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पुलिस स्मृति दिवस: राष्ट्र की सुरक्षा के प्रहरी वीरों को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की श्रद्धांजलि

देशभर में आज पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर उन वीर पुलिसकर्मियों को नमन किया गया, जिन्होंने राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा और शांति के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इस अवसर पर रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों के जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

1959 की वीरगाथा: बलिदान का प्रतीक दिवस

यह दिवस वर्ष 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में घटित उस ऐतिहासिक घटना की याद में मनाया जाता है, जब भारी हथियारों से लैस चीनी सैनिकों ने भारतीय पुलिस दल पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में सीआरपीएफ के 10 वीर जवानों ने देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दी थी। तभी से हर वर्ष 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि उन अमर शहीदों के बलिदान को सदैव स्मरण रखा जा सके।

रक्षा मंत्री ने की श्रद्धांजलि अर्पित, पुलिस बलों की भूमिका की सराहना

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में शहीद पुलिसकर्मियों के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण को नमन किया। उन्होंने कहा कि पुलिस और सशस्त्र बल — दोनों ही राष्ट्र की सुरक्षा के दो अटूट स्तंभ हैं। जहाँ सशस्त्र बल देश की सीमाओं और भौगोलिक अखंडता की रक्षा करते हैं, वहीं पुलिस बल समाज की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक अखंडता को सुनिश्चित करते हैं।

उन्होंने कहा, “सेना और पुलिस भले ही अलग-अलग मोर्चों पर कार्यरत हों, परंतु उनका लक्ष्य एक ही है — राष्ट्र की रक्षा और जनसुरक्षा सुनिश्चित करना। जब हम 2047 तक विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, तब बाहरी और आंतरिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना पहले से कहीं अधिक आवश्यक है।”

आधुनिक चुनौतियाँ और पुलिस की भूमिका

रक्षा मंत्री ने बदलते समय की सुरक्षा चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज सीमाओं पर अस्थिरता के साथ-साथ समाज के भीतर अपराध, आतंकवाद और वैचारिक युद्ध के नए रूप सामने आ रहे हैं। अपराध अब अधिक संगठित, अदृश्य और जटिल हो गए हैं, जिनका उद्देश्य समाज में अराजकता फैलाना और राष्ट्र की स्थिरता को कमजोर करना है।

उन्होंने कहा, “यदि आज नागरिक चैन की नींद सो पा रहे हैं, तो इसका श्रेय हमारे सशस्त्र बलों और पुलिस कर्मियों की सतर्कता व समर्पण को जाता है। नागरिकों और पुलिस के बीच यही विश्वास देश की स्थिरता और सुरक्षा की सबसे मजबूत नींव है।”

नक्सलवाद के अंत की दिशा में निर्णायक प्रगति

श्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में नक्सलवाद के diminishing प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ, बीएसएफ, राज्य पुलिस और स्थानीय प्रशासन के संयुक्त प्रयासों ने देश की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ किया है।

रक्षा मंत्री ने कहा, “वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में अब विश्वास और विकास का वातावरण स्थापित हो रहा है। कई शीर्ष नक्सली मारे गए हैं और अनेक आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं। जो क्षेत्र कभी ‘लाल गलियारे’ के नाम से जाने जाते थे, वे अब ‘विकास गलियारों’ में परिवर्तित हो रहे हैं। यह परिवर्तन पुलिस और सुरक्षा बलों की अदम्य इच्छाशक्ति और समर्पण का परिणाम है।”

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अगले वर्ष मार्च तक नक्सलवाद की समस्या लगभग समाप्त हो जाएगी, जिससे देश के सबसे बड़े आंतरिक खतरों में से एक पर स्थायी नियंत्रण स्थापित होगा।

पुलिस आधुनिकीकरण और प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण

रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय सुरक्षा और पुलिस सुधारों के क्षेत्र में उठाए गए कदमों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक पुलिस बलों के योगदान को उचित मान्यता नहीं मिली थी, परंतु 2018 में राष्ट्रीय पुलिस स्मारक की स्थापना के माध्यम से इस ऐतिहासिक कमी को पूरा किया गया।

उन्होंने बताया कि सरकार ने पुलिस बलों को अत्याधुनिक हथियारों, ड्रोन, निगरानी प्रणालियों, फोरेंसिक प्रयोगशालाओं और डिजिटल पुलिसिंग जैसी उन्नत क्षमताओं से सुसज्जित किया है। इसके अलावा राज्यों को पुलिस आधुनिकीकरण के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

श्री सिंह ने बल दिया कि इन संसाधनों का प्रभावी उपयोग तभी संभव है जब सभी सुरक्षा एजेंसियां बेहतर समन्वय और एकीकरण के साथ कार्य करें।

समाज और पुलिस का परस्पर सहयोग – मजबूत सुरक्षा की नींव

रक्षा मंत्री ने कहा कि पुलिस और समाज एक-दूसरे के पूरक अंग हैं। जब नागरिक कानून का सम्मान करते हैं और पुलिस के साथ सहयोग करते हैं, तब सुरक्षा तंत्र अधिक सशक्त बनता है। उन्होंने कहा, “पुलिस व्यवस्था तभी प्रभावी होती है जब नागरिक जिम्मेदारी, सहयोग और विश्वास के साथ उसके साथ खड़े हों। यही संबंध देश की सामाजिक समरसता और आंतरिक शांति का आधार है।”

कार्यक्रम में शामिल रहे वरिष्ठ अधिकारी और पुलिसकर्मी

इस अवसर पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और दिल्ली पुलिस की संयुक्त परेड आयोजित की गई, जिसमें पुलिस कर्मियों ने अपने अनुशासन, पराक्रम और गौरव का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार, गृह सचिव श्री गोविंद मोहन, खुफिया ब्यूरो के निदेशक श्री तपन डेका, बीएसएफ महानिदेशक श्री दलजीत सिंह चौधरी सहित विभिन्न केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, सेवानिवृत्त महानिदेशकगण तथा अनेक पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।

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