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दुनिया को शांति के लिये एकसूत्र में पिरोने का महा-अनुष्ठान

-विश्व णमोकार मंत्र दिवस – 09 अप्रैल, 2025-

महावीर जयन्ती से ठीक एक दिन पूर्व 9 अप्रैल 2025 को विश्व णमोकार मंत्र दिवस को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया जा रहा है और एक विश्व, एक दिन और एक पवित्र महामंत्र और उसका पवित्र उच्चारण प्रातः 8:01 से लेकर 9:36 बजे तक, एक साथ पूरे भूमंडल पर व्याप्त होकर एक उजाला बिखेरेगा। यह आयोजन विश्व शांति, आत्मशांति, सद्भावना और आध्यात्मिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन जीतो संस्था के द्वारा कराया जा रहा है़। दिल्ली में नौ अप्रैल को विज्ञान भवन में इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। यह आयोजन 180 देश के लाखों भक्तों की भागीदारी, विश्व भर में 100 मेगा इवेंट्स, 6000 से अधिक मंदिरों एवं अन्य स्थलों में एक जातीय बंधनों को तोड़कर सभी समुदाय, जाति, वर्ग के लोगों को सम्मिलित होने का अवसर देकर एक प्रेरणादीप बनेगा, जहां मैत्री के फूल खिलेंगे, शांति एवं सद्भावना की ज्योति रश्मियां जगमगायेगी।

मानव ने ज्ञान-विज्ञान में आश्चर्यजनक प्रगति की है। परन्तु अपने और औरों के जीवन के प्रति सम्मान में कमी आई है। विचार-क्रान्तियां बहुत हुईं, किन्तु आचार-स्तर पर क्रान्तिकारी परिवर्तन कम हुए। शान्ति, अहिंसा और मानवाधिकारों की बातें संसार में बहुत हो रही हैं, किन्तु सम्यक्-आचरण का अभाव अखरता है। सिद्ध एवं चमत्कारी णमोकार महामंत्र सम्यक्-आचरण को उद्घाटित करने वाला किसी धर्म विशेष का नहीं है़, यह एक सार्वभौमिक, सार्वकालिक, सार्वदैशिक मंत्र है, जिसका उच्चारण कर व्यक्ति शुद्ध आचरण एवं स्वस्थ जीवनशैली को आकार देते हुए शांति, अहिंसा, अयुद्ध, सह-जीवन का साकार कर सकता है। णमोकार मंत्र शांति एवं आध्यात्मिक शुद्धता को प्रोत्साहित करने का अमोघ मंत्र है़। यह दिवस जैन धर्म के सबसे पवित्र और सार्वभौमिक मंत्र- ‘णमोकार महामंत्र’ के सामूहिक उच्चारण के माध्यम से दुनिया भर के लोगों को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास है।

दुनिया में दो मंत्र अधिक प्रभावी हैं जिनमें एक गायत्री मंत्र और दूसरा नमस्कार महामंत्र। णमोकार महामंत्र विश्व का पवित्र, अलौकिक एवं विलक्षण मंत्र है जोकि अपनी स्वयं की आत्मा से संबंधित है। इसे नवकार महामंत्र, नमस्कार मन्त्र या ‘पंच परमेष्ठि नमस्कार’ भी कहा जाता है। इस मन्त्र में अरिहन्तों, सिद्धों, आचार्यों, उपाध्यायों और साधुओं का नमस्कार किया गया है। णमोकार महामंत्र एक लोकोत्तर मंत्र है। इस मंत्र को जैन धर्म का परम पवित्र और अनादि मूल मंत्र माना जाता है। इसमें किसी व्यक्ति का नहीं, किंतु संपूर्ण रूप से विकसित और विकासमान विशुद्ध आत्मस्वरूप का ही दर्शन, स्मरण, चिंतन, ध्यान एवं अनुभव किया जाता है। इसलिए यह अनादि और अक्षयस्वरूपी मंत्र है। लौकिक मंत्र आदि सिर्फ लौकिक लाभ पहुँचाते हैं, किंतु लोकोत्तर मंत्र लौकिक और लोकोत्तर दोनों कार्य सिद्ध करते हैं। इसलिए णमोकार मंत्र सर्वकार्य सिद्धिकारक लोकोत्तर मंत्र माना जाता है, सब पापों का नाश करने वाला है, यह अद्भुत शांति का कारक है। यह संसार में सबसे उत्तम मंगल को घटित करने वाला सिद्ध मंत्र है। णमोकार-स्मरण से अनेक लोगों के रोग, दरिद्रता, भय, तनाव, अशांति, विपत्तियाँ दूर होने की अनुभव सिद्ध घटनाएँ सुनी जाती हैं। मन चाहे काम आसानी से बन जाने के अनुभव भी सुने हैं।

