प्रेम मनुष्य की सबसे सुंदर अनुभूति है, लेकिन केवल प्रेम का एहसास किसी रिश्ते को लंबे समय तक जीवित नहीं रख सकता। हर संबंध को जीवंत बनाए रखने के लिए विश्वास, संवाद और सबसे बढ़कर एक-दूसरे के लिए समय की आवश्यकता होती है। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में यही समय सबसे दुर्लभ होता जा रहा है और यही अभाव अनेक रिश्तों को भीतर ही भीतर खोखला कर रहा है।
आज अधिकांश लोग अपने काम, व्यवसाय, करियर और सामाजिक दायित्वों में इतने व्यस्त हैं कि जीवनसाथी या अपने प्रियजन के साथ बैठकर कुछ पल बिताने का अवसर भी नहीं निकाल पाते। विडंबना यह है कि हम दुनिया से जुड़े रहने के लिए घंटों मोबाइल और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं, लेकिन अपने सबसे करीबी व्यक्ति से दो सुकून भरे शब्द कहने का समय नहीं निकाल पाते। यही संवादहीनता धीरे-धीरे रिश्तों में दूरी, अविश्वास और भावनात्मक खालीपन पैदा करती है।

रिश्तों की सबसे बड़ी आवश्यकता यह नहीं होती कि हर समय कोई महंगा उपहार दिया जाए या बड़े-बड़े वादे किए जाएँ। कई बार दिनभर की थकान के बाद कुछ मिनट साथ बैठकर चाय पी लेना, बिना किसी स्वार्थ के हालचाल पूछ लेना, एक-दूसरे की बात धैर्यपूर्वक सुन लेना या साथ टहल लेना ही प्रेम की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति बन जाता है। समय के ये छोटे-छोटे निवेश जीवनभर की आत्मीयता का आधार बनते हैं।
जब किसी व्यक्ति को बार-बार यह महसूस होने लगता है कि उसके लिए किसी के पास समय नहीं है, तब उसके मन में उपेक्षा का भाव जन्म लेने लगता है। यह भावना धीरे-धीरे शिकायतों, गलतफहमियों और मानसिक दूरी का रूप ले लेती है। अनेक वैवाहिक विवादों और टूटते प्रेम संबंधों की जड़ में आर्थिक अभाव नहीं, बल्कि भावनात्मक उपेक्षा और संवाद का अभाव होता है।
यह आवश्यक नहीं कि हम चौबीसों घंटे अपने साथी के साथ रहें, लेकिन इतना अवश्य आवश्यक है कि प्रतिदिन कुछ समय केवल उसी के लिए सुरक्षित रखें। उस समय में मोबाइल, कार्यालय और अन्य व्यस्तताओं को पीछे छोड़कर केवल रिश्ते को प्राथमिकता दें। यही कुछ पल विश्वास को मजबूत करते हैं और प्रेम को नई ऊर्जा देते हैं।
याद रखिए, प्रेम केवल कह देने से नहीं, बल्कि निभाने से सिद्ध होता है। और प्रेम निभाने का सबसे सरल तथा प्रभावी माध्यम है अपना समय देना। रिश्ते शब्दों से शुरू हो सकते हैं, लेकिन वे समय, संवेदनाओं और संवाद से ही जीवनभर महकते हैं। यदि हम चाहते हैं कि हमारे संबंध मजबूत, मधुर और स्थायी बने रहें, तो हमें अपने प्रियजनों को समय देने की संस्कृति को फिर से अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा। यही समय का उपहार किसी भी रिश्ते का सबसे अनमोल उपहार है।

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पब्लिक इमोशन बिजनौर