देश के युवाओं को नशे से दूर रखने और फिटनेस को जीवनशैली का हिस्सा बनाने के उद्देश्य से आयोजित ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ के 85वें संस्करण ने रविवार को एक व्यापक सामाजिक संदेश के साथ राष्ट्रव्यापी रूप लिया। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने गुजरात के हनोल से इस विशेष साइकिलिंग अभियान का नेतृत्व किया। इस संस्करण का मुख्य विषय ‘नशा मुक्त भारत’ रहा, जिसके माध्यम से युवाओं से नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहने और स्वस्थ, सक्रिय तथा अनुशासित जीवन अपनाने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से नशे से दूर रहने की प्रतिज्ञा ली और ‘फिटनेस को हां कहें, ड्रग्स को ना कहें’ का संदेश दिया। इस पहल का उद्देश्य नशे की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था या स्वास्थ्य के मुद्दे के रूप में देखने के बजाय युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक गतिविधियों की ओर मोड़ना है।

फिटनेस को बनाया जा रहा सामाजिक आंदोलन
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की ओर से ‘फिट इंडिया’ अभियान के तहत आयोजित ‘संडे ऑन साइकिल’ अब महज एक साप्ताहिक फिटनेस कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा है। दिसंबर 2024 में शुरू किए गए इस अभियान में अब तक देशभर में 30 लाख से अधिक लोग भाग ले चुके हैं।
डॉ. मनसुख मांडविया ने इस पहल को जन आंदोलन का रूप लेने वाला अभियान बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ से प्रेरित होकर ‘संडे ऑन साइकिल’ देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को फिटनेस के लिए एक साथ जोड़ रहा है। उनके अनुसार, देशभर में 10,000 से अधिक स्थानों पर युवाओं और नागरिकों ने साइकिलिंग के माध्यम से स्वस्थ जीवन और सक्रिय नागरिकता का संदेश पहुंचाया है।
इस अभियान की खासियत यह है कि इसमें फिटनेस को किसी विशेष आयु वर्ग या खेल पृष्ठभूमि तक सीमित नहीं रखा गया है। बच्चे, युवा, वरिष्ठ नागरिक, विद्यार्थी, खिलाड़ी और सामान्य नागरिक अलग-अलग स्थानों पर साइकिलिंग तथा अन्य शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से इसमें शामिल हो रहे हैं।
नशे के विरुद्ध युवाओं की भूमिका पर जोर
85वें संस्करण में ‘नशा मुक्त भारत’ को मुख्य विषय बनाए जाने का एक व्यापक सामाजिक संदर्भ भी है। नशीले पदार्थों का सेवन युवाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके शिक्षा, रोजगार, परिवार और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में खेल और फिटनेस गतिविधियों को सकारात्मक विकल्प के तौर पर बढ़ावा देने की रणनीति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
साइकिलिंग जैसे सामूहिक कार्यक्रम युवाओं को केवल शारीरिक गतिविधि से नहीं जोड़ते, बल्कि उन्हें एक सामाजिक उद्देश्य से भी जोड़ते हैं। जब बड़ी संख्या में युवा किसी साझा संदेश के साथ सार्वजनिक स्थानों पर गतिविधि करते हैं, तो उसका प्रभाव व्यक्तिगत फिटनेस से आगे बढ़कर सामुदायिक जागरूकता तक पहुंचता है।
इसी उद्देश्य से इस संस्करण में नशे से दूर रहने की सामूहिक प्रतिज्ञा को कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। प्रतिभागियों ने स्वयं नशे से दूर रहने के साथ अपने परिवार, मित्रों और समुदाय में स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
दिल्ली में भी दिखा उत्साह
राष्ट्रीय स्तर पर अभियान का संदेश पहुंचाने के लिए मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम, दिल्ली में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। रविवार की सुबह बड़ी संख्या में नागरिक और युवा फिटनेस गतिविधियों में भाग लेने के लिए कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे।
