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कैंसर के लक्षणों को न करें नजरअंदाज : समय रहते पहचानें और बचाव करें

कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसका नाम सुनते ही डर का अनुभव होता है। लेकिन अगर इसके शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए तो इसके इलाज की संभावना बढ़ जाती है। खासकर अनुवांशिक कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में पहचान करना अपेक्षाकृत आसान होता है। यदि परिवार में किसी को कैंसर रहा हो, तो युवावस्था में नियमित जांच कराना आवश्यक है। उदाहरण के लिए, यदि किसी महिला की मां या मौसी को ब्रेस्ट या ओवेरियन कैंसर था, तो युवावस्था में जांच करने से डेंस टिश्यू की उपस्थिति का पता लगाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में, रेडियोलॉजिस्ट की सलाह पर एक और स्क्रीनिंग टेस्ट कराना चाहिए।

अनुवांशिक कैंसर का मुख्य कारण जीन में परिवर्तन (म्यूटेशन) होता है, जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, कई मामलों में पर्यावरणीय और जीवनशैली से जुड़े कारक जैसे अस्वस्थ आहार, तंबाकू, शराब और हानिकारक रसायनों के संपर्क में आने से भी कैंसर हो सकता है।

ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर के मामलों में, बीआरसीए1 और बीआरसीए2 जीन में उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। ये जीन माता या पिता की ओर से संतान में स्थानांतरित हो सकते हैं। अन्य कैंसर की तुलना में, बीआरसीए1 और बीआरसीए2 म्यूटेशन से होने वाला ब्रेस्ट और ओवेरियन कैंसर युवावस्था में ही विकसित हो सकता है।

कैंसर के सबसे आम लक्षण

  1. असामान्य गांठ या सूजन – शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ या सूजन महसूस होना एक गंभीर संकेत हो सकता है।
  2. अचानक वजन कम होना – बिना किसी स्पष्ट कारण के तेजी से वजन घटने को नजरअंदाज न करें।
  3. लगातार थकान – यदि पर्याप्त आराम के बावजूद अत्यधिक थकान बनी रहती है, तो यह कैंसर का लक्षण हो सकता है।
  4. त्वचा में बदलाव – तिल का आकार बदलना, असामान्य निशान या घाव जो ठीक न हो, स्किन कैंसर का संकेत हो सकता है।
  5. बिना कारण बुखार – लंबे समय तक लगातार बना रहने वाला बुखार कैंसर की ओर संकेत कर सकता है।
  6. असामान्य रक्तस्राव – यदि पेशाब, मल, या खांसी में खून आ रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  7. भोजन निगलने में कठिनाई – गले, अन्नप्रणाली या पेट के कैंसर का लक्षण हो सकता है।
  8. खांसी या आवाज़ में बदलाव – लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी, आवाज में बदलाव लंग कैंसर का संकेत हो सकता है।
  9. आंत या मूत्र संबंधी समस्याएं – लगातार कब्ज, दस्त, या मूत्र मार्ग में बदलाव प्रोस्टेट, कोलन या ब्लैडर कैंसर का लक्षण हो सकता है।
  10. स्थायी दर्द – लगातार बना रहने वाला दर्द गंभीर बीमारी का संकेत दे सकता है।

कब कराएं जांच?

अनुवांशिक कैंसर के केवल लगभग 10% मामले ही होते हैं, लेकिन यदि परिवार में किसी को कैंसर रहा हो, तो जांच करवाना बेहद जरूरी है। 50 वर्ष की उम्र से पहले कैंसर होने का खतरा अधिक रहता है, लेकिन यदि पारिवारिक इतिहास हो तो 30 वर्ष की उम्र से ही नियमित कैंसर स्क्रीनिंग शुरू कर देनी चाहिए।

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कैंसर की जांच और रोकथाम के उपाय

  • 1. केमोप्रीवेंशन (Chemoprevention)

इसमें कुछ विशेष दवाइयों का सेवन किया जाता है जो एस्ट्रोजेन के प्रभाव को कम कर कैंसर के खतरे को घटाती हैं।

  • 2. बाइलैटरल प्रोफाइलेक्टिक मास्टेक्टॉमी

यह प्रक्रिया ब्रेस्ट कैंसर के उच्च जोखिम वाली महिलाओं के लिए अपनाई जाती है, जिसमें दोनों स्तनों को हटा दिया जाता है। इससे कैंसर की संभावना 90% तक कम हो सकती है।

  • 3. प्रोफाइलैक्टिक ऊफोरेक्टॉमी

बीआरसीए1 और बीआरसीए2 जीन वाले महिलाओं में ओवेरियन कैंसर के खतरे को कम करने के लिए अंडाशय (ओवरी) को हटा दिया जाता है। यह लगभग 96% तक कैंसर की संभावना को कम कर सकता है।

शुरुआती दौर में कैंसर की पहचान के लिए जांच

  1. मैमोग्राफी (Mammography) – स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए X-ray आधारित यह जांच सबसे प्रभावी मानी जाती है।
  2. क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्जाम (Clinical Breast Exam) – डॉक्टर द्वारा किए जाने वाली शारीरिक जांच जिसमें स्तनों में गांठ या असमान्यता की पहचान की जाती है।
  3. मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI) – यह जांच रेडियो तरंगों और चुंबकीय क्षेत्रों के माध्यम से शरीर की विस्तृत तस्वीर प्रदान करती है।
  4. पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (PET Scan) – यह कैंसर की जांच में सहायक होती है और शरीर में फैले कैंसर को ट्रैक करने में मदद करती है।
  5. फाइन नीडल एस्पिरेशन साइटोलॉजी (FNAC) – बायोप्सी की मदद से संदिग्ध कोशिकाओं की जांच करने के लिए यह विधि अपनाई जाती है।

ऐसे कम करें कैंसर होने की संभावना

  1. स्वस्थ आहार लें – अधिक फल, सब्जियां और संपूर्ण अनाज का सेवन करें।
  2. धूम्रपान और शराब से बचें – तंबाकू और शराब कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक हैं।
  3. नियमित व्यायाम करें – रोजाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि कैंसर के खतरे को कम कर सकती है।
  4. वजन को नियंत्रित रखें – मोटापा भी कैंसर के कई प्रकारों से जुड़ा हुआ है।
  5. पर्यावरणीय जोखिमों से बचाव करें – हानिकारक रसायनों और रेडिएशन से दूर रहें।
  6. नियमित मेडिकल चेकअप कराएं – खासकर यदि आपके परिवार में कैंसर का इतिहास रहा हो।

आधुनिक वैश्विक कल्याण संस्थान (ट्रस्ट) द्वारा कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसकी रोकथाम, पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करने के लिए कैंसर सप्ताह का अभियान चलाया जा रहा है। कैंसर का समय पर पता लगाना और रोकथाम संभव है यदि हम इसके लक्षणों को गंभीरता से लें और नियमित जांच कराएं। अनुवांशिक और गैर-अनुवांशिक दोनों तरह के कैंसर के लिए उचित सावधानी बरतने से इस बीमारी को हराया जा सकता है। यदि कोई भी लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें और आवश्यक जांच करवाएं।

यह लेख सिर्फ जानकारी के लिए है डॉक्टर से सलाह अवश्य ले।

उमेश कुमार सिंह
उमेश कुमार सिंह
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