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देश की विविधता में एकता का अनूठा प्रदर्शन

रैंप पर परंपरागत परिधानों में दिखे एम्प्लॉयीज़

इंदौर: देश के हर राज्य की अपनी संस्कृति है, अपनी परंपरा, अपना पहनावा, अपनी भाषा और रहने के अपने तौर-तरीके हैं। यही अनूठापन हमारे देश को दुनिया के सबसे सुंदर देशों में से एक बनाता है। भारत का हर राज्य अपनी खासियतों के लिए जाना जाता है। हर राज्य की अपनी अलग संस्कृति होते हुए भी, हम सभी एकता के सूत्र में बंधे हुए हैं। यही विविधता हमें मजबूत बनाती है और हमें एक दूसरे से जोड़ती है। महज़ कुछ दूरी तय करने के बाद एक नई संस्कृति और उसकी अद्वितीय परम्पराओं से रूबरू होने का मौका और किसी देश में कहाँ मिलता है? जो बात हमारे भारत देश में है, वह इस दुनिया में कहीं नहीं.. 

यह बताने और भारत की सांस्कृतिक धरोहर को शानदार तरीके से प्रस्तुत करते हुए, इंदौर स्थित देश की जानी-मानी पीआर कंपनी के वार्षिक उत्सव ‘उड़ान 2025’ में विभिन्न राज्यों की वेशभूषा में आकर्षक रैम्प प्रस्तुति दी गई। इस इवेंट में देश के दस जीवंत राज्यों- मेघालय, मिजोरम, असम, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, सिक्किम, गोवा, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की संस्कृति और परंपराओं का बेजोड़ प्रदर्शन देखते ही बना। इस शानदार प्रस्तुति ने सभी दर्शकों का मन मोह लिया और सभी ने भारतीय संस्कृति की विविधता और अद्भुत सौंदर्य को खुलकर सराहा।

प्रस्तुति में गोवा राज्य के परिधान में दिखे *इकबाल पटेल, सीनियर मैनेजर, ग्राफिक्स और डिज़ाइनिंग ने कहा, “भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। इस प्रस्तुति के माध्यम से हम यही संदेश देना चाहते थे कि जब हम अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं, तो हम न सिर्फ अपनी पहचान को संजो सकते हैं, बल्कि दूसरों को भी अपने देश के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। उड़ान 2025 की इस प्रस्तुति के माध्यम से हमने अपने देश की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करने का प्रयास किया है।” 

मेघालय के परिधान में प्रस्तुति देने वालीं *सुरभि चौरसिया, सीनियर मैनेजर, कॉन्टेंट राइटिंग, ने कहा, “हम दुनिया के सबसे खूबसूरत देश में रहते हैं, जहाँ एक नहीं, बल्कि हजारों संस्कृतियाँ अरसों से इसका मान बढ़ा रही हैं। यही हमारी पहचान है और हमें हमेशा इसे संजोकर रखने पर ध्यान देना चाहिए। काम के सिलसिले में हम कई राज्यों की मीडिया आदि से हमेशा ही जुड़े रहते हैं, लेकिन हम दिल से भी उनके साथ हैं, यह प्रस्तुति इस बात की जीती-जागती मिसाल है। हम न सिर्फ प्रोफेशनल रूप से, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी साथ मिलकर आगे बढ़ रहे हैं।”

इवेंट में मेघालय के पारंपरिक परिधान और फूलों की खुशबू, मिजोरम की रंग-बिरंगी पोशाकें और संगीत, असम की प्रसिद्ध रेशम की साड़ी और बिहू नृत्य, अरुणाचल प्रदेश की आदिवासी परंपरा, छत्तीसगढ़ के आदिवासी नृत्य और पहनावे, उत्तराखंड की पहाड़ी संस्कृति, सिक्किम की तिब्बती-नेपाली मिश्रित संस्कृति, गोवा की कोंकणी जीवनशैली, हरियाणा की धाकड़ धरोहर और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी अंदाज़ ने मंच पर चार चाँद लगा दिए।

एम्प्लॉयीज़ की दमदार प्रस्तुति ने इस बात को बखूबी प्रदर्शित किया कि भारतीय संस्कृति कितनी जीवंत और विविधतापूर्ण है। इस प्रस्तुति से विविधता में एकता के सिद्धांत का उत्कृष्ट उदाहरण दिखाई देता है। एक साझा मंच पर देश की विभिन्न संस्कृतियों का बेजोड़ मेल इस बात का प्रतीक रहा कि भले ही हमारी भाषाएँ, परंपराएँ और पोशाकें अलग हों, लेकिन हमारी आत्मा एक ही है ‘भारतीय’।

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