णमोकार महामंत्र के जाप एवं साधना से उत्पन्न ऊर्जा एक पाथेय है जीवनशैली को बदलने का, पर्यावरण एवं प्रकृति के प्रति जागरूक होने का, शांति एवं अहिंसक जीवनशैली का, शरीर, मन, आत्मा एवं प्रकृति के प्रति सचेत रहने का। भगवान महावीर कितना सरल किन्तु सटीक कहते हैं- सुख सबको प्रिय है, दुःख अप्रिय। सभी जीना चाहते हैं, मरना कोई नहीं चाहता। हम जैसा व्यवहार स्वयं के प्रति चाहते हैं, वैसा ही व्यवहार दूसरों के प्रति भी करें। यही मानवता है और मानवता का आधार भी। मूल्यों का सम्बन्ध तो ‘जियो और जीने दो’ जैसे सरल श्रेष्ठ उद्घोष से है, जो णमोकार महामंत्र की सार्थक निष्पत्ति है। इस मंत्र के प्रथम पाँच पदों में 35 अक्षर और शेष दो पदों में 33 अक्षर हैं। इस तरह कुल 68 अक्षरों का यह महामंत्र समस्त कार्यों को सिद्ध करने वाला व कल्याणकारी अनादि सिद्ध मंत्र है। इसकी आराधना करने वाला स्वर्ग यानी मोक्ष- संसारबंधनों मुक्ति को प्राप्त कर लेता है। यह मन्त्र एक भावना है, एक इच्छा है, एक कामना है जो बार बार दोहराई जाती है ताकि वैसा हो जाए, इस दृष्टि में उन्नत विश्व संरचना, हिंसा एवं युद्ध मुक्ति के लिये यह कारगर है।

सह-अस्तित्व के लिए अहिंसा अनिवार्य है और अहिंसा को फलित करने के लिये णमोकार महामंत्र अचूक उपक्रम है, अनुष्ठान है। दूसरों का अस्तित्व मिटाकर अपना अस्तित्व बचाए रखने की कोशिशें व्यर्थ और अन्ततः घातक होती हैं। आचार्य श्री उमास्वाति की प्रसिद्ध सूक्ति है- ‘परस्परोपग्रहो जीवानाम्’ अर्थात् सभी एक-दूसरे के सहयोगी होते हैं। पारस्परिक उपकार-अनुग्रह से ही जीवन गतिमान रहता है। समाज और सामाजिकता का विकास भी इसी अवधारणा पर हुआ। इस प्रकार णमोकार महामंत्र के जाप से सहयोग, सहकार, सहकारिता, समता और समन्वय जैसे उत्तम व उपयोगी मानवीय मूल्य जीवन्त होते हैं। णमोकार महामंत्र की शक्ति केन्द्र से परिधि तक परिव्याप्त व्यक्ति से लेकर विश्व तक को आनन्द और अमृत प्रदान करती है। णमोकार महामंत्र व्यक्ति में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की विराट भावना का संचार करती है। मनुष्य जाति युद्ध, हिंसा और आतंकवाद के भयंकर दुष्परिणाम भोग चुकी है, भोग रही है और किसी भी तरह के खतरे का भय हमेशा बना हुआ है। मनुष्य, मनुष्यता और दुनिया को बचाने के लिए णमोकार महामंत्र से बढ़कर कोई उपाय-आश्रय नहीं हो सकता।

