शीश झुकाकर नमन करें हम
पूर्वजों की पावन आशीषों को
जिन्होंने दिखलाया जीवन पथ
मिटा के मन की दुविधाओं को
वे केवल अतीत ही नहीं हैं,
हमारी नींव के हैं दृढ़ पत्थर।
उनके दिए शुभ संस्कार हैं
हमारे जीवन के प्रथम अक्षर
ये श्राद्ध नहीं मात्र भोजन का
कृतज्ञता का है उन्हें अर्पण।
उनके गौरवमय आदर्शों का
अंतर्मन में चित्रित है दर्पण।
उनके नाम को जग में हम
अपने सत्कर्मों से बल देंगे।
भूखे को अन्न, प्यासे को जल
और दुर्बल को संबल देंगे !!!


