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प्रधानमंत्री ने ‘नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी रिफॉर्म्स’ को ‘जीएसटी बचत उत्सव’ बताया; आम नागरिकों को सालाना ढाई लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत होगी

प्रधानमंत्री ने नवरात्रि के पहले दिन ‘नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी रिफॉर्म्स’ की शुरुआत को ‘जीएसटी बचत उत्सव’ बताते हुए इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम करार दिया है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से देश के गरीबों, मध्यम वर्ग, किसानों, महिलाओं, व्यापारियों और उद्यमियों को बहुत फायदा होगा। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत में देशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह पर्व शक्ति की उपासना का है और इसी दिन से देश आत्मनिर्भर भारत अभियान में एक और महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। उन्होंने बताया कि इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य देश की ग्रोथ स्टोरी को गति देना, व्यापार को आसान बनाना और निवेश को अधिक आकर्षक बनाना है।

प्रधानमंत्री ने जीएसटी से पहले की जटिल कर प्रणाली को याद करते हुए कहा कि दशकों तक देश की जनता और व्यापारी ऑक्ट्रॉय, एंट्री टैक्स, सेल्स टैक्स, एक्साइज, वैट, और सर्विस टैक्स जैसे दर्जनों करों के जाल में उलझे हुए थे। उन्होंने एक विदेशी अखबार में छपे उदाहरण का जिक्र किया, जिसमें एक कंपनी को बेंगलुरु से हैदराबाद सामान भेजने में इतनी मुश्किल होती थी कि वह सामान को यूरोप भेजकर फिर वहां से हैदराबाद मंगवाना पसंद करती थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 में सरकार बनने के बाद उन्होंने जनहित में जीएसटी को प्राथमिकता दी और सभी राज्यों को साथ लेकर ‘वन नेशन-वन टैक्स’ का सपना साकार किया।

प्रधानमंत्री ने नए सुधारों की जानकारी देते हुए बताया कि अब मुख्य रूप से केवल 5% और 18% के दो टैक्स स्लैब होंगे। इसका मतलब है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल की ज्यादातर चीजें सस्ती हो जाएंगी। खाने-पीने का सामान, दवाइयां, साबुन, पेस्ट, स्वास्थ्य और जीवन बीमा जैसी अनेक वस्तुएं और सेवाएं या तो टैक्स-फ्री होंगी या उन पर केवल 5% टैक्स लगेगा। उन्होंने बताया कि जिन वस्तुओं पर पहले 12% टैक्स लगता था, उनमें से करीब 99% चीजें अब 5% टैक्स के दायरे में आ गई हैं। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से गरीबों, नियो मिडिल क्लास और मिडिल क्लास को ‘डबल बोनांजा’ मिलेगा। पिछले 11 वर्षों में 25 करोड़ लोगों के गरीबी से बाहर निकलकर ‘नियो मिडिल क्लास’ बनने का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सुधार उनके सपनों को पूरा करना और आसान बनाएंगे। घर बनाना, टीवी, फ्रिज, स्कूटर, बाइक, और कार खरीदना अब सस्ता हो जाएगा। इसके अलावा, होटल के कमरों पर भी जीएसटी कम होने से घूमना-फिरना भी किफायती हो जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ‘नागरिक देवो भव:’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ रही है, जिसकी झलक इन जीएसटी सुधारों में साफ दिखाई देती है। उन्होंने बताया कि इनकम टैक्स में छूट और जीएसटी में कटौती को मिलाकर, इन निर्णयों से देश के लोगों को सालाना ढाई लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत होगी। यही कारण है कि इसे ‘बचत उत्सव’ कहा जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए एमएसएमई (लघु, मध्यम और कुटीर उद्योग) की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीएसटी की दरें कम होने और प्रक्रियाएं आसान बनने से एमएसएमई को बहुत फायदा होगा, क्योंकि उनकी बिक्री बढ़ेगी और टैक्स भी कम देना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब भारत समृद्धि के शिखर पर था, तब हमारे लघु और कुटीर उद्योग ही अर्थव्यवस्था की रीढ़ थे। उन्होंने देशवासियों से स्वदेशी अपनाने का आह्वान किया और कहा कि हमें हर उस चीज से मुक्ति पानी होगी जो विदेशी है। उन्होंने कहा कि हमें वह सामान खरीदना चाहिए जो ‘मेड इन इंडिया’ हो, जिसमें हमारे देश के नौजवानों की मेहनत लगी हो। प्रधानमंत्री ने सभी राज्य सरकारों से भी आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी के अभियान से जुड़ने और अपने राज्यों में मैन्यूफैक्चरिंग को गति देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जब केंद्र और राज्य मिलकर काम करेंगे, तो आत्मनिर्भर भारत का सपना पूरा होगा और भारत का हर राज्य विकसित होगा।

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