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 वेष नहीं, गुणों से पहचाने जाते हैं संत

इस समय भारतीय समाज में एक अलग तरह की बहस छिड़ गयी है जिसमें असली संत…

रिश्तों को फिर से रंगने का पर्व है होली

फाल्गुन की बयार जब हवा में घुलती है तो केवल अबीर-गुलाल ही नहीं उड़ते, मन के…

तकनीकी दावों की पारदर्शिता पर उठते सवाल

देश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और आधुनिक तकनीक को लेकर लगातार नए दावे किए जा रहे…

अतिथि बनकर जाएं तो न दिखाएं नखरे

भारतीय संस्कृति में “अतिथि देवो भवः” केवल एक कहावत नहीं, बल्कि जीवन-मूल्य है। हमारे यहाँ अतिथि…

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस: भाषाई अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान का उत्सव

हर वर्ष 21 फरवरी को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस विश्वभर में भाषाई विविध्ता, सांस्कृतिक…

संस्कारों की धरोहर: बच्चों का नहीं, हमारी परवरिश का आईना

आज अक्सर सुनने को मिलता है “आजकल के बच्चों में संस्कार नहीं रहे।” यह वाक्य हम…

महाशिवरात्रि: अंधकार से आत्मबोध तक की शिव-यात्रा

सनातन चेतना में महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण की दिव्य रात्रि…

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