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दिल्ली से बेलेम तक: जलवायु नेतृत्व में शहरों की वैश्विक आवाज़, एराइज़ सिटीज़ फ़ोरम 2025 का दिल्ली घोषणापत्र

भारत की राजधानी दिल्ली में आयोजित पहला एराइज़ सिटीज़ फ़ोरम 2025 वैश्विक जलवायु संवाद में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बन गया है। दो दिवसीय सम्मेलन के समापन पर जारी दिल्ली घोषणापत्र ने विकासशील देशों के शहरों की सामूहिक आवाज़ को एकजुट करते हुए आगामी संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP30) के लिए एक ठोस एजेंडा प्रस्तुत किया है। इस घोषणापत्र ने स्थानीय कार्रवाई, बहुस्तरीय सहयोग और स्थायी शहरी विकास के माध्यम से जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में नई सोच और साझा प्रतिबद्धता का मार्ग प्रशस्त किया है।

विकासशील देशों की साझा आवाज़

“भारत से बेलेम तक” की भावना को लेकर तैयार यह घोषणापत्र उन सभी शहरों और स्थानीय सरकारों का प्रतिनिधित्व करता है जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना कर रही हैं और समाधान की दिशा में सक्रिय हैं। इस फ़ोरम का आयोजन आईसीएलईआई – दक्षिण एशिया और राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान (एनआईयूए) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। आईसीएलईआई एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो स्थानीय सरकारों के साथ मिलकर जलवायु स्थायित्व और संवहनीयता के लिए कार्य करता है।

सम्मेलन में 25 देशों के 60 शहरों से आए 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें स्थानीय, उप-राष्ट्रीय और राष्ट्रीय सरकारों के अधिकारी, निजी क्षेत्र, अंतर्राष्ट्रीय संगठन और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल थे। सभी प्रतिभागियों ने यह संकल्प लिया कि शहरों के स्तर पर जलवायु कार्रवाई को सशक्त बनाकर समानता, संवहनीयता और अनुकूलन को वैश्विक जलवायु लक्ष्यों में शामिल किया जाएगा।

राज्य मंत्री का उद्घाटन और प्रमुख वक्तव्य

एराइज़ सिटीज़ फ़ोरम का उद्घाटन भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “शहर आर्थिक विकास के केंद्र हैं, परंतु बढ़ती जनसंख्या और प्रदूषण के कारण वे गंभीर दबाव में हैं। जहाँ चुनौतियाँ हैं, वहीं समाधान भी हैं — एराइज़ इसी भावना का प्रतीक है।” उन्होंने आईसीएलईआई-दक्षिण एशिया को सतत शहरी विकास में दो दशक से अधिक के योगदान और इस मंच के सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

फ़ोरम के विशिष्ट वक्ताओं में आईसीएलईआई के महासचिव श्री गिनो वैन बेगिन, एनआईयूए की निदेशक डॉ. देबोलिना कुंडू, एशियाई विकास बैंक के शहरी विकास एवं जल प्रभाग के निदेशक श्री नोरियो सैतो, संयुक्त राष्ट्र के भारत में समन्वयक श्री शोम्बी शार्प, और आईसीएलईआई दक्षिण एशिया के उप महासचिव श्री इमानी कुमार शामिल रहे। सभी वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि जलवायु संकट का समाधान केवल वैश्विक समझौतों से नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर की ठोस कार्रवाई से संभव है।

दिल्ली घोषणापत्र: स्थानीय प्रतिबद्धता का वैश्विक दस्तावेज़

सम्मेलन के समापन पर जारी दिल्ली घोषणापत्र को एक सामूहिक शहरी महत्वाकांक्षा का वक्तव्य बताया गया, जिसे ब्राज़ील के बेलेम में आयोजित होने वाले COP30 के अध्यक्ष को सौंपा जाएगा। यह दस्तावेज़ बताता है कि शहर और स्थानीय सरकारें जलवायु कार्रवाई में सिर्फ सहभागी नहीं, बल्कि वैश्विक परिवर्तन की अगुवाई करने वाली इकाइयाँ हैं।