सुबह करीब 5:30 बजे तक 1,000 से अधिक प्रतिभागी योग, जुंबा और अन्य फिटनेस गतिविधियों में शामिल होने के लिए पहुंच चुके थे। इसके बाद इंडिया गेट और कर्तव्य पथ के आसपास लगभग 5 किलोमीटर की साइकिल यात्रा आयोजित की गई।
साइकिल यात्रा के साथ कार्यक्रम स्थल पर खेल और शारीरिक गतिविधियों का भी व्यापक इंतजाम किया गया था। कैरम, शतरंज, लूडो और बैडमिंटन जैसे खेलों के अलावा रस्साकशी और बाधा दौड़ जैसी गतिविधियों ने आयोजन को प्रतियोगिता और मनोरंजन से भी जोड़ा।
इस तरह कार्यक्रम में फिटनेस को केवल साइकिल चलाने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि विभिन्न प्रकार की शारीरिक और मानसिक गतिविधियों को एक ही मंच पर शामिल किया गया।
खेल और मनोरंजन जगत की हस्तियों ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियों ने भी हिस्सा लिया। भारतीय अभिनेता और मॉडल सिद्धार्थ निगम, अंतरराष्ट्रीय स्क्वैश खिलाड़ी एवं जूनियर राष्ट्रीय चैंपियन गुरवीर सिंह, आईआरएस अधिकारी एवं फिट इंडिया के राजदूत नरेंद्र कुमार तथा फिट इंडिया चैंपियन और जुंबा प्रशिक्षक मीनल पाठक विशेष रूप से मौजूद रहे।
सिद्धार्थ निगम की मौजूदगी ने युवाओं के बीच कार्यक्रम को अतिरिक्त आकर्षण दिया। ‘धूम 3’ में अभिनय कर चुके निगम स्वयं जिम्नास्टिक्स से जुड़े रहे हैं और फिटनेस को लेकर उनका अनुभव कार्यक्रम के संदेश से सीधे जुड़ता है।
साइकिलिंग राइड पूरी करने के बाद उन्होंने युवाओं से नशीले पदार्थों, सिगरेट और शराब से दूर रहने का आग्रह किया। उन्होंने फिटनेस को नियमित जीवन का हिस्सा बनाने और प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि के लिए देने पर जोर दिया।
उनके अनुसार, खेल ने उन्हें अनुशासन का महत्व सिखाया और यही अनुशासन बेहतर जीवन की आधारशिला बन सकता है। उन्होंने युवाओं को यह संदेश देने की कोशिश की कि नकारात्मक आदतों की जगह फिटनेस, मेहनत और लक्ष्य हासिल करने की प्रतिबद्धता को जीवन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
खिलाड़ियों की सफलता को भी जोड़ा गया फिटनेस संदेश से
अंतरराष्ट्रीय स्क्वैश खिलाड़ी गुरवीर सिंह ने भी ‘फिट इंडिया’ और ‘नशा मुक्त भारत’ अभियान की सराहना की। उन्होंने युवाओं को प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि के लिए समय देने की अपील की।
गुरवीर सिंह ने खेलों में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के 39 पदकों के प्रदर्शन को भी सराहनीय बताया। उनके मुताबिक, खिलाड़ियों की उपलब्धियां केवल पदक तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि वे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनती हैं।
खेलों की दुनिया में सफलता के लिए नियमित अभ्यास, अनुशासन, धैर्य और शारीरिक क्षमता की आवश्यकता होती है। यही गुण युवाओं को नशे जैसी हानिकारक आदतों से दूर रखने में भी उपयोगी हो सकते हैं।
साइकिलिंग से फिटनेस के साथ पर्यावरण का संदेश
‘संडे ऑन साइकिल’ जैसे अभियानों का प्रभाव स्वास्थ्य के साथ पर्यावरणीय दृष्टि से भी देखा जा सकता है। साइकिल एक ऐसा परिवहन माध्यम है जिसमें ईंधन की आवश्यकता नहीं होती और इससे प्रदूषण का प्रत्यक्ष उत्सर्जन नहीं होता।
हालांकि इस अभियान का प्राथमिक उद्देश्य फिटनेस और जनभागीदारी है, लेकिन नियमित साइकिलिंग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने से नागरिकों में गैर-मोटर चालित परिवहन के प्रति जागरूकता भी बढ़ सकती है। विशेष रूप से शहरों में छोटी दूरी के लिए साइकिल के उपयोग को प्रोत्साहित करना स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए उपयोगी हो सकता है।
