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साहित्यिक संस्था हिंदी की गूँज का 13वाँ वार्षिकोत्सव और सम्मान समारोह आयोजित

देश की अग्रणी साहित्यिक संस्था हिन्दी की गूंज ने अपना 13वाँ वार्षिकोत्सव हिंदी भवन के सभागार में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया। यह माँ हिंदी के लिए सम्मान का दिन रहा, जब संस्था ने अपने तेरहवें वार्षिकोत्सव में पूरे सभागार को हिंदीमय बना दिया । भावना अरोड़ा की सरस्वती वंदना से प्रारंभ कार्यक्रम अंत तक जीवंत रहा । कार्यक्रम की अध्यक्षता जनार्दन मिश्र ने की। वहीं मंचासीन अतिथियों में सुभाषचन्द्र कानखेडिया, डॉ. रवि शर्मा मधुप, साहित्यकार श्याम सुशील ने संस्था के उत्कृष्ट कार्यों की प्रशंसा की। खेमेन्द्र सिंह और डॉ वर्षा सिंह का संचालन उत्कृष्ट रहा, उन्होंने पूरे कार्यक्रम को निश्चित समय सीमा में बांधते हुए कार्यक्रम को रसमय बनाते हुए अपनी संचालन प्रतिभा का परिचय दिया ।

साहित्यिक संस्था हिंदी की गूँज का 13वाँ वार्षिकोत्सव और सम्मान समारोह आयोजित

शशि प्रकाश ने अपने वक्तव्य में संस्था की विकास यात्रा का परिचय देते हुए गागर में सागर भर कर दर्शकों में संस्था के प्रति आदर भाव जगाया, वहीं लौह कुमार ने हिंदी को रोजगार से जोड़ने के मंत्र से हिंदी को सम्मानित किया। कार्यक्रम को रसमय बनाने के लिए माधुरी शर्मा , रमेश गंगेले, महिपाल सिंह, डॉ. रानी गुप्ता, डॉ विनोद चौहान प्रसून और तरुणा पुंडीर द्वारा प्रस्तुत गीत, ग़ज़ल और कविताओं की प्रस्तुति अविस्मरणीय रही। काष्ठ शिल्पी जीवन जोशी द्वारा हिंदी की गूंज संस्था के लिए प्रस्तुत कलाकृति की सराहना सभी ने मुक्तकंंठ से की गई ।

संस्था ने हिंदी और समाज सेवा से जुड़े ग्यारह लोगों को सम्मानित करते हुए पिछले बारह वर्षों की परम्परा को कायम रखा और हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए अपनी प्रतिबद्धता का निर्वहन किया । मंचासीन सारस्वत अतिथियों ने अपने वक्तव्य में ज्ञान वर्षा के साथ संस्था के संयोजक नरेन्द्र सिंह नीहार के व्यक्तित्व की सराहना के साथ उनकी हिंदी के प्रति प्रतिबद्धता की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए संस्था को बुलंदियों तक ले जाने के लिए पूरे परिवार की एकजुटता को श्रेय दिया । कार्यक्रम के अंत में संस्था के संयोजक नरेंद्र सिंह नीहार द्वारा विश्व के भाल पर हिंदी की बिंदी लगाने के उद्घोष और राष्ट्रीय गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में रामकुमार पांडेय, डॉ. प्रियंका साँखला, डॉ. ममता सिंह, आफताब अंसारी, विद्यासागर, डॉ. वीर सिंह रावत, डॉ. चन्द्र भान, रजनीकांत शुक्ल और गिरीश चन्द्र जोशी आदि की भूमिका उल्लेखनीय रही।

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