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एजेंटिक एआई के युग के लिए तैयार होगा भारत का कार्यबल, एनआईईएलआईटी और इंटेल इंडिया ने शुरू की कौशल पहल

नई दिल्ली: भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच भविष्य के कार्यबल को एजेंटिक एआई के लिए तैयार करने की दिशा में राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) और इंटेल इंडिया ने नई पहल शुरू की है। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत एनआईईएलआईटी ने इंटेल इंडिया के सहयोग से नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में ‘एजेंटिक एआई युग के लिए भविष्य के कार्यबल को तैयार करना’ विषय पर राष्ट्रीय नेतृत्व संवाद आयोजित किया।

कार्यक्रम में सरकार, विदेशी मिशनों, शिक्षण संस्थानों, उद्योग और कौशल विकास क्षेत्र के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य विषय यह रहा कि एजेंटिक एआई के विस्तार के साथ रोजगार, शिक्षा और कौशल की आवश्यकताएं किस प्रकार बदल रही हैं और भारत अपने कार्यबल को इस बदलाव के लिए किस तरह तैयार कर सकता है।

कार्यक्रम में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के अध्यक्ष शशि शेखर वेम्पति मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। एनआईईएलआईटी के महानिदेशक डॉ. मदन मोहन त्रिपाठी, इंडियाAI मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुदीप श्रीवास्तव, इंटेल के प्रमुख एवं वैश्विक निदेशक अंशुल सोनाक सहित सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग से जुड़े कई वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

बदल रहा है एआई का स्वरूप

एआई तकनीक अब केवल पूर्वानुमान लगाने या सामग्री तैयार करने वाली प्रणालियों तक सीमित नहीं रह गई है। एजेंटिक एआई ऐसी प्रणालियों की दिशा में अगला चरण है, जो मानवीय निगरानी में तर्क करने, योजना बनाने और जटिल कार्यों को पूरा करने में सक्षम होती हैं। इसके साथ ही उद्योगों में आवश्यक कौशल का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है।

संवाद में इस बात पर जोर दिया गया कि छात्रों, शिक्षकों और पेशेवरों को केवल तकनीकी जानकारी देना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें एआई प्रणालियों के साथ काम करने के लिए अनुकूलन क्षमता, समस्या समाधान, निर्णय लेने की क्षमता और मानव-केंद्रित कौशल से भी लैस करना होगा।

चर्चा के दौरान उद्योग की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम, व्यावहारिक एवं अनुभवात्मक शिक्षा, संकाय प्रशिक्षण, एआई आधारित शिक्षण वातावरण और सरकार-शिक्षा जगत-उद्योग के बीच सहयोग को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया गया।

युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करने पर जोर

सीबीएफसी के अध्यक्ष शशि शेखर वेम्पति ने कहा कि तकनीकी बदलाव के साथ कार्य की प्रकृति भी बदल रही है। ऐसे में कौशल, रोजगार क्षमता और निरंतर सीखने की प्रक्रिया भविष्य के कार्यबल के लिए निर्णायक होगी।

उन्होंने एनआईईएलआईटी और इंटेल इंडिया की एजेंटिक एआई कौशल पहल की सराहना करते हुए कहा कि दीर्घकालिक कौशल विकास कार्यक्रमों में बुनियादी और उभरती तकनीकी क्षमताओं के साथ वास्तविक दुनिया के अनुभव, उद्योग आधारित केस स्टडी और व्यावहारिक डेटासेट को शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं को केवल वर्तमान रोजगार के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में उभरने वाली नौकरियों और कार्यक्षेत्रों के लिए भी तैयार करने की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार, उद्योग, शिक्षा संस्थानों और कौशल विकास संगठनों के बीच निरंतर सहयोग जरूरी है।

एनआईईएलआईटी और इंटेल का संयुक्त प्रयास

एनआईईएलआईटी के महानिदेशक डॉ. मदन मोहन त्रिपाठी ने कहा कि एआई के तीव्र विकास ने शिक्षा और कौशल विकास व्यवस्था के सामने नई संभावनाओं के साथ नई चुनौतियां भी खड़ी की हैं। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिकी, सूचना प्रौद्योगिकी और उभरती तकनीकों में क्षमता निर्माण के लिए राष्ट्रीय संस्थान के रूप में एनआईईएलआईटी यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि शिक्षार्थी और शिक्षक तकनीकी बदलाव के अगले चरण के लिए तैयार रहें।

