ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में ग्रामीण विकास मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक कृषि भवन, नई दिल्ली में आयोजित की गई।
इस बैठक में श्री कल्याण बनर्जी, श्री धर्मबीर सिंह तथा श्रीमती अनिता नागरसिंह चौहान, संसद सदस्य (लोक सभा), के साथ-साथ समिति के अन्य सदस्यों तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
श्री नरेंद्र भूषण, सचिव, भूमि संसाधन विभाग तथा श्री रोहित कंसल, सचिव, ग्रामीण विकास ने अपने-अपने विभागों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने की दिशा में की गई प्रगति तथा उपलब्धियों से समिति को अवगत कराया। उन्होंने सरकारी पत्राचार में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय के निरंतर प्रयासों तथा इस दिशा में हो रही निरंतर प्रगति को रेखांकित किया।
बैठक में विशेष आमंत्रित सदस्यों के रूप में विभिन्न संस्थाओं द्वारा नामित हिंदी के विद्वानों ने भी भाग लिया, जिनमें श्री गिरीश पंकज, श्री इंद्र कुमार जैन, श्री देवी प्रसाद मिश्र, एडवोकेट डॉ. बी. मधु, डॉ. नरेंद्र कुमार संत, श्रीमती कैथी रोहुलुपुई एवं श्री रजनीश मोहनोत शामिल थे।

समिति के सदस्यों तथा आमंत्रित विद्वानों ने मंत्रालय में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को और अधिक बढ़ावा देने के लिए अनेक रचनात्मक सुझाव दिए। माननीय मंत्री जी ने इन सुझावों का स्वागत करते हुए सदस्यों को आश्वस्त किया कि इन पर गंभीरता से विचार कर कार्रवाई की जाएगी।

बैठक को संबोधित करते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकारी काम-काज में अंग्रेजी पर अत्यधिक निर्भरता गुलामी की मानसिकता को दर्शाती है और हमें हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के प्रयोग में गर्व की अनुभूति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए कार्य करता है, इसलिए मंत्रालय की नीतियों तथा कार्यक्रमों को ऐसी भाषा में आम जन तक पहुंचाया जाना चाहिए जो उनके लिए सुगम हो।

श्री चौहान ने हिंदी को “भारत की आत्मा और जन साधारण की आवाज” बताते हुए मंत्रालय के अधिकारियों का आह्वान किया कि वे सरकारी काम-काज में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने के लिए पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ प्रयास करें।

माननीय मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि हिंदी सलाहकार समिति की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएं तथा हिंदी को और बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय के कार्यक्रमों में स्थानीय साहित्यकारों को शामिल किया जाए। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि राज्य सरकारों के साथ पत्राचार, जहां उपयुक्त हो, उनकी संबंधित क्षेत्रीय भाषाओं में भी किया जाए।

बैठक का समापन मंत्रालय के सरकारी काम-काज में तथा ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के लाभ को जन-जन तक पहुंचाने में हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के प्रयोग को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता को दोहराने के साथ हुआ। साभार : पीआईबी