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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया अत्याधुनिक डीपीएसयू भवन का उद्घाटन, चार उपक्रमों को मिला मिनीरत्न का दर्जा

देश के रक्षा उत्पादन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 10 नवंबर, 2025 को नई दिल्ली के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, नौरोजी नगर स्थित नवनिर्मित डीपीएसयू भवन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (DPSUs) की एक व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें चार प्रमुख डीपीएसयू — म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (MIL), आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL), इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (IOL) और हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) — को मिनीरत्न (श्रेणी-I) का दर्जा प्रदान किया गया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया अत्याधुनिक डीपीएसयू भवन का उद्घाटन, चार उपक्रमों को मिला मिनीरत्न का दर्जा

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में रक्षा उपक्रमों का योगदान

बैठक को संबोधित करते हुए श्री राजनाथ सिंह ने देश के रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करने में डीपीएसयू की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि “हमारे सभी 16 डीपीएसयू आत्मनिर्भर भारत के मज़बूत स्तंभ हैं”, जो देश की रक्षा क्षमताओं को निरंतर सुदृढ़ कर रहे हैं।
उन्होंने विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में डीपीएसयू की भागीदारी की प्रशंसा की, जिसने स्वदेशी प्लेटफार्मों की विश्वसनीयता और क्षमता को प्रमाणित किया है।

मिनीरत्न दर्जा: दक्षता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक

रक्षा मंत्री ने चार डीपीएसयू — एचएसएल, एवीएनएल, आईओएल और एमआईएल — को मिनीरत्न का दर्जा मिलने पर बधाई दी और इसे रक्षा क्षेत्र में उनकी बढ़ती दक्षता, स्वायत्तता और योगदान का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में आयुध निर्माणी बोर्ड के सात नए डीपीएसयू में परिवर्तन से नवाचार और प्रतिस्पर्धा के नए अवसर खुले हैं।
मिनीरत्न दर्जा मिलने से ये उपक्रम अब क्षमता विस्तार, आधुनिकीकरण, सार्वजनिक-निजी साझेदारी और संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से रक्षा उत्पादन के नए क्षितिजों की खोज कर सकेंगे।

रक्षा उत्पादन और निर्यात में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ

श्री राजनाथ सिंह ने बताया कि वर्ष 2024-25 में भारत ने 1.51 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन दर्ज किया, जिसमें डीपीएसयू का योगदान 71.6 प्रतिशत रहा। इसी अवधि में रक्षा निर्यात 6,695 करोड़ रुपये तक पहुँचा, जो वैश्विक स्तर पर भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादों में बढ़ते विश्वास का संकेत है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा उत्पाद अब वैश्विक सम्मान प्राप्त कर रहे हैं।

आत्मनिर्भर अनुसंधान और विकास की दिशा में कदम

रक्षा मंत्री ने सभी डीपीएसयू से आग्रह किया कि वे महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के स्वदेशीकरण, अनुसंधान एवं विकास (R&D), उत्पाद गुणवत्ता सुधार, समयबद्ध आपूर्ति और निर्यात वृद्धि के लिए एक रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाएँ।
उन्होंने निर्देश दिया कि डीपीएसयू स्पष्ट रोडमैप तैयार करें जिसमें स्वदेशीकरण और अनुसंधान के मापनीय लक्ष्य निर्धारित हों, जिन्हें आगामी समीक्षा बैठकों में प्रस्तुत किया जाए। सरकार की ओर से उन्होंने यह आश्वासन दिया कि जहाँ भी किसी विशेष सहायता या हस्तक्षेप की आवश्यकता होगी, उसे तत्काल उपलब्ध कराया जाएगा।

तीन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान

इस अवसर पर डीपीएसयू के बीच तीन प्रमुख समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान हुआ, जो सहयोग और आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत करते हैं।

  • हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) के साथ 10,000 टन की फोर्जिंग प्रेस सुविधा स्थापित करने हेतु समझौता किया, जिससे रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्रों में एल्यूमीनियम मिश्र धातुओं की आयात निर्भरता घटेगी।
  • एचएएल ने वाईआईएल को 435 करोड़ रुपये की ब्याज-मुक्त अग्रिम राशि देने की प्रतिबद्धता जताई, जबकि बीडीएल ने दस वर्षों में 3,000 मीट्रिक टन कार्यभार देने का समझौता किया।
  • तीसरे एमओयू के तहत, मिश्र धातु निगम लिमिटेड (मिधानी) में एक ‘मेटल बैंक’ स्थापित किया जाएगा, जो राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं के लिए आवश्यक कच्चे माल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।

अनुसंधान एवं विकास मैनुअल का अनावरण

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने एचएएल अनुसंधान एवं विकास मैनुअल सहित कई नई आरएंडडी पहलों का भी अनावरण किया। इसका उद्देश्य डिजिटलीकरण, बौद्धिक संपदा सृजन, और भारतीय शिक्षा संस्थानों के साथ सहयोग के माध्यम से अनुसंधान एवं विकास तंत्र को सुदृढ़ करना है।
डीपीएसयू का यह नया रोडमैप लाइसेंस प्राप्त उत्पादन से स्वदेशी डिज़ाइन और विकास की दिशा में परिवर्तन का संकेत देता है, जो रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।

सतत और हरित रक्षा निर्माण की पहल – ‘स्वयं’

सतत विकास की दिशा में रक्षा क्षेत्र की प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए श्री राजनाथ सिंह ने ‘स्वयं’ (Sustainable and Green Defence Manufacturing) का शुभारंभ किया। यह एक व्यापक कार्यक्रम है जो ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने और कार्बन उत्सर्जन में कमी के प्रयासों को एकीकृत करता है। ‘स्वयं’ को स्वर्ण डैशबोर्ड और डीपीएसयू ऊर्जा दक्षता सूचकांक जैसे डिजिटल टूल्स का समर्थन प्राप्त है, जो आत्मनिर्भरता और स्थिरता को साथ जोड़ने की दिशा में एक अभिनव कदम है।

हरित ऊर्जा उपयोग में अग्रणी डीपीएसयू

रक्षा मंत्री ने इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड (IOL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) को 100 प्रतिशत हरित ऊर्जा उपयोग हासिल करने पर सम्मानित किया। आईओएल ने सितंबर 2025 से पूर्ण रूप से नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग शुरू किया, जिससे केवल पहली तिमाही में 8,669 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी और 26.36 लाख रुपये की बचत हुई। वहीं बीईएल ने जनवरी 2025 में RE100 लक्ष्य हासिल किया, जिससे उसका स्कोप-2 उत्सर्जन 15,000 मीट्रिक टन से घटकर शून्य पर पहुँच गया। यह भारत के नेट ज़ीरो लक्ष्यों की दिशा में एक प्रेरणादायक उपलब्धि है।

अत्याधुनिक डीपीएसयू भवन: सहयोग और नवाचार का केंद्र

नव स्थापित डीपीएसयू भवन रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ की परिकल्पना का परिणाम है। रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा विकसित यह भवन ‘संगच्छध्वं संवदध्वं’ (एक साथ चलें, एक साथ संवाद करें) के आदर्श वाक्य को मूर्त रूप देता है। भवन में आधुनिक सम्मेलन कक्ष, सिमुलेशन सुविधाएँ, प्रदर्शनी क्षेत्र और उच्च तकनीकी अवसंरचना उपलब्ध है, जो सभी 16 डीपीएसयू के बीच सहयोग, नवाचार और समन्वय को प्रोत्साहित करेगा।

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