रहे जूझते तमस से, कभी न हारे दीप।
भटके राही के सदा, बने सहारे दीप।।
खुशियाँ नाचें देहरी, धर कर रूप नवीन।
बजा रहे शहनाइयाँ, जग के सारे दीप।।
अंधकार डर कर भगे, देख सुनहरी ज्योति।
ढोल बजा कर हँस पड़े, प्रमुदित प्यारे दीप।
साहस भरते हृदय में, निर्जन कानन बीच।
सघन अँधेरी रात में, झिलमिल तारे दीप।।
तमस हमेशा हारता, जीते नवल प्रकाश।
पाहुन का स्वागत करें, सज्जित द्वारे दीप।।
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