इस दृष्टि से विश्व णमोकार मंत्र दिवस सम्पूर्ण विश्व को आत्म-कल्याण से विश्व-कल्याण की ताकत और प्रासंगिकता से अवगत कराने का सशक्त माध्यम है। आत्मविशुद्धि और मुक्ति के साथ-साथ जीवन को सुखद, समृद्ध, निरोगी और प्रसन्न बनाने के लिए नियमित रूप से णमोकार महामंत्र का जाप करना चाहिए। णमोकार महामंत्र हमें जीवन की समस्याओं, कठिनाइयों, चिंताओं, बाधाओं से पार पहुंचाने में सबसे बड़ा आत्म-सहायक है। यह मंगल भावनाओं से भरा मंत्र जगत में मांगल्य की वृद्धि करता है। मांगल्य की भावना को बढ़ाता है। इस मंत्र के पीछे अनंत साधकों की साधना है। इसलिए इस मंत्र का नियमित जाप करने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।

जैन मान्यता में नमस्कार महामंत्र सर्वोपरि और सर्वसिद्धिदायक महामंत्र है जिसकी शक्ति अमोघ है और प्रभाव अचिन्त्य है। इसकी साधना से साधक को लौकिक और पारलौकिक सभी प्रकार की उपलब्धियां प्राप्त होती हैं। शारीरिक और मानसिक स्वस्थता तथा शांति प्राप्त होती है और आध्यात्मिक उत्कर्ष होता है। कषायों की क्षीणता होती है। साधक वीतरागता की ओर बढ़ता है। अपने अहं का विसर्जन करके साधक अर्हं की स्थिति पर पहुंचने के लिए प्रयत्नशील होता है। णमोकार महामंत्र के वर्णों के संयोजन पर विचार करें तो यह बड़ा अद्भुत है और पूर्ण वैज्ञानिक लगता है। जैन परम्परा इस मंत्र को अनादि (द्रव्य दृष्टि से) मानती है, किन्तु यदि यह मान भी लिया जाए कि इस मंत्र का संयोजन किसी महामनीषी ने किया तो उसकी अद्भुत मेधा के सम्मुख नतमस्तक होना ही पड़ता है कि उसने आध्यात्मिक विज्ञान की दृष्टि से पूर्ण संयोजन किया ही, किन्तु भौतिक विज्ञान की दृष्टि से भी यह पूर्ण है, खरा है। इसके बीजाक्षरों को अब आप आधुनिक शब्दविज्ञान की कसौटी पर कसेंगे तो पायेंगे कि इनमें विलक्षण ऊर्जा और शक्ति का भंडार छिपा है।

नमस्कार महामंत्र की साधना में हर पद का केंद्र और स्थान इस प्रकार है- णमो अरहंताणं का ज्ञान केंद्र है जो मस्तक के मध्य भाग पर स्थित होता है। णमो सिद्धाणं का दर्शन केंद्र है जो भृकुटि के मध्य भाग पर स्थित होता है। णमो आयरियाणं का विशुद्धि केंद्र है जो कण्ठ के भाग पर स्थित होता है। णमो उवज्झायाणं का आनंद केंद्र है जो हृदय के भाग पर स्थित होता है और णमो लोए सव्वसाहूणं का तेजस केंद्र है जो नाभि के भाग पर स्थित होता है। णमोकार महामंत्र दिवस आध्यात्मिक सद्भाव और नैतिक चेतना का एक महत्वपूर्ण उत्सव है, जो समूची दुनिया में शांति, सद्भाव, अमन, अयुद्ध एवं आतंकमुक्ति की कामना के साथ एकसूत्रता में पिरोने का आध्यात्मिक अनुष्ठान होगा। इसकी बहुत सार्थकता है, उपयोगिता है, इससे अंतर-वृत्तियां उद्बुद्ध होंगी, अंतरमन से अहिंसा-शांति को अपनाने की आवाज उठेगी और हिंसा-अशांति में लिप्त मानवीय वृत्तियों में अहिंसा एवं शांति आएगी।

ललित गर्ग
ललित गर्ग
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