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रक्षाबन्धन पर्व का देश में हर्षोल्लास और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया गया

भाई-बहन के पवित्र प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षाबन्धन का पर्व इस वर्ष भी पूरे देश में हर्षोल्लास और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया गया। इस पर्व ने परिवारों और समाज को पुनः प्रेम, एकता और आपसी सम्मान के सूत्र में पिरो दिया। घर-घर में बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की मंगलकामनाएं कीं। भाइयों ने भी बहनों की रक्षा, सम्मान और सहयोग का संकल्प लिया तथा उपहार एवं आशीर्वाद के रूप में अपने प्रेम की अभिव्यक्ति की।

इस वर्ष रक्षाबन्धन के मौके पर बाजारों में विशेष रौनक देखने को मिली। रंग-बिरंगी राखियों, पारंपरिक मिठाइयों और उपहारों की दुकानों पर सुबह से ही भीड़ उमड़ी रही। समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा इस पर्व को सामाजिक समरसता और भाईचारे के प्रतीक के रूप में मनाया गया। आधुनिक समय में यह पर्व केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पारस्परिक विश्वास, सहयोग और मानवता के बंधन को मजबूत करने का संदेश देता है।

इस अवसर पर प्रशासन ने भी विभिन्न स्थलों पर स्वच्छता, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए। रक्षाबन्धन का यह पर्व न केवल व्यक्तिगत रिश्तों को प्रगाढ़ करता है, बल्कि समाज में एकजुटता और सद्भाव का संदेश भी देता है। इसके साथ ही लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए भविष्य में भी इस पवित्र रिश्ते को बनाए रखने और समाज को प्रेम व सहयोग के धागों से जोड़े रखने का संकल्प लेते हैं।

भाई-बहन के पवित्र प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षाबन्धन का पर्व इस वर्ष भी पूरे देश में हर्षोल्लास और पारंपरिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। सावन पूर्णिमा के शुभ अवसर पर मनाए जाने वाले इस पर्व ने परिवारों और समाज को पुनः प्रेम, एकता और आपसी सम्मान के सूत्र में पिरो दिया। घर-घर में बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की मंगलकामनाएं कीं। भाइयों ने भी बहनों की रक्षा, सम्मान और सहयोग का संकल्प लिया तथा उपहार एवं आशीर्वाद के रूप में अपने प्रेम की अभिव्यक्ति की।

इस वर्ष रक्षाबन्धन के मौके पर बाजारों में विशेष रौनक देखने को मिली। रंग-बिरंगी राखियों, पारंपरिक मिठाइयों और उपहारों की दुकानों पर सुबह से ही भीड़ उमड़ी रही। समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा इस पर्व को सामाजिक समरसता और भाईचारे के प्रतीक के रूप में मनाया गया। धार्मिक दृष्टि से रक्षाबन्धन का विशेष महत्व है। पौराणिक कथाओं में इंद्राणी द्वारा इंद्रदेव को रक्षा सूत्र बांधने और द्रौपदी द्वारा श्रीकृष्ण को राखी बांधने के प्रसंग इस पर्व की महत्ता को दर्शाते हैं। आधुनिक समय में यह पर्व केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पारस्परिक विश्वास, सहयोग और मानवता के बंधन को मजबूत करने का संदेश देता है।

इस अवसर पर प्रशासन ने भी विभिन्न स्थलों पर स्वच्छता, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए। रक्षाबन्धन का यह पर्व न केवल व्यक्तिगत रिश्तों को प्रगाढ़ करता है, बल्कि समाज में एकजुटता और सद्भाव का संदेश भी देता है। इसके समापन के साथ ही लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हुए भविष्य में भी इस पवित्र रिश्ते को बनाए रखने और समाज को प्रेम व सहयोग के धागों से जोड़े रखने का संकल्प लेते हैं।

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