी समान समस्याएं सामने आती हैं तो उनके समाधान के लिए साझा अनुभव उपयोगी हो सकते हैं।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान आयोजित यह बैठक इसी व्यापक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा सकती है। विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा को प्रतिस्पर्धा के नजरिए से देखने की पहल आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि ऊर्जा संक्रमण वैश्विक अर्थव्यवस्था की प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान बना चुका है।
ब्राजील में 2027 के सम्मेलन की तैयारियों की जानकारी
बैठक में ब्राजील की आर्थिक रक्षा प्रशासनिक परिषद (CADE) ने वर्ष 2027 में ब्राजील में आयोजित होने वाले 10वें ब्रिक्स अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा सम्मेलन की तैयारियों के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी।
इससे यह संकेत मिलता है कि ब्रिक्स के भीतर प्रतिस्पर्धा कानून और नीति पर संवाद को आगे भी जारी रखने की योजना है। नियमित बैठकें और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सदस्य देशों के नियामकीय संस्थानों को बदलती आर्थिक परिस्थितियों पर सामूहिक रूप से विचार करने का अवसर देते हैं।
विशेष रूप से डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा आधारित बाजार, हरित ऊर्जा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं जैसे क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा कानून की भूमिका आने वाले समय में और व्यापक हो सकती है।