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छत्रपति ताराराणी भोसले साहेब समाधी को संरक्षित कर राष्ट्रीय स्मारक का स्थान प्राप्त हो

महेंद्रसिंह राठौड़

 जयपुर: महाराणी श्री छत्रपती ताराराणी भोसले साहेब समाधी को राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक स्थल का दर्जा प्राप्त हो और स्मारक का ठीक से रख रखाव हो इस हेतु राष्ट्रीय  क्षत्रिय जनसंसद राष्ट्रीय क्षत्रिय जन संसद के सभापति महेश पाटिल बेनाडिकर और राजस्थान के र्गवनिंग काउंसिल संसद सदस्य. महेंद्रसिंह राठौड़ की मांग है की महारानी तारारानी के समाधी स्थल का पुनरोद्धार कर उसे राष्टीय स्मारक घोषित किया जाए. एक पत्र के माध्यम से मा.श्रीमंत वसुंधरा राजे सिंधिया ने मांग की है कि, श्री छत्रपती शिवाजी महाराज के निधन के बाद तथा श्री छत्रपती संभाजी महाराज सा.के क्रुरतापुर्वक हत्या के उपरांत औरंगजेब के हाथो तुटने से  स्वराज की लौ को अगर जिंदा जिसने रखा था,तो वो सर सेनापति हबीबराव मोहिते सा. की पुत्री और हम सब के लिए देव स्वरूप श्री छत्रपति शिवाजी महाराज की पुत्रवधू महाराणी ताराबाई.. ही थी। जब वर्ष 1700 ते 1707 तक दिल्ली बादशाहा औरंगजेब स्वराज्य नष्ट करने हेतू दख्खन पर आया,तो उसके सामने थी,मराठा वीरांगना ताराबाई….!

          अपने पति श्री छत्रपती राजाराम महाराज के मृत्यु के बाद उन्होंने 25 वर्ष की उम्र में ही स्वराज्य की भागदोर संभाली ।बिखरता और छिन्न-भिन्न होते स्वराज्य के बिखरे मोती को आपने जोडकर मालवा,गुजरात, कर्नाटक प्रांत को भी अपनी बहादुरी-समझ और राजनीति चतुराई से कब्जे में लिये।तथा  औरंगजेब को एक महिला होकर भी जबरदस्त आपने-सामने की टक्कर दी।उसको इसी मिठ्ठी में  मिला दिया।और भारत के समस्त स्त्रीशक्ती की प्रेरणास्रोत बन गए।

 किंतु दुःखत बात यह है,कि ऐसी महान,-महान वीरांगना की समाधी आज (सगम माहुली सातारा) बुरी हालत के साथ- साथ क्षतिग्रस्त की कगार पर पहुँच गई है। महेश पाटिल बेनाडिकर का कहना है कि हमको लगता है,कि वर्तमान में राष्ट्रीय परिदृष्य को देखते हुए मराठा शिंदे वंश से आपका जुडाव और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय  तौर पर आप एक जाना-पहचाना नाम होने के साथ एक बड़ी  महिला हस्ती है। वंश (शिंदे) आपका और यह दायित्व- कर्तव्य,जिम्मेदारी हमारी है,इस तातपर्य से,महान वीरांगना महाराणी ताराबाई जी के समाधी स्थल का जिर्णोद्धार हो। और उस स्थल को राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक का दर्जा प्राप्त हो।

 जिस प्रकार स्वराज की नींव श्री छत्रपति शिवाजी महाराज ने रखी।उसी तरह स्वराज के शिखर का कार्य ‘सिंधिया’ परिवार ने किया।इतिहास हमे बताता है,कि *श्रीमंत राणोजी सिंधिया* से लेकर पानीपत युद्व के महादजी सिंधिया जी का नाम इतिहास में सुवर्ण अक्षरों में लिखा है,और सदैव रहेगा।हमे गर्व है,कि आप उसी परिवार का एक हिस्सा है।आपने देश के भीतर ही नही अपितु भारत देश के बहार भी अपनी अलग एक पहचान कायम की है। अतः *श्रीमंत सिंधिया महाराणी* से इन्ही भावनाओं व आशा के साथ स विनती से आग्रह,की इस कार्य को जल्द से जल्द अमल में लाकर इस पवित्र कार्य को पूण कर राष्ट्र को समर्पित करे।

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