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IP&TAFS का 51वाँ स्थापना दिवस संचार वित्त लेखा दिवस के रूप में मनाया गया, कम्युनिकेशन फाइनेंस समिट 2025 का सफल आयोजन

भारतीय डाक एवं दूरसंचार लेखा एवं वित्त सेवा (IP&TAFS) ने अपना 51वाँ स्थापना दिवस संचार वित्त लेखा दिवस के रूप में मनाया। इस अवसर पर कम्युनिकेशन फाइनेंस समिट 2025 का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें दूरसंचार और डाक क्षेत्रों में वित्तीय शासन, सुधारों और भविष्य की चुनौतियों पर गहन विचार विमर्श हुआ। IP&TAFS एक प्रतिष्ठित केंद्रीय सिविल सेवा है, जिसमें भर्ती संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से की जाती है।

IP&TAFS का 51वाँ स्थापना दिवस संचार वित्त लेखा दिवस के रूप में मनाया गया, कम्युनिकेशन फाइनेंस समिट 2025 का सफल आयोजन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कंट्रोलर जनरल ऑफ कम्युनिकेशन अकाउंट्स (CGCA) सुश्री वंदना गुप्ता ने IP&TAFS की 51 वर्षों की गौरवशाली यात्रा का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सेवा ने भारत के दूरसंचार और डाक क्षेत्रों में वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आर्थिक सुधारों, उदारीकरण और तीव्र तकनीकी प्रगति के प्रभावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि इन परिवर्तनों ने दूरसंचार विभाग और डाक विभाग की भूमिकाओं को नए सिरे से परिभाषित किया है।

CGCA ने बताया कि वर्तमान में IP&TAFS की जिम्मेदारियाँ केवल पारंपरिक लेखा कार्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राजस्व आश्वासन, लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के आकलन एवं संग्रह, दूरसंचार ऑपरेटरों की वित्तीय निगरानी, आंतरिक लेखा परीक्षा, पेंशन प्रबंधन और नीति आधारित वित्तीय परामर्श जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक विस्तारित हो चुकी हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सेवा की प्रतिबद्धता और व्यावसायिक दक्षता के कारण दूरसंचार विभाग और डाक विभाग, दोनों ही प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा जारी शिकायत निवारण रैंकिंग में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।

क्षमता निर्माण के विषय पर प्रकाश डालते हुए सुश्री वंदना गुप्ता ने कहा कि IP&TAFS के अधीन नेशनल कम्युनिकेशन अकादमी फाइनेंस (NCA Finance) आज सर्वोत्तम क्षमता निर्माण आयोग द्वारा उच्चतम रेटिंग प्राप्त केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान के रूप में प्रतिष्ठित है। अकादमी ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के सहयोग से 15 अखिल भारतीय सेवाओं और केंद्रीय सेवाओं के 176 अधिकारियों के लिए आधारभूत प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का सफल आयोजन किया, जिसे LBSNAA द्वारा सराहा गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि IP&TAFS अधिकारियों की भूमिका अब दूरसंचार और डाक क्षेत्रों में मुख्य परिचालन, प्रशासनिक, लेखा परीक्षा और नीति सहायक दायित्वों तक विस्तृत हो चुकी है।

सलाहकार (वित्त) सुश्री दर्शन एम. डाबराल ने स्थापना दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए सेवा की यात्रा पर समय समय पर आत्ममंथन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि IP&TAFS ने 1990 के दशक के उदारीकरण काल और 2020 के दशक की डिजिटल परिवर्तन अवधि में महत्वपूर्ण बदलावों का अनुभव किया है। इस दौरान सेवा की भूमिका एक साधारण सेवा प्रदाता से विकसित होकर नियामक और रणनीतिक वित्तीय साझेदार के रूप में परिवर्तित हुई है। उन्होंने फुर्ती और अनुकूलनशीलता को IP&TAFS की प्रमुख विशेषताएँ बताते हुए डाक विभाग में IT 2.0, तेज लेखा सुधारों और SAMPANN, IT 2.0 तथा SARAS जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने इन डिजिटल प्रणालियों के अन्य मंत्रालयों, राज्य सरकारों और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण ढाँचों तक विस्तार का सुझाव भी दिया।

वरिष्ठ उप महानिदेशक (PAF) श्री राजीव कुमार ने अपने संबोधन में दूरसंचार और डाक क्षेत्रों में आए व्यापक परिवर्तनों, चुनौतियों और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि IP&TAFS ने समय के साथ स्वयं को निरंतर विकसित किया है, जिसमें वरिष्ठ और सेवानिवृत्त अधिकारियों की मार्गदर्शक भूमिका और संस्थागत स्मृति का बड़ा योगदान रहा है।

इस अवसर पर अपर नियंत्रक महालेखाकार सुश्री आस्था सक्सेना ने भी शुभकामनाएँ व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि लेखा एवं वित्त सेवाएँ सदैव शासन व्यवस्था का अनिवार्य स्तंभ रही हैं। उन्होंने पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम जैसे प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स और IP&TAFS के बीच सहयोग को रेखांकित किया और विश्वास व्यक्त किया कि संचार वित्त भविष्य में भी सरकारी कार्यप्रणाली के केंद्र में बना रहेगा।

सम्मेलन के दौरान सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों ने IP&TAFS के विकास से जुड़े अपने अनुभव साझा किए, जिससे कार्यरत अधिकारियों को दीर्घकालिक दृष्टि और संस्थागत स्मृति का लाभ मिला। SAMPANN 2.0 के माध्यम से पेंशन प्रबंधन, डाक सुधारों के लिए IT 2.0, तथा राजस्व आश्वासन और वित्तीय चुनौतियों के समाधान जैसे विषयों पर भी सार्थक चर्चा हुई।

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