युवाओं के बीच साइकिलिंग को लोकप्रिय बनाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अपेक्षाकृत सरल और सुलभ शारीरिक गतिविधि है। इसके लिए महंगे उपकरण या विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती।
देशभर में एक साथ जुड़ा अभियान
फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल का आयोजन युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की ओर से साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया, राहगिरी फाउंडेशन और माई भारत के सहयोग से किया जाता है।
इस अभियान का नेटवर्क देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक फैला हुआ है। भारतीय खेल प्राधिकरण के क्षेत्रीय केंद्रों, राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों, एसएआई प्रशिक्षण केंद्रों, खेलो इंडिया राज्य उत्कृष्टता केंद्रों और खेलो इंडिया केंद्रों को भी इससे जोड़ा गया है।
इसके अलावा साइकिलिंग के प्रति रुचि रखने वाले समूह, स्कूल और कॉलेज तथा बड़ी संख्या में नमो फिट इंडिया क्लब भी अभियान में भाग लेते हैं। इससे कार्यक्रम को संस्थागत ढांचे के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी भी मिलती है।
यही विकेंद्रीकृत भागीदारी ‘संडे ऑन साइकिल’ को एक व्यापक अभियान का स्वरूप देती है। किसी एक शहर में आयोजित कार्यक्रम के बजाय देश के अलग-अलग हिस्सों में एक ही संदेश के साथ गतिविधियां आयोजित होने से इसका सामाजिक प्रभाव बढ़ता है।
युवाओं के लिए सकारात्मक विकल्प तैयार करने की जरूरत
नशा मुक्ति का अभियान केवल नशीले पदार्थों से दूरी बनाने की अपील तक सीमित नहीं रह सकता। युवाओं के सामने सकारात्मक विकल्प उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है। खेल, साइकिलिंग, योग, नृत्य, जुंबा और अन्य शारीरिक गतिविधियां युवाओं को स्वस्थ दिनचर्या से जोड़ने का माध्यम बन सकती हैं।
युवा अवस्था ऊर्जा और प्रयोग की उम्र होती है। यदि इस ऊर्जा को रचनात्मक गतिविधियों, खेल, शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक भागीदारी की दिशा दी जाए तो इसका लाभ व्यक्ति के साथ पूरे समाज को मिलता है। इसके विपरीत, नशे जैसी आदतें व्यक्ति की क्षमता, स्वास्थ्य और सामाजिक संबंधों पर दीर्घकालिक असर डाल सकती हैं।
इसी संदर्भ में ‘नशा मुक्त भारत’ को ‘फिट इंडिया’ अभियान से जोड़ना एक व्यापक संदेश देता है। इसका मूल विचार यह है कि नशे के विकल्प के रूप में युवाओं के सामने ऐसी जीवनशैली हो जिसमें स्वास्थ्य, खेल, अनुशासन और व्यक्तिगत लक्ष्य प्रमुख हों।
अभियान की सफलता केवल संख्या से नहीं होगी तय
‘संडे ऑन साइकिल’ में 30 लाख से अधिक लोगों की भागीदारी इस अभियान की व्यापक पहुंच को दर्शाती है। लेकिन किसी भी जनअभियान की वास्तविक सफलता केवल प्रतिभागियों की संख्या से नहीं, बल्कि लोगों की आदतों और व्यवहार में आने वाले बदलाव से निर्धारित होती है।
यदि साइकिलिंग और अन्य फिटनेस गतिविधियां लोगों की नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनती हैं, यदि युवा खेलों की ओर आकर्षित होते हैं और यदि नशीले पदार्थों के प्रति सामाजिक अस्वीकृति मजबूत होती है, तो इस तरह के अभियानों का प्रभाव कहीं अधिक व्यापक माना जाएगा।
इसलिए आगे की चुनौती यह होगी कि रविवार के एक कार्यक्रम को सप्ताह के बाकी दिनों की जीवनशैली से कैसे जोड़ा जाए। स्कूलों, कॉलेजों, खेल संस्थानों, स्थानीय प्रशासन और युवा संगठनों की भागीदारी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।