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शैक्षिक संवाद मंच द्वारा आत्मकथा लेखन प्रशिक्षण सम्पन्न

‘मेरा बचपन मेरी बातें’ संग्रह से जीवंत होंगी बचपन की यादें – प्रमोद दीक्षित मलय
 50 शिक्षकों ने सीखीं आत्मकथा लेखन की तकनीक

बाँदा। शैक्षिक संवाद मंच द्वारा आत्मकथा विधा केंद्रित साझा संग्रह ‘मेरा बचपन मेरी बातें’ प्रकाशित किया जाना है। संग्रह के संभावित 50 से अधिक रचनाकारों का आत्मकथा विधा पर लेखन पूर्व आनलाइन प्रशिक्षण गत दिवस सम्पन्न हुआ जिसमें शामिल रचनाकारों ने संदर्भदाता प्रमोद दीक्षित मलय द्वारा आत्मकथा लेखन के तौर-तरीके सीखे।

      उक्त जानकारी देते हुए शैक्षिक संवाद मंच के संयोजक दुर्गेश्वर राय ने बताया कि इस प्रशिक्षण सत्र में आत्मकथा विधा के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पक्षों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य वक्ता के रूप में पुस्तक के संपादक एवं वरिष्ठ साहित्यकार प्रमोद दीक्षित मलय ने प्रतिभागियों को आत्मकथा विधा की बारीकियों से परिचित कराते हुए कहा कि आत्मकथा लेखन में लेखक को स्वयं के प्रति अत्यंत ईमानदार और तटस्थ होना चाहिए। आत्मप्रशंसा से बचते हुए  जीवन के यथार्थ को सहजता से लिखना ही एक सफल आत्मकथा की पहचान है। उन्होंने सचेत किया कि लेखन में किसी व्यक्ति पर आक्षेप लगाने से बचना चाहिए और दूसरों की निजता का सदैव सम्मान करना चाहिए।

      ‘मेरा बचपन मेरी बातें’ संग्रह में व्यक्ति के शुरुआती 14 वर्षों के घटना-प्रसंग शामिल किए जायेंगे। मलय ने बचपन को तीन हिस्सों (5-6 वर्ष, 6-11 वर्ष और 11-14 वर्ष) में विभाजित कर लिखने का व्यावहारिक खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने लेखन में दृश्यात्मकता पर जोर देते हुए कहा कि लेखन में सरसता, प्रवाहमयता और एक लय हो ताकि पाठक के सामने पूरा दृश्य जीवंत हो उठे। उन्होंने बताया कि लेखन की भाषा क्लिष्ट न होकर सरल और बोधगम्य होनी चाहिए जिसमें आंचलिकता का पुट सजीवता प्रदान करता है। लेखन अकादमिक बोझिलता से मुक्त होना चाहिए। श्री मलय ने पांडुलिपि तैयार करने के चरण क्रमशः घटनाओ की सूची बनाना, क्रम व्यस्थित करना, लेखन, विस्तार, पाठक बनकर पढना, संशोधन, संपादन और पुनर्लेखन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक अच्छा लेखक बनने के लिए एक अच्छा पाठक बनना अनिवार्य है।

     कार्यक्रम का आयोजन शैक्षिक मंच द्वारा शीघ्र प्रकाश्य साझा संकलन मेरा बचपन मेरी बातें हेतु गुणवत्तापूर्ण लेखन के उद्देश्य से किया गया। सत्र के दौरान रूबी चौधरी, नीलम रानी सक्सैना, अर्चना सिंह, निशा सिंह, दाऊ दयाल वर्मा और विन्ध्येश्वरी प्रसाद विन्ध्य आदि ने अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यशाला के अंत में संयोजक और संपादक  दुर्गेश्वर राय ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘मेरा बचपन-मेरी बातें’ पुस्तक लेखकगण के बचपन के घटना-प्रसंगों के माध्यम से पाठकों को बचपन में लौटने और महसूस करने के लिए प्रेरित करेगा। इस प्रशिक्षण में अमिता सचान, अनुराधा दोहरे, अर्चना वर्मा, अशोक आर्या, भारती तेवतिया, दाऊदयाल वर्मा, दीपा त्रिपाठी, धर्मानंद गोजे, दीप्ति राय, फरहत माबूद, गुंजन पोरवाल, कल्पना श्रीवास्तव, कनक, कुसुम मिश्रा, माधुरी त्रिपाठी, मनीषा श्रीवास्तव, मंजू वर्मा, मीराकुमारी, नीलम रानी सक्सैना, निशा सिंह, ओमप्रकाश, पवन कुमार तिवारी, प्रज्ञा गौरव, प्रीति भारती, प्रियंका त्रिपाठी, रीना ताम्रकार, रिम्पू सिंह, रूबी वर्मा, डॉ. सावित्री मिश्रा, संजय वस्त्रकार, सारिका श्रीवास्तव, सीमा तोमर, शालिनी श्रीवास्तव, शंकर कुमार रावत, डॉ. श्रवण कुमार गुप्ता, शुभा अवस्थी, स्मृति दीक्षित, सुनीता वर्मा, वैशाली मिश्रा, वत्सला सिंह, विजय शंकर यादव, विंध्येश्वरी प्रसाद विन्ध्य, विनीत कुमार मिश्रा सहित अर्धशताधिक शिक्षकों और शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया।

प्रमोद दीक्षित मलय शिक्षक, बाँदा (उ.प्र.)
प्रमोद दीक्षित मलय
शिक्षक, बाँदा (उ.प्र.)
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