घोषणापत्र में विकासशील देशों के लिए साझा प्रतिबद्धताओं की रूपरेखा दी गई है, जिसमें शामिल हैं:

  • उन्नत, मापनीय और संसाधनयुक्त बहुस्तरीय राष्ट्रीय योगदान (NDCs) के माध्यम से स्थानीय जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाना।
  • प्रकृति-आधारित समाधानों, चक्रीय अर्थव्यवस्था और अनुकूलन को जोड़कर समावेशी शहरी लचीलापन बढ़ाना।
  • वायुमंडल में छोड़ी गई ग्रीनहाउस गैसों को कम कर शून्य उत्सर्जन की दिशा में न्यायसंगत और सहभागी हरित परिवर्तन को प्रोत्साहन देना।
  • जलवायु शासन में महिलाओं, युवाओं और समुदायों की भागीदारी को सशक्त बनाना।
  • पारदर्शी डेटा प्रणालियों और बहुस्तरीय शासन को मज़बूत करना।
  • जलवायु वित्त तक शहरों की सीधी पहुँच और संसाधनों का विस्तार सुनिश्चित करना।
  • विकासशील देशों के बीच त्रिकोणीय सहयोग और पारस्परिक साझेदारी द्वारा शहरी नेतृत्व को बढ़ावा देना।

वैश्विक शासन में शहरों की भूमिका

दिल्ली घोषणापत्र वैश्विक जलवायु शासन में स्थानीय सरकारों की भूमिका को फिर से परिभाषित करता है। यह इस तथ्य की पुष्टि करता है कि जलवायु कार्रवाई के लिए शहर केवल कार्यान्वयन स्थल नहीं, बल्कि रणनीतिक नीति-निर्माता भी हैं। घोषणापत्र ने एनडीसी 3.0, जलवायु वित्त समानता, और स्थानीय योगदानों की औपचारिक मान्यता जैसे मुद्दों पर ठोस सुझाव दिए।

आईसीएलईआई दक्षिण एशिया की कार्यकारी निदेशक सुश्री इमानी कुमार ने कहा, “एराइज़ केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि भविष्य के अनुकूलन का साझा विचार और सामूहिक संकल्प है। भारत से बेलेम तक यह यात्रा विचारों को नवाचार में बदलने का प्रतीक है।”

शहरी नेतृत्व की नई परिभाषा

आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन के महानिदेशक अमित प्रोथी ने कहा कि “शहरीकरण की गति और व्यापकता अभूतपूर्व है। अब आवश्यक है कि हम जोखिमों को बेहतर समझें, अवसंरचना को नए दृष्टिकोण से परिभाषित करें और सभी हितधारकों को परिवर्तन का कारक बनाएं।”

एनआईयूए की निदेशक डॉ. देबोलिना कुंडू ने कहा कि “दिल्ली घोषणापत्र इस बात का प्रमाण है कि जलवायु चुनौतियों के बावजूद शहर परिवर्तनकारी बदलाव लाने की क्षमता रखते हैं। अब यह सुनिश्चित करना होगा कि जलवायु समाधान व्यावहारिक, समावेशी और अनुकूल हों।”

फोरम की चर्चाएँ

दो दिनों में आयोजित सत्रों में अनेक विषयों पर गहन विमर्श हुआ:

  • राष्ट्रीय जलवायु महत्वाकांक्षा और स्थानीय प्रयासों के बीच संतुलन,
  • अपशिष्ट और जल चक्रीयता,
  • समावेशी एवं संवहनीय शहरी खाद्य प्रणालियाँ,
  • जलवायु-अनुकूल विकास में प्रकृति आधारित समाधान,
  • शहरी ताप प्रबंधन और आपदा तैयारी,
  • जलवायु वित्त नीतियाँ और डिजिटल समाधान।

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