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गंदी सोच का चश्मा

मिश्रीलाल पंवार
जोधपुर इकाई, महा सचिव, जर्नलिस्ट एसोसिएशन आफ राजस्थान
मानव अधिकार सेवा संघ राष्ट्रीय सेन्टर कमेटी सदस्य

रामनाथजी बरामदे में बैठे धूप का आनन्द ले रहे थे। आज सर्दी कुछ ज्यादा ही थी। इतने में पड़ोसी रतनलाल आ पहुंचे। उन्होंने कहा,” क्या हो रहा है  राम जी?”

पड़ोसी रतनलाल को अचानक सामने देख कर रामनाथजी बोले, “आज आप इस समय यहां कैसे? नौकरी पर नहीं गए क्या?”

“नहीं जी, कहां गया। आज सर्दी कुछ ज्यादा ही है। इस लिए छुट्टी ले ली। सोचता हूं क्लब हो आऊं। थोड़ा मूड चैन्ज हो जाएगा। आप भी चलिए ना। थोड़ी देर में वापस आ जाएंगे।”

कुछ सोच कर रामनाथजी ने हामी भर ली। 

दोनों क्लब पहुंचे।  बार में बैठे बैठे दोनों ने एक एक पैग लगाया ही था कि रामनाथजी बोले, “चलो भाई रतनलाल। आज कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा। भीतर बहुत बैचेनी सी है। लगता है कुछ अनर्थ होने वाला है।”

“ऐसा क्यों लग रहा है?” रतनलाल ने घबराकर पूछा।

“पता नहीं। मन  में बहुत बैचेनी है। चलो,वापस घर चलते हैं।”

“ठीक है,चलो।”

दोनों मित्र लाॅन में पहुंचे तो देखा कि वहां कुछ बच्चे खेल रहे हैं। एक पांच वर्षीय बच्ची भी उन बच्चों के साथ खेल रही थी। रामनाथजी उस बच्ची को देख कर ठिठक गए। उन्होंने कहा, “रतनलाल, इस बच्ची को देखा। सैम टू सैम मेरी परी जैसी है। मेरी परी भी इसी उम्र में रही होगी,जब निमोनिया बिगड़ने से उसकी मौत हो गई थी।” 

रतनलाल ने उस बच्ची को देखा तो बोले, “हां यार। यह तो तुम्हारी परी ही लग रही है। बहुत प्यारी बच्ची है।”

रामनाथजी ने रतनलाल की तरफ देख कर कहा, “इस बच्ची का लाड करने का मन कर रहा है। तूं रुक, मैं इसका लाड करके आता हूं।”

रतनलाल कुछ कहते,उससे पहले ही रामनाथजी ने बच्ची को गोद में उठा कर माथा चूम लिया। रामनाथजी के गोद में उठाते ही बच्ची डर गई।वह जोर से चीख पड़ी। वहां मौजूद लोगों ने बच्ची को रोते देखा तो दौड़ कर आए। शोर सुनकर बच्ची के घर वाले भी दौड़े आए। मां ने बच्ची को रामनाथजी की गोद से लेकर अपने सीने से लगा लिया। सब ने पूछा कि क्या हुआ तो बच्ची ने रामनाथजी की तरफ हाथ से इशारा कर दिया। इतनी देर में वहां भीड़ जुट गई।

किसी ने रामनाथजी को पीटना शुरू कर दिया। क्लब के सुरक्षाकर्मियों ने रामनाथजी को लोगों से छुड़ा कर एक कमरे में बन्द कर दिया। पुलिस को सूचना दे दी गई।

रतनलाल की समझ में नहीं आया कि यकायक यह क्या हो गया। उन्होंने लोगों को समझाने की कोशिश की। मगर उनकी किसी ने नही सुनी। कुछ देर बाद पुलिस क्लब पहुंची और रामनाथजी को थाने ले गई। बच्ची के घरवाले भी थाने पहुंचे। उन्होंने दुष्कर्म प्रयास का मामला दर्ज करवा दिया। दीनानाथ जी पर पौक्सो का केस बन गया। वृद्धावस्था में जेल की हवा खानी पड़ गई। घर परिवार की प्रतिष्ठा पल भर में धूल हो गई। सलाखों के पीछे  बैठ बैठे वे सोचने लगे कि ये कैसा जमाने आया है। बच्चों से प्यार करना भी गुनाह हो गया है। समाज के ठेकेदारों ने  सिर्फ और सिर्फ गंदी सोच का चश्मा क्यों पहन रखा है ?

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