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डीआरआईपी चरण II और III के अंतर्गत बेंगलुरु में बांध सुरक्षा पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आईसीडीएस 2026 का आयोजन

बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना के चरण द्वितीय और तृतीय के अंतर्गत 13 से 14 फरवरी 2026 तक बांध सुरक्षा पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आईसीडीएस 2026 का आयोजन बेंगलुरु में किया गया। यह सम्मेलन भारतीय विज्ञान संस्थान के जेएन टाटा सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें देश और विदेश से विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, इंजीनियरों तथा उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

सम्मेलन का आयोजन भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग तथा कर्नाटक सरकार के जल संसाधन विभाग द्वारा केंद्रीय जल आयोग, भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु और विश्व बैंक के सहयोग से किया गया। यह आयोजन देश में बांध सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने और वैश्विक स्तर पर अनुभवों के आदान प्रदान के उद्देश्य से आयोजित किया गया।

उद्घाटन सत्र में कर्नाटक के मुख्यमंत्री श्री सिद्धारमैया ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। समारोह की अध्यक्षता कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री श्री डी.के. शिवकुमार ने की। मुख्य अतिथि के रूप में जल शक्ति मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त विश्व बैंक के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय उपाध्यक्ष श्री जोहान्स ज़ुट, अंतर्राष्ट्रीय बांध आयोग के अध्यक्ष श्री डीके शर्मा, जापान के आईसीएचआरएएम के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर तोशियो कोइके, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष श्री अनुपम प्रसाद तथा भारतीय विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री श्री सिद्धारमैया ने अपने संबोधन में कहा कि पुरानी होती अवसंरचना, जलवायु परिवर्तन से बढ़ते जोखिम और स्थिरता से जुड़ी चुनौतियों के परिप्रेक्ष्य में बांध सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा दायित्व है। उन्होंने विज्ञान आधारित नीति, संस्थागत समन्वय और समुदायों की सहभागिता को सुरक्षित एवं भविष्य उन्मुख जल अवसंरचना की आधारशिला बताया।

उपमुख्यमंत्री श्री डी.के. शिवकुमार ने कर्नाटक की जलविद्युत और जल प्रबंधन की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि बांधों की सुरक्षा किसान कल्याण, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से सीधे जुड़ी है। उन्होंने पारदर्शी नीतियों, तकनीकी नवाचार और जवाबदेह प्रशासन की आवश्यकता पर बल दिया।

जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने वीडियो संदेश के माध्यम से सम्मेलन को संबोधित किया और आयोजन के लिए कर्नाटक सरकार एवं भागीदार संस्थानों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कृषि, ऊर्जा उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन के संदर्भ में बांध सुरक्षा का महत्व निरंतर बढ़ रहा है।

राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी ने देश के 6500 से अधिक निर्दिष्ट बांधों के पुनर्वास और आधुनिकीकरण की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 का प्रभावी और समयबद्ध कार्यान्वयन जीवन, संपत्ति और सार्वजनिक निवेश की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।

उद्घाटन सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलों का शुभारंभ किया गया। अंतर्राष्ट्रीय बांध उत्कृष्टता केंद्र आईआईटी रुड़की द्वारा विकसित एआई आधारित प्लेटफॉर्म डीएएमसीएचएटी का लोकार्पण किया गया। राष्ट्रीय जल सूचना केंद्र के जल शक्ति डेटा प्रबंधन प्लेटफॉर्म का भी अनावरण हुआ। कर्नाटक के उन्नत एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन केंद्र के प्रकाशन तथा केंद्रीय जल आयोग द्वारा लघु एवं सूक्ष्म जलग्रहण क्षेत्रों के लिए बाढ़ अनुमान संबंधी दिशानिर्देश जारी किए गए। इन पहलों से डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को मजबूती मिलने की अपेक्षा है।

आईसीडीएस 2026 में बांध सुरक्षा प्रशासन, संरचनात्मक स्वास्थ्य मूल्यांकन, पुनर्वास तकनीक, तलछट प्रबंधन, जोखिम आधारित निर्णय प्रणाली, समन्वित जलाशय संचालन और बांध विफलता से सीखे गए सबकों जैसे विषयों पर विस्तृत विचार विमर्श हुआ। सम्मेलन ने नियामक ढांचे के सुदृढ़ीकरण और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षा उपायों को अपनाने पर जोर दिया।

सम्मेलन के प्रथम दिवस में 750 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भारत सहित ऑस्ट्रिया, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, नीदरलैंड, कनाडा, जाम्बिया, जिम्बाब्वे, फ्रांस, जापान, फिलीपींस और संयुक्त राज्य अमेरिका के विशेषज्ञों की भागीदारी रही। 25 प्रदर्शकों की प्रदर्शनी में बांध सुरक्षा निगरानी प्रणाली, उन्नत पुनर्वास सामग्री, डिजिटल उपकरण और नवीन तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।

दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान तकनीकी और औद्योगिक सत्रों में संरचनात्मक सुरक्षा मूल्यांकन, जलाशय प्रबंधन, समन्वित संचालन रणनीतियों और जलवायु परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य में जोखिम शमन उपायों पर विस्तार से चर्चा जारी रही।

आईसीडीएस 2026 ने यह स्पष्ट किया कि भारत बांध सुरक्षा शासन को मजबूत करने, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन बढ़ाने और जल अवसंरचना के आधुनिकीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। नीति निर्माताओं, इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के बीच सहयोगात्मक संवाद के माध्यम से यह सम्मेलन सुरक्षित बांधों, संरक्षित समुदायों और सतत जल तथा ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने की अपेक्षा रखता है।

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