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योग ध्यान में ही वह शक्ति जो दिलाएगी तनाव से मुक्ति

योग ध्यान द्वारा मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है

योगिनी अलका सिंह
योगा एक्सपर्ट, दिल्ली

आज पूरा विश्व मानसिक तनाव को झेल रहा है, इससे मुक्ति का सरल समाधान सिर्फ एक ही है वह है ध्यान सभी को ज रूरत है कि वह घर पर रहकर ही योग व ध्यान सीखे करे और स्वस्थ रहें। ध्यान के अभ्यास से व्यक्ति का जीवन पूर्ण तथा व्यवस्थित होता है। ध्यान द्वारा मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है। योग ध्यान से शरीर पूर्णता स्वस्थ रहता है, इसीलिए प्रत्येक व्यक्ति इस विश्व योग दिवस को अवश्य मनाए तथा दैनिक जीवन में योग को अवश्य उतारे। आज पूरा विश्व मानसिक तनाव को झेल रहा है, इससे मुक्ति का सरल समाधान सिर्फ एक ही है वह है ध्यान एवं योग सभी को जरूरत है कि वह घर पर रहकर ही योग व ध्यान सीखे और करे और स्वस्थ रहें। ध्यान के द्वारा मानसिक शक्ति को केंद्रित तथा नियंत्रित किया जा सकता है जिससे अनेक शारीरिक तथा मानसिक रोगों से छुटकारा मिल जाएगा। रोग प्रतिरोधक क्षमता में पाचन प्रणाली में सुधार, आना ,रक्तचाप में कमी आना मानसिक तनाव में कमी कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का आसान और स्थाई तरीका है ध्यान का अभ्यास के मानसिक लाभ।

मन हमारे शरीर का चालक है यदि हमारा मन शांत एवम व्यवस्थित और नियंत्रित रहता है तो अनेक लाभ मिलते हैं जैसे मानसिक तनाव में कमी बेहतर नींद एवम मन शांत एवम व्यवस्थित और नियंत्रित रहता है रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढोतरी होती हैं। इसके द्वारा अपने स्मरण शक्ति को भी विकसित किया जा सकता है इसके द्वारा संकल्प शक्ति का विकास करके अपने क्रोध को द्वेष आदि को दूर करके मानसिक शक्ति प्राप्त की जा सकती है।
ध्यान:
ध्यान का अर्थ भीतर से जाग जाना ध्यान है। सदा निर्विचार की दशा में रहना ही ध्यान हैं। ध्यान या मेडिटेशन एक ऐसी मानसिक अवस्था है, जिससे व्यक्ति अपने दिमाग और मन को एकाग्र चित्त करने की कोशिश करता है चिंता तनाव डर मानसिक रोग शारीरिक रोग डिप्रेशन चिंता कुंठा से बचाव का उत्तम उपाय सिर्फ योग एवं ध्यान ही हैं। अशांति तनाव या अवस्था हमारी प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर बना देती है योग करें स्वस्थ रहें शरीर को शक्तिशाली बनाते हैं योगिक आसन और ध्यान।
तनाव हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर बहुत हानिकारक प्रभाव डालता है
ध्यान वास्तव में ध्यान क्या है। अपनी आंख बंद करके बैठ जाना भी ध्यान नहीं किसी मूर्ति का समरण करना भी ध्यान नहीं माला जपना भी ध्यान नहीं अक्सर ये कहा जाता है कि पांच 10 मिनट के लिए इशवर का ध्यान करो यह भी ध्यान नहीं समरण हैं।
ध्यान का अभ्यास करने की विधि।
आराम से किसी भी ध्यानात्मक आसन या किसी भी आरामदायक स्थिति में बैठकर ध्यान के अभ्यास को किया जा सकता है। अपनी आंखों को बंद करें और सांस को नियंत्रित करने की कोशिश न करें स्वाभाविक तरीके से ही सांस लें। सांस पर अपना ध्यान केंद्रित न करें और सांस अंदर लेने और बाहर निकालने पर शरीर की गतिविधियों पर गौर करने के साथ-साथ अपने शरीर के हर अंग का निरीक्षण भी करेंगे जैसे छाती कंधा पसलियां पेट आदि। बस सिर्फ अपनी श्वास पर अपना ध्यान केंद्रित करें बिना उसकी गति या तीव्रता को नियंत्रित किये गहरी सांस ले गहरी सांस लेने के साथ साथ ही नाड़ी शोधन प्राणायाम अवश्य करें। इससे रक्त वाहिकाओं मे रक्त पवाह को बेहतर बनाने वाले योग करना हमेशा अच्छा होता है। ध्यान करते समय अपने चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट रखें। इससे आपको आराम शांति और ध्यान में मन लगाने में मदद मिलती है। बैठकर ध्यान करते वक्त अपनी आंखें बंद रखें। इससे ध्यान करते समय मन नहीं भटकता।

अभ्यास खत्म होने के बाद धीरे-धीरे अपनी आंखें खोले। मन के अब अपने अंदर आई स्फूर्ति को महसूस करने की कोशिश करें। आपको ताजगी का एहसास होगा। ध्यान द्वारा मानसिक शक्ति को केंद्रित तथा नियंत्रित किया जा सकता है। जिससे अनेक शारीरिक तथा मानसिक रोगों से छुटकारा मिल जाएगा इसके द्वारा अपने स्मरण शक्ति को भी विकसित किया जा सकता है इसके द्वारा संकल्प शक्ति का विकास करके अपने क्रोध को द्वेष आदि को दूर करके मानसिक शक्ति प्राप्त की जा सकती है। ध्यान के अभ्यास से व्यक्ति का जीवन पूर्ण तथ ाध्यान के अभ्यास से व्यक्तिगत जीवन को नियंत्रित तथा सयमित भी होता है। ध्यान के परिणीति यही है कि हम सभी अपने स्वरूप में स्थित हो जाएं मेडिटेशन के बिना हमारे मन बुद्धि कर्म जीवन सभी में अंधकार रहता है।
ध्यान अभ्यास करने से हमारा शरीर पूरी तरह से शांत हो जाता है और हमारा समस्त तनाव दूर हो जाता है। ध्यान पर किए गए परीक्षण बताते हैं कि ध्यान अभ्यास के दौरान हमारे दिमाग की तरंगे धीमी होकर 4 से 10 हर्टज पर काम करने लगते हैं। जिससे कि हमें पूरी तरह से शांत होने का एहसास मिलता है। इससे हमारे शरीर को भी अनेक लाभ मिलते हैं जैसे बेहतर नींद आना रक्तचाप में कमी आना, रोग प्रतिरोधक क्षमता और पाचन प्रणाली में सुधार और दर्द के एहसास में कमी आना । यह सभी लाभ ध्यान से हमें अपने आप ही मिलने लगते हैं। जब भी आप व्यवस्था और भावनात्मक रूप से परेशान होते हैं तब ध्यान से आप को शांति मिलती है। उमेश कुमार सिंह

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