नई दिल्ली: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) और सैन्य कार्य विभाग के सचिव जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने 8 अक्टूबर को कर्नाटक स्थित कारवार नौसेना बेस में प्रोजेक्ट सीबर्ड के चरण IIA के अंतर्गत निर्मित आवासीय परिसर और महत्वपूर्ण सहायक अवसंरचना का उद्घाटन किया। इन सुविधाओं का उद्देश्य भारतीय नौसेना के कर्मियों, रक्षा नागरिकों और उनके परिवारों के लिए बेहतर आवास तथा आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
इस अवसर पर महानिदेशक सीबर्ड वाइस एडमिरल विवेक दहिया सहित नौसेना और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

नौसेना कर्मियों और उनके परिवारों के लिए नई आवासीय सुविधाएं
ईस्ट ऑफ मंजिल क्रीक (ईओएमसी) और अमादल्ली क्षेत्रों में विकसित आवासीय परिसरों में विभिन्न श्रेणियों के कर्मियों के लिए आवास की व्यवस्था की गई है। इनमें वरिष्ठ नौसैनिकों के विवाहित आवास के लिए 60 इकाइयों वाला एक टावर, नौसेना के रक्षा नागरिक कर्मचारियों के लिए 60 आवासीय इकाइयों वाला एक अन्य टावर और डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स (डीएससी) के 156 कर्मियों के लिए आवासीय परिसर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बच्चों की शिक्षा के लिए एक केजी स्कूल भी बनाया गया है।
इन परियोजनाओं का निर्माण निर्धारित सुविधाओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया है। आवासीय परिसरों का निर्माण हैदराबाद स्थित एनसीसी लिमिटेड ने किया है, जबकि मुख्य बुनियादी ढांचे के निर्माण की जिम्मेदारी सेमिंडिया प्रोजेक्ट्स इंडिया लिमिटेड ने निभाई है।
नई सुविधाओं से नौसेना कर्मियों और उनके परिवारों को बेहतर आवासीय वातावरण मिलने के साथ कारवार नौसेना बेस की प्रशासनिक और परिचालन आवश्यकताओं को भी समर्थन मिलेगा।
प्रोजेक्ट सीबर्ड के विस्तार का महत्वपूर्ण चरण
प्रोजेक्ट सीबर्ड भारतीय नौसेना की प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं में शामिल है। इसके चरण IIA का उद्देश्य कारवार नौसेना बेस की क्षमता का विस्तार करना और यहां जहाजों तथा पनडुब्बियों की तैनाती को बढ़ावा देना है।
इस चरण में दोहरे उपयोग वाले नौसेना वायु स्टेशन, पूर्ण विकसित नौसेना डॉकयार्ड तथा जहाजों और विमानों के लिए आवश्यक रसद सुविधाओं का विकास शामिल है। इन सुविधाओं का विस्तार नौसेना की परिचालन तैयारियों, रखरखाव और सैन्य संसाधनों के प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
परियोजना के पूर्ण होने पर नौसेना बेस में लगभग 10,000 वर्दीधारी और नागरिक कर्मियों के अपने परिवारों के साथ रहने की क्षमता विकसित होगी। इससे कारवार में सैन्य एवं नागरिक आवास की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिल सकता है बढ़ावा
कारवार नौसेना बेस के विस्तार का प्रभाव केवल रक्षा अवसंरचना तक सीमित नहीं रहेगा। परियोजना से जुड़ी निर्माण गतिविधियों, सेवाओं और सहायक सुविधाओं के विकास से उत्तरी कन्नड़ क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
बढ़ती आवासीय और संस्थागत आवश्यकताओं के कारण स्थानीय व्यवसायों, सेवा प्रदाताओं तथा विभिन्न उद्योगों के लिए अवसर विकसित हो सकते हैं। इसके साथ ही निर्माण, रखरखाव और अन्य सहायक क्षेत्रों में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
हालांकि, इन आर्थिक लाभों का वास्तविक स्तर परियोजना के आगे के विकास और उससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर करेगा।
पर्यावरणीय मानकों और स्वदेशी निर्माण पर जोर
प्रोजेक्ट सीबर्ड के अंतर्गत विकसित की जा रही अवसंरचना को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के प्रासंगिक मानकों और भारतीय हरित भवन परिषद (आईजीबीसी) के दिशानिर्देशों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। परियोजना के पूर्ण होने पर इसे आईजीबीसी की गोल्ड रेटिंग प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना में स्वदेशी सामग्री और उपकरणों के उपयोग पर भी जोर दिया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसमें 90 प्रतिशत से अधिक सामग्री और उपकरण स्वदेशी हैं। यह पहल आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा के अनुरूप घरेलू उद्योगों और भारतीय निर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
रक्षा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में कदम
कारवार नौसेना बेस में नई आवासीय सुविधाओं और सहायक अवसंरचना का उद्घाटन प्रोजेक्ट सीबर्ड के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। बेहतर आवास, शैक्षणिक सुविधा और आवश्यक आधारभूत ढांचे की उपलब्धता से नौसेना कर्मियों तथा उनके परिवारों को सहायता मिलेगी, जबकि व्यापक परियोजना से बेस की परिचालन क्षमता को मजबूत करने में योगदान मिलने की उम्मीद है।