NEW English Version

संस्कृत की पुत्री है हिन्दी: प्रो. बिहारी लाल शर्मा

21 विभूतियों को ‘काशीरत्न’ एवं ‘शान-ए-काशी’ से किया गया अलंकृत

वाराणसी: सभी भाषाओं की जननी संस्कृत है और इन भाषाओं में हिन्दी सर्वोच्च भाषा है। भाषायें एक दूसरे से जोडने का माध्यम है। सभी भाषायें आदरणीय है। उक्त बातें बुधवार को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के पाणिनी सभागार में इण्डियन एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट (आईएजे) व सामाजिक विज्ञान विभाग, के संयुक्त तत्वावधान में हिन्दी पत्रकारिता दिवस के पूर्व संध्या पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी “राष्ट्र के विकास में हिन्दी का योगदान” की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा। उन्होंने हिन्दी को संस्कृत की पुत्री बताते हुए कहा कि जिन देशों ने अपनी भाषा में काम किया वह आज बहुत आगे हैं। प्रत्येक देश को अपनी मातृ-भाषा का विकास करना चाहिये। उन्होंने पत्रकारों को कलम का सिपाही बताते हुए कहा की वह कागज़ की तलवार से बुराईयों को काट देता है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गोपाल जी राय, माध्यम अधिकारी, केन्द्रीय संचार ब्यूरो, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली, ने कहा कि आज हिन्दी का विकास तेजी हो रहा है, सरकार भी इसको आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है। वर्तमान समय में सरकारी आदेश भी हिन्दी में आने लगे। अब तो दवाईयों का नाम भी हिन्दी में लिखकर आने लगा है। कार्यक्रम का शुभारम्भ आगन्तुक अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन कर किया गया। तत्पश्चात राम नरेश जी द्वारा मंगलाचरण किया गया। इसके साथ ही 29वाँ दृष्टि पत्रिका, रिश्तों का एहसास, तथा प्रणाम पर्यटन का लोकार्पण किया गया। कवियों ने

काव्यपाठ कर कविता के माध्यम से एक जून को होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए मतदान की अपील किया। सामाजिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राजनाथ ने स्वागत भाषण किया। विषय प्रवर्तन प्रो.शैलेश कुमार मिश्र ने एवं संचालन डॉ.कैलाश सिंह विकास व चक्रवर्ती विजय नावड़ एवं धन्यवाद प्रकाश सत्य नारायण द्विवेदी ने किया। कार्यक्रम के संयोजक मोती लाल गुप्ता थे।

राष्ट्रीय अलंकरण काशीरत्न 2024 से अलंकृत:

  • प्रो. बिहारी लाल शर्मा (शिक्षा सेवा)
  • श्रीमती बिन्दू सिंह (समाजसेवा)
  • प्रो. जितेन्द्र कुमार (पर्यावरण व समाजसेवा)
  • ज्ञान सिंह रौतेला (पत्रकारिता सेवा)
  • श्रीमती विजेता सचदेवा (समाजसेवा)
  • गोपाल नारायण मिश्र एड. (विधि सेवा)
  • डॉ. शुभ्रा वर्मा (थियेटर आटर्ससेवा)
  • डॉ. कवि नारायणइन्द्रदेव (पत्रकारिता सेवा)
  • शुभम कुमार सेठ (शिक्षा व समाजसेवा)
  • डॉ. सुशील कुमार (समाजसेवा)
  • श्रीमती शिल्पी सिंह (कम्प्युटर प्रबन्धन सेवा)
  • अजय कुमार सिंह एड. (विधि सेवा)
  • अभिषेक कुमार राय (आई.टी. प्रबंधन सेवा)

राष्ट्रीय अलंकरण “शान-ए-काशी” 2024 से अलंकृत:

  • श्रीमती गीता राय (शिक्षासेवा)
  • डॉ. विनोद चतुर्वेदी (शिक्षासेवा)
  • दिलीप कुमार श्रीवास्तव (शिक्षा व समाजसेवा)
  • श्रीमती मंजू सिंह (समाजसेवा)
  • महेन्द्रनाथ तिवारी अलंकार (साहित्यसेवा)
  • श्रीमती मुदिता गोस्वामी (शिक्षासेवा)
  • संदीप कुमार यादव (समाजसेवा)
  • श्रीमती (शिक्षासेवा) अर्चना जायसवाल
  • 21 विभूतियों को शॉल स्मृतिचिन्ह रूद्राक्षमाला प्रमाण-पत्र देकर मुख्य अतिथि गोपाल जी राय ने अलंकृत किया। दृष्टि के सम्पादक डॉ. नितेश कुमार गुप्ता, रिश्तों का एहसास के सम्पादक राम नरेश नरेश व प्रणाम पर्यटन के सम्पादक प्रदीप श्रीवास्तव है।

समारोह में सत्य नारायण द्विवेदी, डॉ. ओम प्रकाश शर्मा, कोमल सिंह, डॉ. आनन्द पाल राय, जियाउद्दीन फारूकी, डॉ. जी शिवांगी, अर्जुन सिंह, मो. दाउद, आर्शीवाद सिंह, आनन्द कुमार सिंह, डॉ. राहुल सिंह, डॉ. हर्षवर्धन राय, डॉ. रूद्रानन्द तिवारी, डॉ. राधेश्याम दीक्षित, डॉ. जगमोहन शर्मा, मोती लाल गुप्ता, अरविन्द कुमार विश्वकर्मा, जफरूद्दीन फारूकी, विनय कुमार श्रीवास्तव, विक्की वर्मा, राजू वर्मा, अमित कुमार पाण्डेय, प्रकाश आचार्य सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।


Advertisement:

Book Showcase

Best Selling Books

Shri Durgasaptashati Sachitra

By Gorakhpur Gita Press

₹100

Book 2 Cover

Stop Letting Everything Affect You

By Daniel Chidiac

₹190

Truth without apology

By Acharya Prashant

₹240

30 Days to Better English

By Norman Lewis

₹199

Translate »