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संभाग के सबसे बड़े हॉस्पिटल सिम्स में करीब पचास एसी के कॉपर वायर चोरी- घटना पर प्रबंधन गंभीर नहीं, मरीज हो रहे हलाकान  

– सुरेश सिंह बैस

बिलासपुर । संभाग के सबसे बड़े अस्पताल सिम्स की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। यद्यपि हालत सुधारने के काफी प्रयास माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा किया जा रहा है  न्यायालय की नजर सिम्स की एक एक गतिविधियों पर है। बावजूद इसके करामातियों ने नया कारनामा कर दिया है। प्रबंधन की नाक के नीचे से आईसीयू मेल वार्ड तीन में लगे करीब पचास एसी का कापर वायर पार कर दिया है। मामला करीब ग्यारह दिन पुराना है। लेकिन आज तक मरीज और परिजन 42 डिग्री पारा में झुलसने को मजबूर हैं। बहरहाल सोमवार को टीएल बैठक में कलेक्टर अवनीश शरण के फटकार के बाद प्रबंधन की बैचैनी बढ़ गयी है। बावजूद इसके प्रबंधन ने अभी तक चिन्हित चोरों के खिलाफ अपराध दर्ज नहीं किया है। जानकारी देते चलें कि सिम्स इस समय हाईकोर्ट और कलेक्टर के निगरानी में है। बावजूद इसके सिम्स के साथ मरीजों और परिजनों का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा है। सिम्स में तीसरे फ्लोर स्थित आईसीयू के मेल वार्ड तीन के ब्यालिस एसी का कॉपर वायर चोरी हो गया है। पिछले दस दिनों से कोई भी एसी नहीं चल रहा है। उल्लेखनीय बात है कि अभी तक किसी एसी का कवर भी भी नहीं निकला है। ऐसी नई एसी के कॉपर वायर चोरी हो गये हैं । इसके चलते आईसीयू की हालत बद से बदतर स्थित में है। मरीजों को हाथ पंखों से गर्म हवा दी जा रही है। इसके चलते बाहर के 42 डिग्री पारा से कही अधिक आईसीयू का पारा बढ़ गया है। आईसीयू में इलाज करा रहे मरीज और डॉक्टर पसीने पसीने हैं। 42 डिग्री पारा के बीच परिजन सिम्स के कारिडोर में अपने हाथों पंखा झलने को लाचार हैं।

याद होगा कोरोना काल के दौरान सिम्स स्थित आईसीयू मेल वार्ड तीन का निर्माण किया गया है। हाल ही में मरीजों के लिए तत्कालीन सरकार ने नये वार्ड में कुल 42 एसी लगवाया है। कई एसी का अभी तक कवर भी नहीं उतरा है। लेकिन लगता है कि प्रबंधन के ही लोगों ने वार्ड में लगे 42 एसी का कॉपर वायर पार कर दिया है। जिसके चलते सभी एसी पिछले दस दिनों से बन्द हैं।

नाम नहीं छापने की सूरत में सिम्स से संबंधित एक व्यक्ति ने बताया कि एसी नहीं चल रही है। इसकी सूचना‌ प्रबंधन को है। बावजूद इसके ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यह बातें संदिग्ध हो जाती हैं। आईसीयू में क्षमता से अधिक मरीज हैं। सभी को केवल पंखे के सहारे 42 डिग्री पारा का सामना करना पड़ रहा है। परिजनों की हालत भी बीमारों जैसी है। जूनियार डाक्टर भी ऐसी स्थिति में काम करने को मजबूर हैं। सीनियर डाक्टर कुछ पलों के लिए आते हैं। इसके बाद कब आएँगे उनकी मर्जी पर है।

विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन सोमवार को टीएल बैठक में कलेक्टर ने प्रबंधन को जमकर फटाकार लगाई है। उन्होने कहा कि हम खुद सिम्स का‌ निरिक्षण करेंगे। बैठक के बाद सिम्स के अधिकारी बेचैन हैं। उन्होने तत्काल एसी को सुधारने का आदेश दिया है।

 टीएल बैठक में कलेक्टर अवनीश शरण ने सिम्स प्रबंधन और डीन को जमकर फटकारा है। उन्होने कहा कि घर की ऐसी का कापर वायर क्यों चोरी नहीं होता। सिम्स में ही क्यों चोरी हो रहा है? सवाल उठता है कि हमेशा भीड़भाड़ वाले अस्पताल से 42 एसी का कापर वायर कैसे चोरी हो गया। कलेक्टर ने कहा मैं शीघ्र सिम्स पहुंच रहा हूं। इसके अलावा कलेक्टर ने तत्काल एसी ठीक करने को कहा है। इस दौरान डीन ने संविदा कर्मचारियों की तरफ कापर वायर चोरी का अंदेशा जाहिर किया।

टीएल बैठक में कलेक्टर की फटकार और निरीक्षण की बात को लेकर सिम्स प्रबंधन में हलचल मच गयी है। मजेदार बात यह है कि ना केवल मेल वार्ड तीन का बल्कि अन्य वार्डों के भी एसी नहीं चल रहे हैं। जिसको लेकर डीन और प्रबंधन बेचैन हो गया है।

बहरहाल मरीज अपनी बीमारी से बचे या न बचे। लेकिन आईसीयू में भीषण गर्मी से बचना मुश्किल है। मरीज के साथ पहुंची एक महिला ने बताया कि तीन दिन से परेशान हूं। पति की हालत बहुत गंभीर है। ऊपर से गर्मी से पति की हालत बहुत ही खराब हो रही है। अपने साथ उनका भी पसीना पोछती रहती हूं। रात को नींद भी नहीं आती है। ऐसे हालात में जिनके पास पैसा था वे लोग सिम्स छोड़कर कहीं दूसरे जगह चले गए हैं।

ज्ञात हो कि हाईकोर्ट की सिम्स पर लगातार नजर है। कलेक्टर भी निगरानी करते हैं। बावजूद इसके करीब पचास एसी का कापर वायर का चोरी होना.. सोचने वाली बात है….?क्या हाईकोर्ट इस बात को संज्ञान में लेगा। या फिर प्रबंधन कलेक्टर के कोप से कैसे बचता है.. देखने वाली बात होगी।

मामले में सिम्स के डीन ने बताया कि फिलहाल मरम्मत का ठेका अभी नहीं हुआ है। इसलिए एसी की मरम्मत हम बजट से करेंगे। कॉपर वायर की चोरी हुई है। हम पता लगाएंगे किसनी चोरी की है। लेकिन एफआईआर दर्ज हुआ या नहीं के सवाल पर डीन ने कोई जवाब नहीं दिया।

सुरेश सिंह बैस "शाश्वत"
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