प्यासे खेत, मौन महारथी, जलती शमा—यह कविता सत्ता, अन्याय और सामाजिक विषमताओं पर करारा प्रहार करती…
Category: कविता
बांट रहे समाज को
समाज बंट रहा, संकट में धैर्यवान माताएं, जल-जंगल संकट, गंगा-यमुना मैली, पर स्वच्छता के वीर भी…
सुख संतुष्टि शांति शुभ
सुख, संतुष्टि व शांति से भरपूर जीवन के लिए राम-सीता का सुमिरन करें, कथा-भजन सुनें व…
समता मधुरस घोल
समता और मधुरता का संचार करें, मन की आँखें खोलें। परहित में जीवन अर्पित करें, क्योंकि…
होगी निश्चित भोर
"होगी निश्चित भोर, मन के अंदर शोर कबीरा" – जीवन, प्रेम, संघर्ष और समाधान पर आधारित…
टीचर जी: प्रमोद दीक्षित मलय
यह कविता शिक्षक जी के अनुशासन, मेहनत और बच्चों के प्रति समर्पण को दर्शाती है। वे…
सुनो शिक्षको : प्रमोद दीक्षित मलय
सुनो शिक्षको ध्यान से सुनो बच्चों के पास जाने से पहले फेफड़ों से निकाल फेकों ठहरा…
उसे कुछ नहीं आता: प्रमोद दीक्षित मलय
शिक्षक, सहपाठी और बच्चे, सभी कहते हैं, उसे कुछ भी नहीं आता, नहीं सीखना है उसे…