उनके अनुसार, इंटेल इंडिया के साथ सहयोग से एनआईईएलआईटी की देशव्यापी कौशल विकास पहुंच और इंटेल की तकनीकी विशेषज्ञता को एक मंच पर लाने का अवसर मिला है। इससे एजेंटिक एआई की व्यावहारिक शिक्षा को देश के विभिन्न संस्थानों और शिक्षार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

एआई प्रतिभा का मजबूत आधार बनाने की जरूरत

इंडियाAI मिशन के सीईओ और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुदीप श्रीवास्तव ने भारत में संप्रभु एआई क्षमताओं और समावेशी एआई पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के अगले चरण के लिए देश में मजबूत एआई प्रतिभा आधार तैयार करना आवश्यक है। शिक्षण संस्थानों में उद्योग आधारित प्रशिक्षण, एआई केंद्रित शैक्षिक कार्यक्रम और डिजिटल लर्निंग पहल इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों को उभरती एआई तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराने के लिए एआई प्रतिभा कार्यक्रमों, एआई डेटा लैब और उद्योग-अकादमिक साझेदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

इंटेल ने बताया मानवीय तत्परता को निर्णायक

इंटेल की एशिया-प्रशांत और जापान क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सरकारी मामलों की वरिष्ठ निदेशक श्वेता खुराना ने कहा कि एआई अब सहायक उपकरणों से आगे बढ़कर सक्रिय प्रणालियों और भौतिक बुद्धिमत्ता की दिशा में विकसित हो रहा है। इसका असर शिक्षा, रोजगार, कार्यस्थल और उद्योगों पर व्यापक रूप से पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि इस बदलाव में तकनीक के साथ प्रभावी ढंग से काम करने के लिए लोगों में कौशल, अनुकूलनशीलता और विवेक का विकास आवश्यक होगा। उनके अनुसार, एआई कौशल में निवेश आर्थिक अनुकूलन क्षमता बढ़ाने, नए अवसरों का विस्तार करने और तकनीकी संप्रभुता को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।

दो नए एजेंटिक एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

राष्ट्रीय नेतृत्व संवाद का प्रमुख परिणाम एनआईईएलआईटी-इंटेल इंडिया एजेंटिक एआई कौशल पहल का शुभारंभ रहा। इसके तहत दो प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।

1. सभी के लिए एजेंटिक एआई

पहला कार्यक्रम शिक्षार्थियों को वर्कफ्लो ऑटोमेशन, एआई एजेंट और मल्टी-एजेंट सिस्टम की बुनियादी अवधारणाओं से परिचित कराएगा। इसका उद्देश्य उत्पादकता बढ़ाने, व्यावसायिक प्रक्रियाओं में बदलाव लाने और डेटा आधारित बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय लेने में एआई की भूमिका को समझाना है।

कार्यक्रम में नो-कोड प्लेटफॉर्म के माध्यम से एआई आधारित वर्कफ्लो और एजेंटिक सिस्टम तैयार करने तथा उन्हें नियंत्रित करने का व्यावहारिक अनुभव भी शामिल है। इससे गैर-तकनीकी पृष्ठभूमि वाले शिक्षार्थियों के लिए भी एजेंटिक एआई की उपयोगिता को समझना आसान हो सकता है।

2. एजेंटिक एआई सिस्टम का व्यवस्थापन

दूसरा कार्यक्रम एजेंटिक एआई सिस्टम के डिजाइन, निर्माण और तैनाती पर केंद्रित है। इसमें शिक्षार्थियों को नो-कोड और लो-कोड प्लेटफॉर्म के साथ-साथ कोड आधारित फ्रेमवर्क पर भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

प्रशिक्षण में एजेंट आर्किटेक्चर, टूल इंटीग्रेशन, ऑर्केस्ट्रेशन, मेमोरी और डिप्लॉयमेंट जैसे तकनीकी पहलुओं को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे समाधान विकसित करने के लिए आवश्यक कौशल उपलब्ध कराना है जिन्हें बड़े स्तर पर लागू किया जा सके और वास्तविक उत्पादन वातावरण में इस्तेमाल किया जा सके।

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