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श्रीदायिनी फाउंडेशन और यूएसएबीएफ ने भारत के आर्थिक भविष्य के लिए 1 ट्रिलियन डॉलर के विदेशी निवेश योजना की शुरुआत की

नई दिल्ली: श्रीदायिनी फाउंडेशन, जो भारत के प्रमुख गैर-लाभकारी संगठनों में से एक है, युवाओं को मजबूत बनाने और छोटे-बड़े व्यापार को बढ़ावा देने के लिए काम करता है। इसने यूएस एशिया ग्लोबल बिजनेस फोरम (यूएसएबीएफ) के साथ मिलकर, नई दिल्ली के द ललित होटल में भारत का पहला आर्थिक विकास सम्मेलन 2025 (IEGC) आयोजित किया। इस कार्यक्रम में 300 से अधिक लोग शामिल हुए, जिनमें राजदूत, नीति बनाने वाले लोग, निवेशक और सरकारी अधिकारी थे। इसका मकसद भारत के 23 क्षेत्रों में 1 ट्रिलियन डॉलर का विदेशी निवेश लाने की योजना बनाना था। श्रीदायिनी फाउंडेशन का लक्ष्य इसे चरणों में पूरा करना है। इस सम्मेलन ने “समृद्ध भारत, समृद्ध विश्व” नामक योजना के लिए रास्ता तैयार किया, जो भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और उसे एक वैश्विक आर्थिक ताकत के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम करेगा।

कार्यक्रम में भारत में निवेश की बड़ी संभावनाओं पर चर्चा की गई। प्रतिनिधियों ने इन्फ्रास्ट्रक्चर, नई ऊर्जा, आईटी, स्वास्थ्य सेवाएं और खेती जैसे क्षेत्रों में निवेश की बात की। इस सम्मेलन में स्विट्जरलैंड, अमेरिका, इजरायल, सिंगापुर और यूएई से आए राजदूतों, सरकारी अधिकारियों और निवेशकों ने हिस्सा लिया। श्रीदायिनी फाउंडेशन भारत में रोजगार के लिए ठोस योजना बना रहा है। कार्यक्रम में सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी बढ़ाने के लिए साझा काम की भी बात हुई। साथ ही, युवाओं और महिलाओं को पढ़ाई, ट्रेनिंग और रोजगार के ज़रिए मजबूत बनाने के लिए कई योजनाओं की घोषणा की गई।

इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा हिस्सा 1 ट्रिलियन डॉलर की विदेशी निवेश योजना तैयार करना था। श्रीदायिनी फाउंडेशन ने निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने और ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम और समयसीमा तय की हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। इस प्रक्रिया में प्रोजैक्ट की जाँच,इन्वेस्टर की कन्फर्मेशन और इन्वेस्टमेंट के समझौते पर दस्तखत शामिल हैं।

श्रीदायिनी फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री हरिओम अग्निहोत्री ने कहा, “भारत का आर्थिक माहौल तेजी से बदल रहा है, और इस सम्मेलन ने हमें 1 ट्रिलियन डॉलर के विदेशी निवेश के लक्ष्य की ओर एक मजबूत शुरुआत दी है। यह भारत और दुनिया के लिए एक खास क्षण है।” भारत में 2022-23 में एफडीआई (विदेशी निवेश) का बहाव 84.8 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिससे भारत की स्थिति दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूत हुई और यह वैश्विक निवेशकों के लिए एक प्रमुख स्थान बन गया। सम्मेलन ने यह बताया कि सही निवेशों से भारत के आर्थिक विकास को तेजी से बढ़ाया जा सकता है, जिससे देश नवाचार और स्थिरता में एक नेता बन सकता है।”

सम्मेलन ने भारत की “फाइनेंशियल” तरक्की और इनोवैशन में  भारत के लीडर बनने की क्षमता को सामने रखा। यूएसएबीएफ के अध्यक्ष श्री केविन कौल ने कहा, “भारत की छुपी हुई क्षमता और इसकी जनसंख्या का लाभ इसे 21वीं सदी के लिए सबसे बेहतरीन निवेश स्थल बनाता है। आज जो साझेदारियाँ बनाई गई हैं, वे एक समृद्ध और आपस में जुड़ी हुई वैश्विक भविष्य को आकार देंगी।”। श्रीदायिनी फाउंडेशन ने सभी से इस योजना में शामिल होने की अपील की है, ताकि हम एक समृद्ध और मजबूत वैश्विक अर्थव्यवस्था बना सकें।”

कार्यक्रम का समापन “समृद्ध भारत, समृद्ध विश्व” योजना की घोषणा के साथ हुआ। यह पहल दुनिया भर से निवेश आकर्षित करने के लिए एक अहम कदम साबित होगी, साथ ही यह स्थिरता के वैश्विक लक्ष्यों को पूरा करने और सभी को साथ लेकर विकास बढ़ाने में मदद करेगी। यह सम्मेलन एक अहम पड़ाव है क्योंकि श्रीदायिनी ने आधिकारिक रूप से अपनी सोच और उद्देश्य प्रस्तुत किया है, जिसका लक्ष्य भारत के विकास पर स्थायी असर डालना है। वे सभी से अपील करते हैं कि इस प्रयास में हमारा साथ दें ताकि हम एक मजबूत और समृद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था बना सकें।

मुस्कान सिंह

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