लखनऊ में 16 नवम्बर को होगा विमोचन
बांदा: जनपद के रचनाधर्मी शिक्षक एवं साहित्यकार प्रमोद दीक्षित मलय के संपादन में बेसिक शिक्षकों द्वारा गिजुभाई बधेका लिखित पुस्तक ‘दिवास्वप्न’ पर केंद्रित पत्र लेख संग्रह ‘दिवास्वप्न संवाद’ का आवरण गत दिवस रचनाकारों के समक्ष आनलाइन माध्यम से साझा किया गया। ‘दिवास्वप्न संवाद’ में बेसिक शिक्षा में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षिकाओं के 28 भावपूर्ण पत्र सम्मिलित किये गये हैं। शिक्षाविद् एवं ‘शैक्षिक दखल’ के संपादक महेशचंद्र पुनेठा ने भूमिका लिखी है। संग्रह का प्रकाशन द पर्पल पेपर, नई दिल्ली द्वारा किया गया है। यह संग्रह अपनी तरह का बिलकुल अनूठा प्रयोग है और साहित्य की पत्र विधा पर आधारित है।

उक्त जानकारी देते हुए ‘दिवास्वप्न संवाद’ के संपादक प्रमोद दीक्षित मलय ने बताया कि विद्यालयों को आनंदघर बनाने के लिए ‘शैक्षिक संवाद मंच’ का गठन 2012 में किया था। मंच की मासिक पुस्तक चर्चा कार्यक्रम में आनंदमय शिक्षा की पैरवी करती गिजुभाई बधेका की कृति ‘दिवास्वप्न’ पर परिचर्चा हुई थी। शिक्षकों के इस संवाद को परिमार्जित कर पत्र विधा में लिखवाकर पुस्तक में संग्रहीत किया गया है ताकि पाठकों तक विचार पहुंच सकें।
‘दिवास्वप्न संवाद’ संग्रह में 28 रचनाकारों के पत्र शामिल हैं, जिनमें प्रतीक्षा त्रिपाठी, वैशाली मिश्रा (कानपुर देहात), दुर्गेश्वर राय एवं दीप्ति राय ‘दीपांजलि’ (गोरखपुर), प्रतीक गुप्ता (बहराइच), विजय प्रकाश जैन (राजस्थान), गुंजन भदौरिया (कन्नौज), सौरभ गुप्ता (गोण्डा) डॉ. यशोधरा यादव ‘यशो’ एवं राजश्री यादव (आगरा), डॉ. श्रवण कुमार गुप्त एवं विन्ध्येश्वरी प्रसाद (वाराणसी), आभा त्रिपाठी, अनीता यादव, मीरा कुमारी एवं मीनाक्षी सिंह (मऊ), पवन कुमार तिवारी, अर्चना गुप्ता एवं प्रमोद दीक्षित मलय (बांदा), रुचि सिंह तोमर (फतेहपुर), रेखा कुशवाहा (उन्नाव), राम जी शर्मा (इटावा), कनक एवं सुनीता वर्मा (लखनऊ), आरती साहू (बाराबंकी), विजय शंकर यादव (अम्बेडकरनगर), ऋतु श्रीवास्तव (हापुड़), कुसुम कुमारी (बलरामपुर) आदि रचनाकारों के पत्र लेख तथा परिशिष्ट अंतर्गत डॉ. दामोदर जैन (भोपाल), डॉ. प्रमोद कुमार सेठिया (मंदसौर) तथा प्रवीण त्रिवेदी (फतेहपुर) के लेख सम्मिलित हैं। रचनाकारों ने ‘दिवास्वप्न संवाद’ के आवरण की सराहना करते हुए बधाई एवं शुभकामना दी हैं।