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स्वस्थ शिशु, सशक्त राष्ट्र का आधार : स्तनपान की अनिवार्यता

( विशेष -साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड द्वारा पुरस्कृत )

शिशु पोषण व संरक्षण सप्ताह पर विशेष

विश्व स्तर पर मनाए जाने वाले विभिन्न जन-जागरूकता अभियानों वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल एक सप्ताह का औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वस्थ भविष्य का संकल्प है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन  (WHO) तथा यूनिसेफ के अनुसार विश्व भर में लगभग 48% शिशुओं को जन्म के पहले छह माह तक केवल स्तनपान कराया जाता है।

भारत में मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड ‌फेमिली वेलफेयर द्वारा जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019–21) के अनुसार लगभग 64% शिशुओं को छह माह तक केवल माँ का दूध मिल रहा है। यह संतोषजनक प्रगति है, किंतु लक्ष्य अभी शेष है।

क्यों आवश्यक है केवल स्तनपान?

वैज्ञानिक अनुसंधान प्रमाणित करते हैं कि जन्म के बाद पहले छह माह तक शिशु को केवल माँ का दूध देना ही सर्वश्रेष्ठ है। जैसे-शिशु के लिए लाभ, डायरिया एवं निमोनिया से सुरक्षा, कुपोषण में कमी, मधुमेह एवं मोटापे का कम जोखिम, बौद्धिक विकास में वृद्धि, संक्रमणों से प्राकृतिक सुरक्षा,जन्म के तुरंत बाद निकलने वाला पीला गाढ़ा दूध कोलोस्ट्रम (नवदुग्ध)—नवजात के लिए अमृत तुल्य है। यह एंटीबॉडी से भरपूर होता है और शिशु को प्रारंभिक रोगों से बचाता है।

 स्तनपान माताओं के लिए वरदान

स्तनपान केवल शिशु के लिए ही नहीं, माता के लिए भी लाभकारी है—स्तन एवं अंडाशय कैंसर का कम जोखिम प्रसवोत्तर स्वास्थ्य में सुधार ,प्राकृतिक गर्भ-अंतराल में सहायक माँ और शिशु के बीच भावनात्मक संबंध सुदृढ़ महान विजेता नेपोलियन बोनापार्ट ने कहा था— “मुझे श्रेष्ठ माताएँ दो, मैं तुम्हें श्रेष्ठ राष्ट्र दूँगा।”यह कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

 भ्रांतियाँ और चुनौतियाँ

बाजार में उपलब्ध पाउडर दूध के आकर्षक विज्ञापनों ने कई बार माताओं में भ्रम उत्पन्न किया है। परंतु बोतल से दूध पिलाने पर संक्रमण और डायरिया का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। स्वच्छता की कमी से नवजात गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकता है।

क्या किया जाना चाहिए?

जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान प्रारंभ हो। छह माह तक केवल माँ का दूध (पानी भी नहीं)।छह माह बाद पूरक आहार, किंतु दो वर्ष या अधिक तक स्तनपान जारी रहे।परिवार का सहयोग और सामाजिक समर्थन सुनिश्चित हो।

स्वस्थ शिशु ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है। मातृ-दूध प्रकृति का वह अनुपम उपहार है, जो निःशुल्क, सुरक्षित और संपूर्ण पोषण प्रदान करता है। आवश्यकता है जागरूकता, सामाजिक सहयोग और सकारात्मक दृष्टिकोण की।

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