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शक्ति स्वरूपा

नारी शक्ति, साहस और स्वाभिमान पर आधारित प्रेरक काव्य, जिसमें दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती और लक्ष्मीबाई के…

उठो जगत जननी नारी तुम…

नारी शक्ति, समानता और राष्ट्र निर्माण पर आधारित प्रेरक कविता—महिलाओं के साहस, ममता, नेतृत्व और भारत…

होली के रंग और जीवन के प्रसंग

रंगन के त्योहार में मचा रहे सब भंग । करनी अपनी देख के, काहे तुम हो…

लड़ते रहे अभावों से

संघर्ष, स्वाभिमान और साधना पर आधारित प्रेरक कविता, जो अभावों से जूझकर सफलता, उजाला और आत्मबल…

संस्कार की AI

संस्कार आधारित AI की कल्पना पर कविता, जो बच्चों को शिक्षा, स्वच्छता, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण…

लेकठो बनी विद्रोह की ज्वाला

पतरातू की घाटी में बच्चों की अनोखी क्रांति! मिठाई वाले काका के लेकठो इनाम से शुरू…

कान्हा का जन्म उत्सव

था उस दिन कान्हा का जन्म उत्सवपूरा जग नाच रहा थाबादल गरज रहे थेअमृत बरसा रहे…

‘गुरुओं का मान-सम्मान कहीं खो गया है ।’

गुरुओं का मान-सम्मान,कहीं खो गया है ।गुरु तो बचपन से ही मिल जाती,माँ के रूप में,…

पहली कविता: सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”

मैं जब सन् 1983 में कक्षा ग्यारहवीं स्कूल लाल बहादुर शास्त्री हायर सेकेंडरी बिलासपुर में पढ़…

योग, भाव है या भक्ति ? 

योग और भक्ति के अद्भुत संगम से पाएँ निरोगी काया, शुद्ध मन और परमात्मा की झलक—यही…

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